अब लोक सेवा केंद्र और मोबाइल से होगा जमीन का सीमांकन, ऑनलाइन दिखेगी पूरी प्रक्रिया

रायपुर, 29 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले आसान और पारदर्शी हो गई है। राज्य के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने सीमांकन संबंधी प्रकरणों के त्वरित और सुगम निपटारे के लिए नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। इसके माध्यम से अब नागरिकों को अपनी जमीन का सीमांकन कराने के लिए बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

नागरिक अब घर बैठे मोबाइल से या नजदीकी लोक सेवा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा सेवा सेतु और राजस्व विभाग के सिटीजन पोर्टल के जरिए भी सीमांकन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जा सकेगा।

तहसील कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी

पहले जमीन के सीमांकन के लिए आवेदक को तहसील कार्यालय जाकर आवेदन जमा करना पड़ता था। आवेदन जमा करने के बाद प्रकरण किस स्तर पर है, कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है या फाइल लंबित रहने का कारण क्या है, इसकी जानकारी हासिल करने के लिए भी लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।

नई ऑनलाइन व्यवस्था में इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है। आवेदन जमा होते ही वह संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार की लॉगिन आईडी में पहुंच जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकरण पर कार्रवाई शुरू होगी।

राजस्व निरीक्षक भी ऑनलाइन देंगे रिपोर्ट

सीमांकन की प्रक्रिया के तहत संबंधित राजस्व अधिकारी द्वारा जमीन की जांच और मौका मुआयना किया जाएगा। इसके बाद राजस्व निरीक्षक (RI) अपनी जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन पोर्टल पर प्रस्तुत करेंगे।

इससे सीमांकन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज और कार्रवाई डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध रहेंगे। इससे प्रकरण के निपटारे में अनावश्यक देरी को कम करने और प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

मोबाइल पर देख सकेंगे आवेदन की पूरी स्थिति

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि आवेदक अपने सीमांकन आवेदन की अद्यतन स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे। आवेदन किस स्तर पर पहुंचा है, अब तक क्या कार्रवाई हुई है और प्रकरण लंबित है तो उसका कारण क्या है—इनकी जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध होगी।

इससे आवेदकों को बार-बार संबंधित कार्यालय में जाकर जानकारी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

आपत्ति नहीं तो कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं

नई व्यवस्था में नागरिकों को एक और बड़ी राहत दी गई है। यदि सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान संबंधित जमीन या सीमा को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज नहीं की जाती है, तो आवेदक को तहसील कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी।

हालांकि, यदि सीमांकन के दौरान किसी पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज की जाती है अथवा जमीन से संबंधित विवाद सामने आता है, तो संबंधित पक्षों को आवश्यक कार्रवाई के लिए बुलाया जा सकेगा।

समयबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया पर जोर

राज्य सरकार की इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य जमीन के सीमांकन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने, प्रक्रिया को सरल बनाने और प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करना है। ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल ट्रैकिंग की सुविधा से नागरिकों को सुविधा मिलने के साथ-साथ राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में भी जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

इस व्यवस्था के लागू होने से जमीन के सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्य के लिए नागरिकों की कार्यालयों पर निर्भरता कम होगी और आवेदन से लेकर रिपोर्ट तथा प्रकरण के निपटारे तक की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से ट्रैक की जा सकेगी।

cg24x7
Author: cg24x7

Spread the love