राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में रामनवमी पर सरकारी अवकाश को लेकर उलझन की स्थिति निर्मित हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्मोत्सव 27 मार्च को मनाया जाएगा। वहीं सरकारी कैलेंडर में 26 मार्च को अवकाश की घोषणा की गई है। इधर प्रदेश के सभी देवी मंदिरों में 26 को अष्टमी पर हवन-पूजन और दूसरे दिन रामनवमी का पर्व मनाए जाने की तैयारी है। कई संगठनों ने राज्य शासन से सरकारी अवकाश में बदलाव की मांग भी की है। रामनवमी की तिथि को लेकर पंचांगों में अलग-अलग तिथि होने के कारण असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है। कुछ पंचांगो में जहां 26 मार्च को अष्टमी और नवमी दोनों की गणना की गई है। वहीं कुछ पंचांग में सूर्योदय को मानते हुए 27 मार्च को रामनवमी होने की जानकारी दी गई है।
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में 26 मार्च को अष्टमी पर हवन का आयोजन किया गया है। मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़, महामाया मंदिर बिलासपुर और मां दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा में रामनवमी का पर्व 27 मार्च को मनाया जाएगा। यहां के पंडितों का कहना है कि अष्टमी और नवमी तिथि के एक ही दिन पड़ने के कारण सूर्योदय को देखते हुए 27 मार्च को ही नवमी मनाई जाएगी।
इस उलझन के बीच राज्य शासन ने रामनवमी का अवकाश 27 की बजाए 26 मार्च को घोषित कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से कई संगठनों ने राज्य शासन से 27 मार्च को अवकाश देने की मांग भी की है, लेकिन फिलहाल सरकार द्वारा संशोधित आदेश जारी नहीं किया गया है, जिससे सरकारी अमला भी उलझन में है। डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर और बिलासपुर स्थित महामाया मंदिर में कल 26 मार्च को अष्टमी पर हवन पूजन होगा। मंदिर समिति ने हरिभूमि को बताया कि रात में हवन के बाद दूसरे दिन नवमी में जोत जंवारा विसर्जन और भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव का आयोजन भी किया गया है।
राज्य के शिक्षा महकमे ने स्थानीय परीक्षाओं के टाईम टेबल में 27 मार्च को परीक्षा आयोजित की है। कक्षा पहली से लेकर 11वीं तक के विद्यार्थी इस दिन परीक्षा में शामिल होंगे। वहीं सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाएं भी होगी। ऐसा पहली बार होगा, जब रामनवमी के दिन प्रदेश के विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। अयोध्या में आज रामनवमी भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में कल 26 मार्च को रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। अयोध्या में कल दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया जाएगा। विशेष तकनीक के जरिये सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ेगी। इसके पहले जन्मोत्सव पर सुबह नौ बजे से रामलला का पंचगव्य, सरयू जल और सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया जाएगा। उन्हें छप्पन प्रकार के व्यंजनों का विशेष भोग भी लगाया जाएगा।
Author: cg24x7




