तमिलनाडु विधानसभा ने 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से स्थायी छूट देने का प्रस्ताव किया पारित, अब छत्तीसगढ़ में भी उठने लगी ऐसी ही मांग
रायपुर, 31 अगस्त 2026। शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर छत्तीसगढ़ के सेवाकालीन शिक्षकों के बीच एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेवाकालीन शिक्षकों के लिए TET योग्यता हासिल करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाए जाने के बाद शिक्षकों को फिलहाल अतिरिक्त समय जरूर मिला है, लेकिन अब एक नई मांग ने जोर पकड़ लिया है।
शिक्षकों का एक वर्ग चाहता है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति TET व्यवस्था लागू होने से पहले निर्धारित योग्यता और नियमों के आधार पर हो चुकी थी, उन्हें बाद में अनिवार्य की गई TET परीक्षा से स्थायी छूट दी जाए। इस मांग को तमिलनाडु विधानसभा के हालिया कदम से भी बल मिला है। तमिलनाडु विधानसभा ने 25 अगस्त 2026 को 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सरकारी शिक्षकों को अनिवार्य TET से पूर्ण और स्थायी छूट देने की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया है।
अब छत्तीसगढ़ के शिक्षक भी इसी तर्ज पर प्रदेश में प्रावधान किए जाने की मांग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 2028 तक बढ़ाई समय-सीमा
TET को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले के बाद सेवाकालीन शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता की स्थिति बनी थी। बाद में समीक्षा याचिकाओं पर 29 मई 2026 को फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सेवाकालीन शिक्षकों को TET योग्यता हासिल करने के लिए पहले निर्धारित समय-सीमा में एक वर्ष की बढ़ोतरी कर दी।
अदालत ने समय-सीमा को 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया। केंद्र सरकार ने भी संसद में दिए जवाब में इसकी पुष्टि की है।
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही राज्यों और संबंधित सक्षम प्राधिकारियों से TET का आयोजन नियमित रूप से करने, संभव हो तो साल में दो बार, लगभग छह महीने के अंतराल पर परीक्षा आयोजित करने की दिशा में प्रयास करने को कहा है, ताकि पात्र शिक्षकों को निर्धारित योग्यता हासिल करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें।
समय-सीमा बढ़ी है, TET की अनिवार्यता खत्म नहीं हुई
यहां यह समझना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से समय-सीमा बढ़ाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सेवाकालीन शिक्षकों को TET से स्थायी छूट मिल गई है। अदालत ने TET योग्यता हासिल करने की अवधि को बढ़ाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आगे और समय-सीमा बढ़ाने की मांग पर विचार नहीं किया जाएगा।
ऐसे में 31 अगस्त 2028 की तारीख अब उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है, जिन्हें अदालत के निर्देशों के दायरे में TET योग्यता हासिल करनी है।
तमिलनाडु ने उठाया स्थायी छूट का मुद्दा
इसी बीच तमिलनाडु विधानसभा का फैसला देशभर के सेवाकालीन शिक्षकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। 25 अगस्त 2026 को तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से पूर्ण और स्थायी छूट देने की मांग की।
तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया। इसमें केंद्र से शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 23 में आवश्यक संशोधन करने तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी शामिल है।
तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त किए गए कई शिक्षक लंबे समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे अनुभवी शिक्षकों पर अब नई पात्रता परीक्षा लागू होने से उनके रोजगार, सेवा लाभ और पदोन्नति को लेकर परेशानी पैदा हो सकती है। विधानसभा में पेश प्रस्ताव के अनुसार राज्य में लगभग 3.28 लाख सरकारी शिक्षक TET की अनिवार्यता से प्रभावित हो सकते हैं।
छत्तीसगढ़ में भी उठने लगी ऐसी ही मांग
