बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म की कथित घटना के बाद गर्भवती हुई एक नाबालिग पीड़िता के गर्भसमापन की मांग स्वीकार कर ली है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने पीड़िता के हित और उसकी चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया कराने के निर्देश दिए हैं।
धमतरी के सीएमएचओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश
हाई कोर्ट ने धमतरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को निर्देश दिया है कि नाबालिग पीड़िता को तत्काल रायपुर के सरकारी चिकित्सा अस्पताल में भर्ती कराया जाए। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम की निगरानी में कानून के प्रावधानों के अनुसार गर्भसमापन की प्रक्रिया पूरी की जाए।
अदालत ने चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान पीड़िता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए हैं। गर्भसमापन विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी और आवश्यक चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा।
चिकित्सकीय जांच के बाद लिया गया फैसला
मामले में अदालत के समक्ष पीड़िता की गर्भावस्था और उससे जुड़े चिकित्सकीय पहलुओं को रखा गया था। सुनवाई के दौरान उपलब्ध चिकित्सा रिपोर्ट तथा मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने गर्भसमापन की अनुमति प्रदान की।
अदालत के निर्देश के मुताबिक, पीड़िता को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की होगी। प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उसकी स्थिति की निगरानी करेगी।
नाबालिग की पहचान गोपनीय रखना जरूरी
दुष्कर्म और यौन अपराधों से जुड़े मामलों में कानून के तहत पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है। इसलिए इस मामले में भी नाबालिग पीड़िता की पहचान से संबंधित कोई व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब स्वास्थ्य विभाग और संबंधित चिकित्सा संस्थान को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। मामले में गर्भसमापन की प्रक्रिया कानून और चिकित्सकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी की जाएगी।
Author: cg24x7


