रायपुर, 02 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जल संसाधन विभाग ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में 21 सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए कुल 76 करोड़ 93 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इन कार्यों के पूरा होने से हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने के साथ जल संरक्षण, नहरों की क्षमता बढ़ाने और बाढ़ नियंत्रण को भी मजबूती मिलेगी।
स्वीकृत राशि का उपयोग अलग-अलग जिलों में जलाशयों के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग, नहरों की सीसी लाइनिंग, एनीकट और स्टॉपडेम निर्माण, जल संरचनाओं की मरम्मत, उद्वहन सिंचाई योजनाओं तथा बाढ़ नियंत्रण और तटरक्षण कार्यों में किया जाएगा। विशेष रूप से बस्तर संभाग के आदिवासी बहुल जिलों में इन परियोजनाओं को कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांकेर में पांच प्रमुख कार्यों को मंजूरी
कांकेर जिले में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। कोयलीबेड़ा विकासखंड के लघु जलाशय पी.व्ही. 114 के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग के लिए 2.72 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे 28.4 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
इसी तरह पी.व्ही. 36 जलाशय के लिए 4.96 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके पूरा होने पर करीब 400.2 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। कोयलीबेड़ा क्षेत्र में ही पानीडोबरी एनीकट-कम-काजवे के निर्माण के लिए 3.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे 60 हेक्टेयर क्षेत्र लाभान्वित होगा।
चारामा विकासखंड के गोलकुम्हड़ा जलाशय के लिए 4.50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस परियोजना से 110 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वहीं कांकेर विकासखंड में मरकाटोला व्यपवर्तन की कन्हारपुरी शाखा नहर की लाइनिंग के लिए 4.99 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इससे करीब 300 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो सकेगा।
कोंडागांव में जलाशयों और एनीकट पर जोर
कोंडागांव जिले में भी सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के लिए कई योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिली है। फरसगांव विकासखंड के बड़ेडोंगर जलाशय के लिए 3.35 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 50 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
इसी विकासखंड की लंजोड़ा उद्वहन योजना के लिए 3.88 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस योजना से लगभग 295 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलने का लक्ष्य है।
माकड़ी विकासखंड में श्यामपुर व्यपवर्तन के लिए 3.45 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे 201 हेक्टेयर क्षेत्र लाभान्वित होगा। वहीं घोड़ागांव एनीकट की मरम्मत एवं गेट निर्माण के लिए 4.28 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इससे 100 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मजबूत होगी।
कोंडागांव विकासखंड के सोनाबाल जलाशय के लिए 1.95 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इसके माध्यम से 55 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की संभावना है।
बस्तर में सिंचाई के साथ बाढ़ नियंत्रण पर भी फोकस
बस्तर जिले में स्वीकृत कार्यों में सिंचाई के साथ-साथ नदी संरक्षण और बाढ़ प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी गई है। बस्तर विकासखंड के मुंजला तालाब के लिए 2.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे 30 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
बकावंड विकासखंड के ग्राम संतोषा में मारकंडी नदी पर स्टॉपडेम निर्माण के लिए 3.45 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे 70 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होगी।
जगदलपुर क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर तटरक्षण एवं बाढ़ प्रबंधन के लिए 4.04 करोड़ रुपये तथा अन्य बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए 4.15 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन कार्यों का उद्देश्य नदी के आसपास के क्षेत्रों को बाढ़ के संभावित नुकसान से बचाना और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है।
चित्रकोट में 4.90 करोड़ रुपये का ग्लासडेक ब्रिज
