दुर्ग। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की आरक्षक (जीडी) भर्ती-2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। दस्तावेज सत्यापन के दौरान जाति प्रमाणपत्र और स्थायी निवास प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर सीआईएसएफ ने चयनित आरक्षक की सेवा तत्काल समाप्त कर दी। इसके साथ ही आरोपी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई के लिए मामला मध्यप्रदेश के भोपाल भेज दिया गया है।
यह मामला सीआईएसएफ आरटीसी (रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर) भिलाई-उतई में प्रशिक्षण के दौरान सामने आया, जहां दस्तावेजों के सत्यापन में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे हासिल की थी सरकारी नौकरी
जानकारी के अनुसार, आरोपी मोहित (27 वर्ष) ने कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित आरक्षक (जीडी) भर्ती-2025 के तहत भोपाल स्थित भर्ती केंद्र में आवेदन किया था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान उसने जाति प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर उसका चयन हो गया।
चयन के बाद उसे बुनियादी प्रशिक्षण के लिए सीआईएसएफ आरटीसी भिलाई-उतई भेजा गया। प्रशिक्षण के दौरान नियमानुसार उसके सभी दस्तावेज संबंधित विभागों से सत्यापन के लिए भेजे गए।
दस्तावेजों के सत्यापन में सामने आया फर्जीवाड़ा
सीआईएसएफ द्वारा कराए गए सत्यापन में बड़ा खुलासा हुआ। जांच के दौरान जिला बालाघाट के तहसीलदार लालबर्रा ने आरोपी का स्थायी निवास प्रमाणपत्र गलत और अमान्य बताया। वहीं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), वारासिवनी ने जाति प्रमाणपत्र को भी फर्जी घोषित कर दिया। दोनों प्रमाणपत्रों के फर्जी पाए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी ने कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग कर सरकारी नौकरी प्राप्त की थी।
सेवा तत्काल समाप्त, एफआईआर दर्ज
दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने के बाद सीआईएसएफ ने 29 जून 2026 को आरोपी मोहित की सेवा समाप्त कर दी। इसके बाद सीआईएसएफ आरटीसी भिलाई के उप महानिरीक्षक ने पुलिस को पत्र भेजकर आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और वैधानिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 336(3) और 340(2) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
भोपाल भेजा गया 
मामला
पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज भर्ती प्रक्रिया के दौरान सीआईएसएफ भर्ती केंद्र, भोपाल में जमा किए थे। चूंकि कथित अपराध का मुख्य हिस्सा वहीं हुआ था, इसलिए संबंधित दस्तावेज और प्रकरण को आगे की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई के लिए गोविंदपुरा थाना, भोपाल (मध्यप्रदेश) भेज दिया गया है।
अब आगे की जांच मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा की जाएगी, जिसमें यह भी पता लगाया जाएगा कि फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए गए और इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की भूमिका तो नहीं है।
फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले नेटवर्क की भी होगी जांच
प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस का मानना है कि मामले में केवल एक व्यक्ति की भूमिका तक जांच सीमित नहीं रहेगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि आरोपी ने फर्जी जाति और निवास प्रमाणपत्र किसके माध्यम से तैयार कराए और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन की अहम भूमिका
यह मामला एक बार फिर सरकारी भर्तियों में दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया की महत्ता को रेखांकित करता है। प्रशिक्षण के दौरान किए गए विस्तृत सत्यापन के कारण फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का प्रयास समय रहते पकड़ में आ गया। अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी के दस्तावेजों का संबंधित राजस्व एवं सक्षम अधिकारियों से अनिवार्य सत्यापन कराया जाता है।
Author: cg24x7




