वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ : राष्ट्र गौरव और जनभागीदारी का वर्षभर चलने वाला उत्सव का शुभारंभ

महासमुंद। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पूरे देश के लिए गर्व और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय अवसर है। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर पहले चरण में आज कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। यह राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रातः 10 से 11 बजे तक सीधा प्रसारण किया गया। प्रधानमंत्री के उद्बोधन के पश्चात पूरे देश में एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया

विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि, वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ एक स्मरणीय अवसर के साथ राष्ट्र की एकता, आत्मगौरव और मातृभूमि के प्रति समर्पण का जीवंत संदेश है। यह आयोजन नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए उनमें देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय चेतना की भावना को और गहराई देगा। वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है, जिसकी गूंज हर नागरिक के हृदय में नई ऊर्जा और गर्व का संचार करेगी।

वंदे मातरम् का पहली बार बंगदर्शन में 7 नवंबर 1875 को प्रकाशन हुआ थाछत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि, भारत गीत की रचना के आज 7 नवंबर को 150 साल हो गए। वंदे मातरम् जो कभी देश की आजादी के आंदोलनकारियों का अमर वाक्य रहा, आज भी ये मातृभूमि के लिए हमारे अटूट प्रेम की ये निशानी है। वंदे मातरम् का पहली बार बंगदर्शन में 7 नवंबर 1875 को प्रकाशन हुआ था। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में इसे आनंदमठ में प्रकाशित किया। एक कविता से राष्ट्रीय गीत बनने की वंदे मातरम् की यात्रा कभी न भूलने वाली है।

बंकिम चंद्र चटर्जी 19वीं सदी के बंगाल की सबसे मशहूर साहित्यकार थे
जिला स्काउट एवं गाइड के अध्यक्ष येतराम साहू ने कहा कि, वंदे मातरम् के रचनाकार बंकिम चंद्र चटर्जी 19वीं सदी के बंगाल की सबसे मशहूर साहित्यकार थे। उपन्यास, कविता और निबंधों के जरिये बंगाली साहित्य के साथ उन्होंने राष्ट्रवाद की ऐसी अलख जगाई जो धीरे-धीरे सूरज की रोशनी की तरह फैलती गई। आनंदमठ, कपालकुंडला दुर्गेश नंदिनी और देवी चौधरानी भी उनकी रचना है, इसमें गुलामी के दौर की सामाजिक जकड़न को इलमें दिखाया गया हैं। कलकत्ता में अक्टूबर 1905 में देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए वंदे मातरम संगठन की स्थापना की गई। समुदाय के सदस्य हर रविवार वंदे मातरम् गाते हुए प्रभात फेरी निकालते थे।

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Author: cg24x7

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