मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के बावजूद संक्रमण पर पूरी तरह नहीं लग रहा अंकुश, बीजापुर-सुकमा-दंतेवाड़ा में सबसे ज्यादा मामले; मिक्स मलेरिया ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता
रायपुर/जगदलपुर/बिलासपुर। बारिश के मौसम के साथ छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में मलेरिया का प्रकोप एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। खासतौर पर बस्तर संभाग और बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र में सामने आ रहे मामले स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का कारण बन गए हैं। बस्तर के घने जंगलों, दूर-दराज के गांवों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में होने वाली देरी के बीच मलेरिया का संक्रमण ग्रामीण आबादी को प्रभावित कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बीते वर्षों में बड़े पैमाने पर मलेरिया की जांच किए जाने के बावजूद हजारों लोग हर साल संक्रमित मिल रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक 22 लाख 29 हजार 558 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 15 हजार 934 मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। संक्रमण दर भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है।
वहीं, बस्तर संभाग में वर्ष 2020 से अब तक मलेरिया से करीब 127 मरीजों की मौत हो चुकी है। इस वर्ष भी मौत के मामले सामने आने से मलेरिया नियंत्रण अभियान की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सात साल के आंकड़ों में हजारों मरीज, 2026 में फिर बढ़ी पॉजिटिविटी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2026 तक मलेरिया की जांच का दायरा काफी बड़ा रहा है। लाखों लोगों की जांच के बावजूद हर वर्ष बड़ी संख्या में मरीज संक्रमित पाए गए।
| वर्ष | जांच | पॉजिटिव | पॉजिटिविटी रेट |
|---|---|---|---|
| 2020 | 36,57,508 | 62,281 | 1.70% |
| 2021 | 37,44,203 | 30,409 | 0.81% |
| 2022 | 53,77,667 | 16,066 | 0.30% |
| 2023 | 33,23,873 | 14,195 | 0.43% |
| 2024 | 12,52,634 | 4,496 | 0.36% |
| 2025 | 28,31,647 | 16,544 | 0.58% |
| 2026 अब तक | 22,29,558 | 15,934 | 0.71% |
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2020 में सबसे ज्यादा 62,281 मलेरिया मरीज मिले थे। इसके बाद वर्ष 2022 में पॉजिटिविटी रेट घटकर 0.30 प्रतिशत तक पहुंची, लेकिन 2025 और 2026 में एक बार फिर संक्रमण दर में बढ़ोतरी दिखाई दे रही है।
वर्ष 2026 में अब तक 15,934 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं। जांच की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है, ऐसे में आने वाले महीनों में आंकड़ा और बढ़ने की आशंका से स्वास्थ्य विभाग की चुनौती बढ़ गई है।
बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में ज्यादा मामले
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इस वर्ष जनवरी से अब तक बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में मलेरिया के मरीज अधिक मिले हैं। बस्तर संभाग के इन इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियां बीमारी की रोकथाम को मुश्किल बनाती हैं।
घने जंगल, पहाड़ी क्षेत्र, नदी-नालों से घिरे गांव और स्वास्थ्य केंद्रों से लंबी दूरी के कारण कई ग्रामीणों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती। बारिश के मौसम में कई इलाकों में आवागमन और भी कठिन हो जाता है।
यही वजह है कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में केवल अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि गांव-गांव जाकर जांच और उपचार करना भी जरूरी हो जाता है।
मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का 14वां चरण जारी
मलेरिया के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग वर्ष 2020 से मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान चला रहा है। अभियान के तहत प्रभावित इलाकों में मलेरिया की जांच, संक्रमित मरीजों का उपचार, जागरूकता और बचाव के उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल अभियान का 14वां चरण चल रहा है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे मरीज यह संकेत दे रहे हैं कि बस्तर में मलेरिया को नियंत्रित करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों को ऐसे इलाकों में भी पहुंचना पड़ रहा है जहां सामान्य परिस्थितियों में पहुंचना कठिन है। स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीणों के बीच जाकर जांच और उपचार कर रहे हैं।
2020 से अब तक 127 मौतें, दंतेवाड़ा और बस्तर में भी बड़ी संख्या
बस्तर संभाग के सातों जिलों में वर्ष 2020 से 2026 तक मलेरिया से लगभग 127 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।
जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक—
- बस्तर: 30 मौतें
- कांकेर: 7 मौतें
- कोंडागांव: 17 मौतें
- नारायणपुर: 4 मौतें
- सुकमा: 21 मौतें
- दंतेवाड़ा: 28 मौतें
- बीजापुर: 20 मौतें
वर्षवार आंकड़ों के अनुसार 2020 में 32, 2021 में 32, 2022 में 18, 2023 में 20, 2024 में 16, 2025 में 5 और 2026 में अब तक 4 मलेरिया मरीजों की मौत हुई है।
हालांकि आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मौतों में कमी दिखाई देती है, लेकिन इस वर्ष भी मौत का मामला सामने आना स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है।