तमिलनाडु के इस प्रस्ताव के बाद छत्तीसगढ़ के सेवाकालीन शिक्षकों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रदेश में भी पुराने शिक्षकों के लिए इसी तरह की स्थायी छूट की मांग की जानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ के शिक्षकों का तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर हुई थी, उन्होंने वर्षों तक सरकारी स्कूलों में सेवाएं दी हैं। ऐसे शिक्षकों के लिए अब TET को अनिवार्य किए जाने को लेकर अलग-अलग स्तरों पर चिंता जताई जा रही है।
शिक्षकों के बीच यह मांग जोर पकड़ रही है कि राज्य सरकार उनकी स्थिति का अध्ययन करे और केंद्र सरकार के समक्ष तमिलनाडु की तर्ज पर स्थायी छूट का प्रस्ताव रखे।
नियुक्ति के समय TET व्यवस्था का सवाल
इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू नियुक्ति की तारीख है। 23 अगस्त 2010 की तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी अवधि में शिक्षक नियुक्तियों के लिए TET से संबंधित केंद्रीय नियामकीय व्यवस्था प्रभावी हुई।
तमिलनाडु के मौजूदा TET नियमों में भी 23 अगस्त 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों की पात्रता को लेकर अलग प्रावधान दिखाई देते हैं।
यही वजह है कि पुराने शिक्षकों का एक वर्ग यह सवाल उठा रहा है कि जिन लोगों ने नियुक्ति के समय लागू नियमों के अनुसार योग्यता पूरी कर नौकरी हासिल की थी, उन पर बाद में लागू हुई पात्रता शर्त को किस सीमा तक लागू किया जाना चाहिए।
पदोन्नति पर भी पड़ सकता है असर
TET का मुद्दा केवल नौकरी जारी रखने तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार TET योग्यता हासिल करने का संबंध पदोन्नति से भी जुड़ा हुआ है।
केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, ऐसे कुछ सेवाकालीन शिक्षक जिन्हें 1 सितंबर 2025 की स्थिति में सेवानिवृत्ति तक पांच वर्ष से कम सेवा बची थी, वे TET योग्यता हासिल किए बिना सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा में बने रह सकते हैं। हालांकि, TET योग्यता हासिल किए बिना वे पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे।
इस प्रावधान के कारण भी सेवाकालीन शिक्षकों के बीच TET को लेकर चिंता बनी हुई है।
अब छत्तीसगढ़ में क्या हो सकता है?
सुप्रीम कोर्ट की ओर से 31 अगस्त 2028 तक समय मिलने के बाद फिलहाल सेवाकालीन शिक्षकों के पास TET योग्यता हासिल करने के लिए अतिरिक्त अवसर मौजूद है। साथ ही अदालत ने राज्यों से नियमित रूप से TET आयोजित करने की अपेक्षा की है।
लेकिन तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव ने इस बहस को एक नया आयाम दे दिया है। यदि छत्तीसगढ़ में भी पुराने शिक्षकों के लिए स्थायी छूट की मांग जोर पकड़ती है तो राज्य सरकार के सामने इस मुद्दे पर शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडलों से चर्चा करने और कानूनी स्थिति का परीक्षण करने की मांग बढ़ सकती है।
हालांकि, तमिलनाडु विधानसभा का प्रस्ताव अपने आप में छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को कोई छूट नहीं देता। ऐसी व्यवस्था के लिए संबंधित केंद्रीय कानून और नियामकीय प्रावधानों में बदलाव आवश्यक होगा। तमिलनाडु के प्रस्ताव में भी केंद्र से RTE Act में संशोधन और NCTE के स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
शिक्षकों के लिए 2028 तक की मोहलत महत्वपूर्ण
फिलहाल छत्तीसगढ़ समेत संबंधित राज्यों के सेवाकालीन शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 की समय-सीमा सबसे महत्वपूर्ण तारीख है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि TET परीक्षा समय पर आयोजित हो और शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिलें।
अब देखना होगा कि छत्तीसगढ़ में TET का आयोजन किस अंतराल पर होता है और राज्य सरकार इस बीच सेवाकालीन शिक्षकों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
तमिलनाडु की विधानसभा में उठी आवाज ने देश के दूसरे राज्यों के शिक्षकों को भी यह रास्ता दिखाया है कि पुराने शिक्षकों के लिए अलग प्रावधान की मांग राजनीतिक और विधायी स्तर पर उठाई जा सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में भी TET से स्थायी छूट बनाम 2028 तक परीक्षा पास करने की अनिवार्यता को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।
Author: cg24x7




