जुलाई में जीएसटी संग्रह 13.9% बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, पहली तिमाही में 6.31 लाख करोड़ के पार; कर संग्रह में मजबूत बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था को मिला बल

नई दिल्ली। देश की आर्थिक गतिविधियों में निरंतर मजबूती का संकेत देते हुए जुलाई महीने में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 13.9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 1,94,812 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संग्रह 1,71,105 करोड़ रुपये था।

विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी संग्रह में लगातार हो रही वृद्धि देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, बेहतर कर अनुपालन, डिजिटल कर प्रणाली की मजबूती तथा कर प्रशासन में सुधार का संकेत है।

जीएसटी के विभिन्न घटकों से मिला मजबूत राजस्व

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई के कुल सकल जीएसटी संग्रह में विभिन्न कर मदों का योगदान इस प्रकार रहा—

  • केंद्रीय जीएसटी (CGST) : 37,376 करोड़ रुपये
  • राज्य जीएसटी (SGST) : 45,116 करोड़ रुपये
  • एकीकृत जीएसटी (IGST) : 1,12,320 करोड़ रुपये

आईजीएसटी के इस आंकड़े में आयातित वस्तुओं एवं सेवाओं पर प्राप्त 60,038 करोड़ रुपये का कर भी शामिल है। इससे स्पष्ट होता है कि घरेलू व्यापार के साथ-साथ आयात गतिविधियों से भी सरकार को अच्छा राजस्व प्राप्त हुआ है।

जीएसटी रिफंड में भी करीब 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी

सरकार ने व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने और निर्यातकों सहित विभिन्न करदाताओं को समय पर राहत देने के उद्देश्य से जीएसटी रिफंड में भी तेजी दिखाई है।

आंकड़ों के अनुसार जुलाई में 32,436 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड जारी किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह राशि 25,121 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार रिफंड में 29.1 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार समय पर रिफंड मिलने से उद्योगों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कारोबार को गति मिलती है।

शुद्ध जीएसटी संग्रह भी 11.2 प्रतिशत बढ़ा

रिफंड जारी करने के बाद सरकार का शुद्ध जीएसटी संग्रह 1,62,377 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष समान अवधि में यह 1,45,984 करोड़ रुपये था।

इस प्रकार शुद्ध कर संग्रह में भी 11.2 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो कर संग्रह प्रणाली की मजबूती और बेहतर अनुपालन का संकेत मानी जा रही है।

पहली तिमाही में 6.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सकल संग्रह

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में भी जीएसटी संग्रह मजबूत बना रहा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में सकल जीएसटी संग्रह 6,31,699 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 5,82,542 करोड़ रुपये था। इस प्रकार पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इसी अवधि में सरकार ने 91,482 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड जारी किया। रिफंड के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह 5,40,218 करोड़ रुपये रहा।

कर संग्रह में महाराष्ट्र सबसे आगे

राज्यों के प्रदर्शन की बात करें तो जून माह के जीएसटी संग्रह में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा।

शीर्ष पांच राज्यों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा—

  • महाराष्ट्र – 9,924 करोड़ रुपये
  • गुजरात – 4,333 करोड़ रुपये
  • कर्नाटक – 4,118 करोड़ रुपये
  • तमिलनाडु – 3,639 करोड़ रुपये
  • उत्तर प्रदेश – 3,249 करोड़ रुपये

इन राज्यों का मजबूत औद्योगिक एवं व्यापारिक आधार देश के कुल जीएसटी संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

जीएसटी ने बदली देश की कर व्यवस्था

उल्लेखनीय है कि 1 जुलाई 2017 को पूरे देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था लागू की गई थी। इसे स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े कर सुधारों में से एक माना जाता है।

जीएसटी लागू होने से पहले विभिन्न राज्यों और केंद्र स्तर पर वैट (VAT), सेल्स टैक्स, एंट्री टैक्स, एक्साइज ड्यूटी सहित कई प्रकार के अप्रत्यक्ष कर लागू थे। जीएसटी व्यवस्था ने इन विभिन्न करों को एकीकृत कर पूरे देश में ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की अवधारणा को लागू किया।

इस नई व्यवस्था से राज्यों के बीच कर संबंधी बाधाएं कम हुईं, कर प्रणाली अधिक पारदर्शी बनी और कारोबार करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हुई। साथ ही डिजिटल रिटर्न, ई-वे बिल और ऑनलाइन कर भुगतान जैसी व्यवस्थाओं ने कर प्रशासन को भी अधिक प्रभावी बनाया।

अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता जीएसटी संग्रह यह दर्शाता है कि देश में उपभोग, विनिर्माण और व्यापारिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। इसके साथ ही करदाताओं की संख्या में वृद्धि, बेहतर अनुपालन और डिजिटल कर प्रणाली के विस्तार से सरकार के राजस्व में लगातार सुधार हो रहा है।

आने वाले महीनों में त्योहारी सीजन, बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और उपभोग में संभावित वृद्धि के कारण जीएसटी संग्रह में और मजबूती आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों को विकास परियोजनाओं तथा सार्वजनिक कल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे।

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Author: cg24x7

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