बस्तर जिले के प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात में कैन्टीलीवर ग्लासडेक ब्रिज के निर्माण के लिए भी 4.90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह परियोजना सिंचाई योजनाओं से अलग पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी है। ग्लासडेक ब्रिज बनने के बाद चित्रकोट जलप्रपात आने वाले पर्यटकों को एक नया आकर्षण और बेहतर व्यू-प्वाइंट उपलब्ध होने की उम्मीद है।
दंतेवाड़ा में 607 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को लाभ
दंतेवाड़ा जिले में तीन प्रमुख सिंचाई कार्यों को मंजूरी दी गई है। गीदम विकासखंड के बारसूर जलाशय के जीर्णोद्धार के लिए 4.99 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 217 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है।
इसी तरह कुम्हाररास जलाशय के लिए 4.98 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं, जिससे 320 हेक्टेयर कृषि भूमि लाभान्वित होगी। वहीं बालूद एनीकट के लिए 2.92 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 70 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
इस प्रकार दंतेवाड़ा जिले में इन तीन परियोजनाओं से ही 607 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलने की संभावना है।
सुकमा में बण्डा जलाशय का होगा उन्नयन
सुकमा जिले के कोण्टा क्षेत्र में बण्डा जलाशय के उन्नयन के लिए 1.74 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने के बाद लगभग 115 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
नक्सल प्रभावित रहे बस्तर संभाग के सुकमा जैसे जिलों में सिंचाई ढांचे का विस्तार किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी बनाने में मदद मिल सकती है।
बीजापुर और नारायणपुर में भी अधोसंरचना विकास
स्वीकृत योजनाओं में केवल सिंचाई संरचनाएं ही नहीं, बल्कि जल संसाधन विभाग से संबंधित प्रशासनिक अधोसंरचना के कार्य भी शामिल हैं। बीजापुर जिले में निरीक्षण गृह निर्माण के लिए 1.90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
वहीं नारायणपुर जिले में शासकीय एवं जल संसाधन कार्यालय के निर्माण के लिए भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे विभागीय गतिविधियों और जल संसाधन संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
राज्य सरकार की इन स्वीकृतियों का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ने की उम्मीद है। जलाशयों की मरम्मत और लाइनिंग से पानी के रिसाव को कम करने, नहरों की क्षमता बढ़ाने और उपलब्ध जल का अधिक प्रभावी उपयोग करने में मदद मिलेगी। वहीं एनीकट और स्टॉपडेम जैसी संरचनाएं वर्षा जल को रोकने तथा भूजल स्तर सुधारने में भी सहायक हो सकती हैं।
विशेषकर बस्तर संभाग के कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे जिलों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किसानों को वर्षा आधारित खेती की निर्भरता कम करने का अवसर देगा। जल संसाधन विभाग की इन परियोजनाओं से कृषि क्षेत्र में स्थायित्व आने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।
एक नजर में प्रमुख स्वीकृतियां
| जिला | प्रमुख कार्य | स्वीकृत राशि | सिंचाई लाभ |
|---|---|---|---|
| कांकेर | पी.व्ही. 114 जलाशय | ₹2.72 करोड़ | 28.4 हे. |
| कांकेर | पी.व्ही. 36 जलाशय | ₹4.96 करोड़ | 400.2 हे. |
| कांकेर | पानीडोबरी एनीकट-कम-काजवे | ₹3.41 करोड़ | 60 हे. |
| कांकेर | गोलकुम्हड़ा जलाशय | ₹4.50 करोड़ | 110 हे. |
| कांकेर | कन्हारपुरी शाखा नहर लाइनिंग | ₹4.99 करोड़ | 300 हे. |
| कोंडागांव | बड़ेडोंगर जलाशय | ₹3.35 करोड़ | 50 हे. |
| कोंडागांव | लंजोड़ा उद्वहन योजना | ₹3.88 करोड़ | 295 हे. |
| कोंडागांव | श्यामपुर व्यपवर्तन | ₹3.45 करोड़ | 201 हे. |
| कोंडागांव | घोड़ागांव एनीकट | ₹4.28 करोड़ | 100 हे. |
| कोंडागांव | सोनाबाल जलाशय | ₹1.95 करोड़ | 55 हे. |
| बस्तर | मुंजला तालाब | ₹2.47 करोड़ | 30 हे. |
| बस्तर | मारकंडी नदी स्टॉपडेम | ₹3.45 करोड़ | 70 हे. |
| दंतेवाड़ा | बारसूर जलाशय | ₹4.99 करोड़ | 217 हे. |
| दंतेवाड़ा | कुम्हाररास जलाशय | ₹4.98 करोड़ | 320 हे. |
| दंतेवाड़ा | बालूद एनीकट | ₹2.92 करोड़ | 70 हे. |
| सुकमा | बण्डा जलाशय उन्नयन | ₹1.74 करोड़ | 115 हे. |
कुल मिलाकर, 76.93 करोड़ रुपये की यह स्वीकृति छत्तीसगढ़ में सिंचाई और जल संसाधन अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जलाशयों के जीर्णोद्धार से लेकर नहर लाइनिंग, एनीकट निर्माण और बाढ़ नियंत्रण तक विभिन्न स्तरों पर होने वाले ये कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Author: cg24x7