कांकेर में पांच मौतों ने बढ़ाई चिंता
कांकेर जिले में मलेरिया पॉजिटिव मरीजों की संख्या अन्य कुछ जिलों की तुलना में कम बताई जा रही है, लेकिन यहां बीमारी से पांच लोगों की मौत होने की जानकारी ने चिंता बढ़ा दी है।
खासकर बच्चों में मलेरिया संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन सतर्क है। बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
मिक्स मलेरिया ने बढ़ाई चिंता, एक मरीज में दो परजीवी
बस्तर में इस बार सबसे बड़ी चिंता मिक्स मलेरिया को लेकर सामने आ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ मरीजों में एक साथ प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (P. falciparum) और प्लाज्मोडियम विवैक्स (P. vivax) दोनों प्रकार के मलेरिया परजीवी पाए जा रहे हैं।
ऐसे संक्रमण को सामान्य मलेरिया की तुलना में अधिक गंभीर माना जाता है, क्योंकि इसमें दोनों तरह के परजीवियों से जुड़ी जटिलताओं का खतरा हो सकता है।
जनवरी 2026 से अब तक बस्तर संभाग में मलेरिया के मामलों में सैकड़ों मरीजों के मिक्स मलेरिया से संक्रमित पाए जाने की जानकारी सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के लिए यह इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि गंभीर संक्रमण की स्थिति में मरीज को तत्काल और समुचित उपचार की जरूरत होती है।
तेज बुखार से लेकर किडनी और लीवर तक असर का खतरा
डॉक्टरों के अनुसार मलेरिया में सामान्य तौर पर मरीज को तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी और खून की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मरीजों में बुखार बार-बार लौटकर भी आ सकता है।
गंभीर संक्रमण की स्थिति में बीमारी का असर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से P. falciparum गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है, जबकि P. vivax में दोबारा संक्रमण का खतरा बना रहता है।
इसलिए बस्तर जैसे संवेदनशील इलाकों में बुखार को सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल मलेरिया की जांच कराने पर जोर दिया जा रहा है।
झाड़-फूंक से बचें, बुखार होने पर सीधे स्वास्थ्य केंद्र जाएं
स्वास्थ्य विभाग बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक डॉ. महेश सांडिया ने बताया कि संभाग के सभी सात जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि बुखार आने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। मरीज को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाकर जांच और उपचार कराया जाए।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मी भी लगातार गांवों तक पहुंचकर लोगों की जांच और इलाज कर रहे हैं।
बिलासपुर के कोटा में भी मलेरिया से मौत
बस्तर के बाद अब बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड में भी मलेरिया ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कोटा क्षेत्र के औरापानी गांव की रहने वाली 37 वर्षीय आदिवासी महिला रेखा बैगा की मलेरिया से उपचार के दौरान मौत हो गई।
बताया गया कि महिला का प्रारंभिक उपचार गनियार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किया गया था। हालत गंभीर होने पर उसे बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद कोटा क्षेत्र में मलेरिया की रोकथाम और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कोटा क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे नए मरीज
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में फिलहाल मलेरिया के छह सक्रिय मरीज हैं। हालांकि कोटा विकासखंड में लगातार नए मरीज सामने आने से संक्रमण के और फैलने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान मच्छरों का प्रजनन बढ़ने से बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में प्रभावित गांवों में निगरानी, जांच और बचाव संबंधी गतिविधियों को तेज करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
महिला की मौत ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि दूरस्थ आदिवासी इलाकों में बीमारी की शुरुआती पहचान और गंभीर मरीजों को समय पर उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
बस्तर से कोटा तक चुनौती, बारिश में बढ़ी सतर्कता की जरूरत
छत्तीसगढ़ में मलेरिया का खतरा केवल बस्तर तक सीमित नहीं है। बारिश के मौसम में राज्य के वनांचल और ग्रामीण इलाकों में मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बस्तर के आंकड़े और कोटा में हुई मौत इस चुनौती की गंभीरता को सामने रखते हैं।
एक तरफ सरकार मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के जरिए लगातार जांच और उपचार का अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों नए मरीजों का सामने आना बताता है कि बीमारी के खिलाफ लड़ाई अभी लंबी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर जांच, संक्रमित मरीज को तत्काल उपचार, मच्छरों के प्रजनन पर नियंत्रण, ग्रामीणों में जागरूकता और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
बारिश के मौजूदा मौसम में स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बुखार के प्रत्येक संदिग्ध मरीज तक समय पर जांच और उपचार पहुंचे और गंभीर मलेरिया को जानलेवा स्थिति में पहुंचने से पहले ही नियंत्रित किया जा सके।
Author: cg24x7




