मोहम्मद सलमान की याचिका खारिज, चंदन यादव का निर्वाचन वैध घोषित; आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए वैध प्रमाण पत्र अनिवार्य बताया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भिलाई नगर निगम के वार्ड-35 (शारदा पारा) से जुड़े बहुचर्चित पार्षद विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पूर्व पार्षद मोहम्मद सलमान की याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने डिविजनल कमिश्नर द्वारा पार्षद पद से हटाने के आदेश और राज्य सरकार के अपीलीय आदेश को पूरी तरह वैध ठहराते हुए स्पष्ट किया कि जिस सामाजिक स्थिति प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने ओबीसी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा था, वह संबंधित सक्षम अधिकारी के कार्यालय से जारी ही नहीं हुआ था।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने वार्ड-35 से निर्विरोध निर्वाचित चंदन यादव के निर्वाचन को भी वैध और कानून सम्मत घोषित कर दिया। न्यायालय का यह फैसला आरक्षित वर्ग की सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए वैध सामाजिक स्थिति प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सक्षम अधिकारी ने प्रमाण पत्र को बताया फर्जी
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि जब प्रमाण पत्र जारी करने वाले सक्षम अधिकारी ने स्पष्ट रूप से यह बता दिया कि संबंधित सामाजिक स्थिति प्रमाण पत्र उसके कार्यालय से जारी नहीं हुआ है और उसमें दर्ज राजस्व प्रकरण क्रमांक किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है, तब यह केवल जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन का मामला नहीं रह जाता।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मामले को हाई पावर कास्ट स्क्रूटिनी कमेटी के पास भेजना आवश्यक नहीं है, क्योंकि यहां विवाद प्रमाण पत्र की वैधता नहीं बल्कि उसके अस्तित्व और प्रामाणिकता का था।
डिविजनल कमिश्नर की कार्रवाई को बताया वैधानिक
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 19(1)(a-1) के तहत डिविजनल कमिश्नर को यह अधिकार प्राप्त है कि वह यह जांच करे कि आरक्षित सीट से निर्वाचित पार्षद आवश्यक पात्रता रखता है या नहीं।
न्यायालय ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर डिविजनल कमिश्नर द्वारा मोहम्मद सलमान को पार्षद पद से हटाने की कार्रवाई पूरी तरह कानून के अनुरूप थी।
2021 के नगर निगम चुनाव से शुरू हुआ था विवाद
पूरा मामला वर्ष 2021 में हुए भिलाई नगर निगम चुनाव से जुड़ा है। वार्ड-35 (शारदा पारा) ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित था। मोहम्मद सलमान ने स्वयं को कुंजड़ा जाति का बताते हुए सामाजिक स्थिति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया और चुनाव जीतकर पार्षद बने।
बाद में चंदन यादव सहित अन्य लोगों ने उनके सामाजिक स्थिति प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद प्रशासनिक जांच शुरू हुई।
एसडीओ की जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
एसडीओ (राजस्व) द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि सलमान द्वारा प्रस्तुत सामाजिक स्थिति प्रमाण पत्र कार्यालय के रिकॉर्ड में उनके नाम से दर्ज ही नहीं था। जांच में यह भी पाया गया कि उसी राजस्व प्रकरण क्रमांक की प्रविष्टि किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज थी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर 6 मई 2024 को डिविजनल कमिश्नर ने मोहम्मद सलमान को पार्षद पद से हटा दिया। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार के समक्ष अपील की, लेकिन 4 सितंबर 2024 को राज्य सरकार ने भी उनकी अपील खारिज करते हुए कमिश्नर के आदेश को बरकरार रखा।
उपचुनाव में निर्विरोध चुने गए चंदन यादव
मोहम्मद सलमान की सदस्यता समाप्त होने के बाद वार्ड-35 की सीट रिक्त घोषित की गई। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने 20 जनवरी 2025 को उपचुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ की।
इस चुनाव में चंदन यादव निर्विरोध निर्वाचित हुए और 31 जनवरी 2025 को उन्हें निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। हालांकि, हाईकोर्ट में मामला लंबित होने और अंतरिम आदेश के कारण उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई थी।
चुनाव प्रक्रिया को नहीं रोका जा सकता था
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पहले से जारी अंतरिम आदेश उस चुनाव प्रक्रिया पर लागू नहीं होता था, जो पहले ही शुरू हो चुकी थी। न्यायालय ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया विधि के अनुरूप पूरी की गई थी और उसे बीच में रोकना उचित नहीं होता।
इस आधार पर कोर्ट ने चंदन यादव के निर्वाचन को पूर्णतः वैध घोषित कर दिया।
दोनों याचिकाओं पर सुनाया अंतिम फैसला
न्यायालय ने मोहम्मद सलमान द्वारा दायर WPC क्रमांक 5555/2024 को खारिज करते हुए उन्हें पार्षद पद से हटाने की कार्रवाई को सही ठहराया।
वहीं चंदन यादव की WPC क्रमांक 1808/2025 स्वीकार करते हुए वार्ड-35 से उनके निर्वाचन को कानून सम्मत घोषित कर दिया।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य में आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए महत्वपूर्ण नजीर साबित होगा। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले सामाजिक स्थिति प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता सर्वोपरि है और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
Author: cg24x7



