रायपुर निगम में बवाल: ‘मेयर मैडम कुछ करो… हद हो गई’, पार्टी नेता के बेटे पर मारपीट और धमकी का केस, काम छोड़कर मुख्यालय पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी

रायपुर। रायपुर नगर निगम के जोन-4 में गुरुवार को उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब भाजपा नेता एवं जोन-4 अध्यक्ष मुरली शर्मा के पुत्र अनिल शर्मा पर जोन आयुक्त के चालक के साथ मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप लगे। घटना के बाद जोन कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी कामकाज छोड़कर सीधे नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और महापौर मीनल चौबे से शिकायत करते हुए कहा, “मेयर मैडम कुछ करो… अब हद हो गई।”

मामला यहीं नहीं रुका। महापौर से मुलाकात के बाद अधिकारी और कर्मचारी नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के पास पहुंचे। उनके निर्देश पर अपर आयुक्त विनोद पांडेय और उपायुक्त डॉ. अंजलि शर्मा की मौजूदगी में कोतवाली थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जोन-4 में लंबे समय से चल रहा था विवाद

नगर निगम सूत्रों के अनुसार जोन-4 अध्यक्ष मुरली शर्मा और जोन आयुक्त डॉ. दिव्या चंद्रवंशी के बीच पिछले काफी समय से प्रशासनिक मामलों को लेकर खींचतान चल रही थी। अधिकारियों और कर्मचारियों का आरोप है कि अध्यक्ष के पुत्र अनिल शर्मा लगातार विभागीय कार्यों में हस्तक्षेप करते रहे हैं।

शिकायत के मुताबिक राजस्व वसूली, टेंडर प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में दबाव बनाया जाता था। कर्मचारी कई बार इस स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा चुके थे, लेकिन गुरुवार की घटना के बाद मामला खुलकर सामने आ गया।

ड्राइवर से मारपीट, बीच-बचाव करने पहुंचीं जोन आयुक्त से भी दुर्व्यवहार का आरोप

अधिकारियों के अनुसार गुरुवार को अनिल शर्मा जोन कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने जोन अध्यक्ष के कक्ष में सहायक राजस्व निरीक्षक और जोन आयुक्त के चालक योगेंद्र साहू के साथ कथित रूप से गाली-गलौज की। आरोप है कि चालक के साथ मारपीट की गई और उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई।

जब जोन आयुक्त डॉ. दिव्या चंद्रवंशी ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया तो उनके साथ भी कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। इस घटना के बाद जोन कार्यालय का माहौल तनावपूर्ण हो गया और अधिकारी-कर्मचारियों में भारी नाराजगी फैल गई।

काम बंद कर महापौर के पास पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी

घटना से आक्रोशित अधिकारी और कर्मचारी शाम करीब साढ़े चार बजे नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने महापौर मीनल चौबे से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी दी और सुरक्षा तथा निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

कर्मचारियों ने महापौर से कहा कि लगातार हस्तक्षेप और अभद्र व्यवहार के कारण काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेयर मैडम कुछ करो… अब हद हो गई है।”

बताया जाता है कि महापौर ने मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास करते हुए कहा कि वह संबंधित पक्षों से बात करेंगी और विवाद को ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए। हालांकि अधिकारी और कर्मचारी तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।

आयुक्त के निर्देश पर दर्ज हुई एफआईआर

महापौर से मुलाकात के बाद अधिकारी और कर्मचारी नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा से मिले। आयुक्त के निर्देश पर अपर आयुक्त विनोद पांडेय और उपायुक्त डॉ. अंजलि शर्मा के साथ पूरा दल कोतवाली थाना पहुंचा।

जोन आयुक्त के चालक योगेंद्र साहू की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी अनिल शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 296, 115(2) और 351(2) के तहत अपराध दर्ज किया है।

एफआईआर दर्ज कराने के दौरान जोन आयुक्त डॉ. दिव्या चंद्रवंशी, राजस्व अधिकारी अमरनाथ साहू, कार्यपालन अभियंता सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

जोन आयुक्त की सुरक्षा बढ़ाई गई

घटना के बाद प्रशासन ने जोन आयुक्त डॉ. दिव्या चंद्रवंशी की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) उपलब्ध कराया है। अधिकारियों का मानना है कि विवाद को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक थी।

दूसरी ओर, सूत्रों के अनुसार अनिल शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद जोन अध्यक्ष मुरली शर्मा ने एमआईसी सदस्यों और भाजपा पार्षदों के साथ बैठक की। बैठक में जोन आयुक्त को हटाने के लिए रणनीति बनाए जाने की चर्चा भी सामने आई है।

पहले भी पार्षद पुत्रों पर दर्ज हो चुका है मामला

नगर निगम से जुड़े विवादों में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जल कार्य विभाग के अधिकारियों ने भाजपा पार्षद खगपति के दो पुत्रों के खिलाफ खमतराई थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।

आरोप था कि उन्होंने डीआरएम कार्यालय के सामने मुख्य पाइप लाइन को क्षतिग्रस्त कर अवैध जल कनेक्शन दिया था। जब निगम की टीम अवैध कनेक्शन हटाने पहुंची तो अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और विरोध किया गया था।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

नगर निगम में भाजपा का बहुमत होने और अधिकांश जोनों में भाजपा पार्षदों के अध्यक्ष होने के कारण यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर अधिकारी-कर्मचारी प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक स्तर पर भी इस घटनाक्रम के बाद बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और नगर निगम प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला केवल मारपीट तक सीमित न रहकर सरकारी कार्य में बाधा और प्रशासनिक हस्तक्षेप जैसे गंभीर मुद्दों के कारण और अधिक तूल पकड़ सकता है।

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Author: cg24x7

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