रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित पूरा मंत्रिमंडल 4-5 तारीख को नवा रायपुर स्थित आईआईएम में आयोजित चिंतन शिविर में शामिल होगा। बताया गया है कि इस शिविर में देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ मंत्रियों के साथ संवाद करेंगे। इनमें प्रशासनिक प्रबंधन, सुशासन, सार्वजनिक नीति, तकनीकी नवाचार, जनसेवा और विकास प्रशासन जैसे विषय शामिल होंगे।
सरकारी योजनाओं की समीक्षा और प्रशासनिक बैठकों से आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ सरकार अब अपनी कार्यप्रणाली को नए दौर की जरूरतों के अनुरूप ढालने की तैयारी में है। सरकार इसे केवल एक औपचारिक बैठक के रूप में नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्य संस्कृति में सुधार और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की पहल के तौर पर देख रही है। बदलते प्रशासनिक और तकनीकी परिवेश में मंत्रियों को आधुनिक प्रबंधन, नीति निर्माण और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली से जोड़ने पर इस बार विशेष जोर रहेगा।
सूत्रों के मुताबिक शिविर में देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ मंत्रियों के साथ संवाद करेंगे। इनमें प्रशासनिक प्रबंधन, सुशासन, सार्वजनिक नीति, तकनीकी नवाचार, जनसेवा और विकास प्रशासन जैसे विषय शामिल होंगे। चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि शासन व्यवस्था को किस तरह अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाया जाए। डिजिटल प्रशासन, सेवा वितरण की दक्षता और योजनाओं की निगरानी के आधुनिक तरीकों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।
शिविर का फोकस केवल नीतिगत चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा। मंत्रियों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने, प्रभावी निर्णय लेने, योजनाओं की निगरानी और परिणाम आधारित कार्य संस्कृति से जुड़े पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। जानकारों का मानना है कि राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक दक्षता के बीच बेहतर तालमेल से योजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ाई जा सकती है। यही वजह है कि विभागीय कार्यों की निगरानी और लक्ष्य आधारित प्रशासनिक मॉडल पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाने की तैयारी है। इससे पहले आईआईएम में दो बार यह शिविर हो चुका है।
राज्य सरकार लंबे समय से विभागों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने पर जोर देती रही है। चिंतन शिविर में भी यह एक प्रमुख विषय रहेगा। विभिन्न विभागों की योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं, आपसी समन्वय की चुनौतियों और प्रशासनिक सुधारों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। विकास योजनाओं की सफलता केवल बजट और घोषणाओं पर निर्भर नहीं करती, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यह शिविर प्रशासनिक तंत्र की कार्यक्षमता बढ़ाने का मंच बन सकता है।
सूत्रों के अनुसार सरकार इस अवसर का उपयोग आने वाले वर्षों की विकास रणनीति पर विचार करने के लिए भी कर सकती है। विभिन्न विभागों की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की कार्य योजनाओं की समीक्षा होने की संभावना है। इसे सरकार के लिए एक ऐसे मंच के रूप में देखा जा रहा है जहां वर्तमान कार्यों का आकलन करने के साथ-साथ भविष्य की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट किया जाएगा। इससे सरकार की विकास संबंधी सोच और कार्ययोजना को एक साझा दिशा मिलने की उम्मीद है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि, ये लगातार तीसरा साल है जब आईआईएम में सभी मंत्रियों के लिए इस चिंतन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। ये सभी मंत्रियों के लिए उपयोगी होगा। कार्य संपादन से लेकर विभिन्न विषयों की जानकारी यहां विषय विशेषज्ञों द्वारा दी जाएगी। हम सब इससे लाभान्वित होंगे और यह प्रदेश की जनता के लिए भी उपयोगी होगा।
Author: cg24x7



