छत्तीसगढ़ में VSK एप से ऑनलाइन उपस्थिति से जुलाई का वेतन कटने की आशंका, नाराज शिक्षकों का 7 अगस्त को विरोध प्रदर्शन का ऐलान, ऐप की तकनीकी खामियों को लेकर शिक्षक संघ ने उठाए थे सवाल

VSK, उपस्थिति पंजी के आधार पर वेतन जारी करने की मांग; बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने का भी सुझाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) द्वारा जुलाई माह का वेतन वीएसके (VSK) ऐप में दर्ज ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर जारी किए जाने के निर्देश के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों में असंतोष और नाराजगी बढ़ गई है। शिक्षक संगठनों का दावा है कि ऐप की तकनीकी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में शिक्षकों की उपस्थिति सही तरीके से दर्ज नहीं हो सकी, जिससे जुलाई माह का पूरा वेतन मिलने पर संकट खड़ा हो गया है।

प्रदेश में लगभग 1.80 लाख शिक्षक शासकीय विद्यालयों में कार्यरत हैं। शिक्षक संघ का कहना है कि यदि ऑनलाइन उपस्थिति को ही वेतन का आधार बनाया गया, तो करीब एक लाख शिक्षकों को पूर्ण वेतन नहीं मिल पाएगा।

तकनीकी खामियों को लेकर शिक्षकों की आपत्ति

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि वीएसके ऐप वर्तमान स्वरूप में पूरी तरह तकनीकी समस्याओं से घिरा हुआ है। शिक्षकों के अनुसार कई बार ऐप समय पर खुलता नहीं है, सर्वर डाउन रहता है, लोकेशन सही नहीं दिखती और इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या के कारण निर्धारित समय पर चेक-इन और चेक-आउट दर्ज करना संभव नहीं हो पाता।

संघ का कहना है कि दूरस्थ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में इंटरनेट नेटवर्क की स्थिति पहले से ही कमजोर है। ऐसे में केवल ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन जारी करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता।

दो पालियों वाले स्कूलों में भी आ रही परेशानी

शिक्षकों ने यह भी बताया कि जिन विद्यालयों में दो पालियों में कक्षाएं संचालित होती हैं, वहां भी ऐप वास्तविक कार्य अवधि के अनुरूप उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहा है। कई शिक्षकों की पूरे दिन की उपस्थिति आंशिक या अनुपस्थित के रूप में दिखाई दे रही है, जबकि वे नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहे।

83 प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति के दावे पर सवाल

शिक्षा विभाग का दावा है कि लगभग 83 प्रतिशत शिक्षक वीएसके ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। हालांकि शिक्षक संघ का कहना है कि ऐप डाउनलोड करना और कभी-कभार उपस्थिति दर्ज करना अलग बात है, जबकि पूरे महीने प्रत्येक कार्य दिवस में निर्धारित समय पर सफलतापूर्वक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होना तकनीकी परिस्थितियों के कारण संभव नहीं हो पा रहा है।

संघ का कहना है कि विभाग का आंकड़ा ऐप के उपयोग को दर्शा सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि सभी शिक्षकों की पूरे माह की उपस्थिति तकनीकी रूप से सही दर्ज हुई है।

7 अगस्त को होगा विरोध प्रदर्शन

वेतन कटौती की आशंका को लेकर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने आंदोलन की घोषणा कर दी है। संगठन ने निर्णय लिया है कि जिन जिलों और विकासखंडों में शिक्षकों के वेतन में कटौती की जाएगी, वहां 7 अगस्त को विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय तक विरोध प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।

संघ का कहना है कि यदि सरकार ने आदेश में संशोधन नहीं किया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

डीपीआई से आदेश में संशोधन की मांग

शिक्षक संगठन ने लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र लिखकर मांग की है कि जुलाई माह के वेतन के लिए केवल वीएसके ऐप पर निर्भर रहने के बजाय विद्यालयों में संधारित उपस्थिति पंजी (Attendance Register) को भी मान्य आधार बनाया जाए।

संघ का कहना है कि प्रत्येक विद्यालय में प्राचार्य और प्रधान पाठक नियमित रूप से उपस्थिति पंजी का संधारण करते हैं। यदि किसी शिक्षक की ऐप में तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी है, तो उस स्थिति में विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर को प्रमाण के रूप में स्वीकार कर वेतन जारी किया जाना चाहिए।

बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने का सुझाव

शिक्षक संघ ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि यदि उपस्थिति की डिजिटल निगरानी करनी ही है, तो मोबाइल ऐप के स्थान पर बायोमेट्रिक मशीन अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी विकल्प हो सकती है।

संघ का कहना है कि बायोमेट्रिक प्रणाली में नेटवर्क और लोकेशन संबंधी समस्याएं अपेक्षाकृत कम रहती हैं तथा इससे उपस्थिति को लेकर विवाद भी कम होंगे।

प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि शिक्षकों ने शासन के निर्देशानुसार अपने मोबाइल में वीएसके ऐप डाउनलोड किया है और उसका उपयोग भी किया है। लेकिन ऐप की तकनीकी सीमाओं के कारण जुलाई माह की उपस्थिति कई शिक्षकों की पूर्ण रूप से दर्ज नहीं हो सकी।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यालयों में इंटरनेट कनेक्टिविटी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे क्षेत्रों में वर्षों से प्रचलित विद्यालय उपस्थिति पंजी ही सबसे विश्वसनीय व्यवस्था रही है।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें

शिक्षक संगठन ने सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • जुलाई माह का वेतन विद्यालय के उपस्थिति पंजी के आधार पर जारी किया जाए।
  • वीएसके ऐप की तकनीकी कमियों को दूर किए बिना उसे वेतन निर्धारण का एकमात्र आधार न बनाया जाए।
  • ऐप को पूरी तरह स्थिर और सक्षम बनाने के बाद ही इसे अनिवार्य किया जाए।
  • भविष्य में डिजिटल उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने पर विचार किया जाए।
  • तकनीकी कारणों से प्रभावित शिक्षकों के वेतन में किसी प्रकार की कटौती न की जाए।

शासन के निर्णय पर टिकी निगाहें

ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को लेकर बढ़ते विवाद के बीच अब सभी की नजरें लोक शिक्षण संचालनालय और राज्य सरकार के अगले निर्णय पर हैं। यदि विभाग शिक्षक संगठनों की मांगों पर विचार करते हुए उपस्थिति पंजी को भी मान्यता देता है, तो संभावित वेतन कटौती का विवाद टल सकता है। वहीं यदि मौजूदा आदेश में कोई संशोधन नहीं किया गया, तो अगस्त के पहले सप्ताह में प्रदेशभर में शिक्षकों का आंदोलन तेज होने की संभावना है।

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Author: cg24x7

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