मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। छत्तीसगढ़ के उत्तरी वनांचल क्षेत्रों में हाथियों की बढ़ती चहलकदमी ने एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों के करीब पहुंच रहे हाथियों के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। इसी बीच मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के बिहारपुर परिक्षेत्र स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल अमृतधारा के पास 12 हाथियों का दल पहुंच गया। हाथियों के गांव के करीब पहुंचने की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और वन विभाग ने तत्काल एहतियाती कदम उठाते हुए प्रभावित गांव को खाली कराया। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाते हुए रातभर के लिए फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में शिफ्ट किया गया। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
गांव के करीब पहुंचा हाथियों का झुंड, बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
अमृतधारा के आसपास हाथियों के झुंड की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल निर्मित हो गया। 12 हाथियों के एक साथ इलाके में पहुंचने के बाद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया। लोगों को हाथियों के संभावित मूवमेंट वाले क्षेत्रों से दूर रहने की हिदायत दी गई। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों को गांव से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना उचित समझा। इसके बाद ग्रामीणों को फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में ठहराया गया, जहां उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की गई।
उत्तरी वनांचल में लगातार बढ़ रही हाथियों की सक्रियता
छत्तीसगढ़ के उत्तरी वन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष लंबे समय से गंभीर चुनौती बना हुआ है। जंगलों से निकलकर हाथियों के दल का गांवों और खेतों की ओर पहुंचना ग्रामीणों के लिए खतरे का कारण बनता है। खासतौर पर दल से बिछड़े हाथी कई बार अधिक आक्रामक व्यवहार करते हैं, जिससे जनहानि की आशंका बढ़ जाती है। इलाके में पहले भी हाथियों की चहलकदमी के दौरान दहशत की स्थिति बन चुकी है। हाथियों के हमले और उनके रास्ते में आने वाले लोगों के साथ अप्रिय घटनाओं में कई ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में 12 हाथियों के दल के आबादी क्षेत्र के नजदीक पहुंचने के बाद वन विभाग और प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती है।
वन विभाग अलर्ट मोड पर, हाथियों की गतिविधियों पर नजर
हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही हैं। हाथियों की दिशा और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, ताकि वे आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश न करें और ग्रामीणों को सुरक्षित रखा जा सके। वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को जंगल या हाथियों की मौजूदगी वाले इलाकों में अकेले नहीं जाने और हाथियों के नजदीक जाकर उन्हें देखने या खदेड़ने का प्रयास नहीं करने की सलाह दी जाती रही है। प्रशासन का प्रयास है कि हाथियों और ग्रामीणों के बीच किसी तरह का टकराव न हो।
एहतियात के तौर पर पूरी रात गांव से बाहर रहे ग्रामीण
हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरे गांव को खाली कराया। ग्रामीणों को रात के समय गांव में रहने के बजाय फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में सुरक्षित रखा गया। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रात के समय हाथियों की गतिविधियों का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होता है और अंधेरे में मानव-हाथी आमना-सामना होने की संभावना बढ़ जाती है।
मानव-हाथी संघर्ष रोकना बड़ी चुनौती
उत्तरी छत्तीसगढ़ में हाथियों की बढ़ती आवाजाही वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती को सामने लाती है। जंगल हाथियों का प्राकृतिक आवास है, लेकिन भोजन और पानी की तलाश में उनके आबादी क्षेत्रों की ओर बढ़ने से संघर्ष की स्थिति बनती है। अमृतधारा के पास 12 हाथियों के पहुंचने की घटना ने एक बार फिर इस संवेदनशील क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए सतत निगरानी, समय पर चेतावनी और ग्रामीणों की सुरक्षित निकासी की जरूरत को रेखांकित किया है। फिलहाल प्रशासन और वन विभाग की प्राथमिकता ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हाथियों के दल को बिना किसी टकराव के आबादी क्षेत्र से दूर रखना है।
Author: cg24x7



