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महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन के साझा प्रयास से राज्यभर में चल रहा विशेष अभियान -
बलरामपुर के स्कूलों से हुई शुरुआत, बच्चों को सिखाए जा रहे ‘गुड टच-बैड टच’ के नियम
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शोषण या असुरक्षा होने पर बिना डरे ‘चाइल्ड हेल्पलाइन 1098’ पर कॉल करने की अपील
रायपुर, 16 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में बच्चों के सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त बचपन के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने एक बड़ा जागरूकता अभियान छेड़ दिया है। प्रदेश के नौनिहालों को सुरक्षित माहौल देने और उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन के समन्वय से सभी जिलों में बाल संरक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम तेजी से आयोजित किए जा रहे हैं।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों और किशोर-किशोरियों को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा विपरीत परिस्थितियों से निपटने के तरीकों के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे एक आत्मविश्वास से भरे नागरिक बन सकें।
स्कूलों में पहुंच रहे विशेषज्ञ: बलरामपुर में विशेष पहल
इस राष्ट्रव्यापी और संवेदनशील अभियान के तहत बलरामपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लोधा एवं शासकीय उच्चतर कन्या विद्यालय कछिया में विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में छात्र-छात्राओं को खेल-खेल में और बेहद सरल भाषा में गंभीर विषयों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:
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पॉक्सो (POCSO) अधिनियम: बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करने वाले कड़े कानून की जानकारी दी गई।
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गुड टच-बैड टच: बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच का अंतर समझाया गया, ताकि वे किसी भी गलत हरकत को तुरंत भांप सकें।
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चाइल्ड हेल्पलाइन 1098: संकट के समय 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली आपातकालीन सेवा ‘1098’ के उपयोग के बारे में बताया गया।
“डरें नहीं, खुलकर बात करें”: विशेषज्ञों की बच्चों से अपील
जागरूकता शिविर में पहुंचे बाल संरक्षण विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा:
“सुरक्षित बचपन हर बच्चे का बुनियादी अधिकार है। यदि आपको कभी भी, कहीं भी किसी असहज, अनुचित या शोषण की स्थिति का सामना करना पड़े, तो बिना किसी डर या संकोच के तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षकों या फिर सीधे चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचित करें। आपका एक सजग कदम आपको और आपके साथियों को सुरक्षित रख सकता है।”
इसके साथ ही बच्चों को आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने, खुद पर भरोसा करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की समय पर शिकायत करने के लिए प्रेरित किया गया।
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जंग और जीवन कौशल की सीख
यह अभियान सिर्फ कानूनी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़ा हुआ है। शिविरों के माध्यम से बच्चों को समाज में फैली विभिन्न बुराइयों के प्रति सचेत किया गया:
| जागरूकता के मुख्य विषय | बच्चों को दी गई महत्वपूर्ण सीख व जानकारी |
| नशामुक्ति | नशे के चंगुल से दूर रहने और इसके शारीरिक-मानसिक दुष्परिणामों की जानकारी। |
| बाल विवाह और बाल श्रम | इन सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ बने सख्त कानूनों और इनके सामाजिक प्रभावों पर चर्चा। |
| बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ | बालिकाओं की शिक्षा और समाज में उनकी समान सहभागिता को बढ़ावा देना। |
| स्वास्थ्य और स्वच्छता | व्यक्तिगत स्वच्छता, किशोरावस्था के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव और बेहतर जीवन कौशल (Life Skills)। |
एक संवेदनशील और सुरक्षित वातावरण का निर्माण
छत्तीसगढ़ सरकार का अंतिम लक्ष्य राज्य के प्रत्येक बच्चे तक बाल संरक्षण से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी पहुंचाना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार, स्कूलों और समुदायों के भीतर एक ऐसा संवेदनशील ईकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जहां बच्चे खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकें।
प्रशासन का मानना है कि इस तरह के जमीनी जन-जागरूकता अभियान बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के एक सशक्त और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।
Author: cg24x7




