बिलासपुर। पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पत्नी और उसकी बहनों को फोन पर लगातार अभद्र गालियां देना तथा उन्हें परेशान करना गंभीर मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस आधार पर फैमिली कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें पत्नी को तलाक की राहत नहीं मिली थी। अदालत ने दिसंबर 2021 में हुई शादी को तलाक की डिक्री के जरिए समाप्त कर दिया।
लगातार फोन कर अभद्र व्यवहार का आरोप
मामले में पत्नी की ओर से आरोप लगाया गया था कि पति उसके साथ लगातार परेशान करने वाला व्यवहार करता था। वह न केवल पत्नी को फोन पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए गालियां देता था, बल्कि उसकी बहनों को भी फोन कर कथित तौर पर अपशब्द कहता और परेशान करता था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों में पति के इस तरह के आचरण के प्रभाव को महत्वपूर्ण माना। अदालत के समक्ष यह सवाल था कि क्या इस प्रकार का लगातार अपमानजनक व्यवहार मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।
फैमिली कोर्ट के फैसले में हाईकोर्ट ने किया हस्तक्षेप
मामला पहले फैमिली कोर्ट के समक्ष पहुंचा था। वहां पत्नी को तलाक की अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके बाद पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले के रिकॉर्ड और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखने से इनकार कर दिया। अदालत ने पति के व्यवहार को वैवाहिक जीवन के लिए गंभीर मानसिक क्रूरता माना और पत्नी को तलाक की डिक्री प्रदान की।
मानसिक क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं
इस फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने मानसिक क्रूरता के आकलन में केवल शारीरिक हिंसा को आधार नहीं माना। वैवाहिक संबंध में लगातार अपमानित करना, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना और जीवनसाथी के परिवार के सदस्यों को भी निशाना बनाकर परेशान करना भी परिस्थितियों के आधार पर मानसिक क्रूरता का आधार बन सकता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में भी मानसिक क्रूरता के संबंध में यह सिद्धांत सामने आया है कि इसका निर्धारण किसी एक स्थिर फार्मूले से नहीं किया जा सकता, बल्कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को समग्र रूप से देखा जाता है।
दिसंबर 2021 में हुई थी शादी
मामले में संबंधित दंपती का विवाह दिसंबर 2021 में हुआ था। वैवाहिक विवाद बढ़ने के बाद मामला फैमिली कोर्ट तक पहुंचा और बाद में हाईकोर्ट में अपील की गई। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब दोनों के बीच वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से समाप्त हो गया है।
पत्नी को मिली कानूनी राहत
हाईकोर्ट के फैसले से पत्नी को वह राहत मिली जिसके लिए उसने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पति का पत्नी और उसकी बहनों के साथ फोन पर लगातार अभद्र एवं परेशान करने वाला व्यवहार वैवाहिक जीवन पर गंभीर मानसिक प्रभाव डालने वाला आचरण है। यह फैसला वैवाहिक विवादों में मानसिक क्रूरता की कानूनी अवधारणा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रत्येक वैवाहिक विवाद में मानसिक क्रूरता का निर्धारण संबंधित मामले के विशिष्ट तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाता है।
Author: cg24x7



