रायपुर/जबलपुर। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली एक बड़ी परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। प्रस्तावित जबलपुर-मंडला-चिल्फीघाटी-कवर्धा-सिमगा-रायपुर 6-लेन एक्सप्रेसवे कॉरिडोर दोनों राज्यों के बीच आवागमन के साथ-साथ व्यापार, परिवहन और पर्यटन के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सड़क उन्नयन के बाद कवर्धा और आसपास के इलाके मध्यभारत के एक महत्वपूर्ण इंटर-स्टेट कॉरिडोर के रूप में उभर सकते हैं। परियोजना पूरी होने पर जबलपुर से रायपुर की सड़क यात्रा का समय मौजूदा 7 से 8 घंटे से घटकर करीब 3.5 से 4 घंटे तक आने का अनुमान है।
इससे न केवल आम यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि दोनों राज्यों के बीच माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
दो बड़ी परियोजनाओं को मिली हरी झंडी
जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने जबलपुर-भोपाल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के साथ जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा से कवर्धा, सिमगा होते हुए रायपुर तक जाने वाले 6-लेन कॉरिडोर को भी मंजूरी दी है।
राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय के अनुसार दोनों परियोजनाओं के लिए कुल करीब 15 हजार करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।
यह परियोजना पूरी होने के बाद मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों के बीच सड़क संपर्क का स्वरूप काफी बदल सकता है। खासकर जबलपुर, मंडला, कवर्धा, बेमेतरा, सिमगा और रायपुर के बीच तेज आवागमन के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सांसद की मांग से 4-लेन से आगे बढ़ी योजना?
इस परियोजना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी है कि कुछ दिन पहले सांसद संतोष पांडेय ने दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश सीमा के धवईपानी से सिमगा तक फोरलेन सड़क निर्माण की मांग रखी थी।
बताया गया है कि इस मांग के बाद प्रस्ताव केवल फोरलेन तक सीमित नहीं रहा और पूरे कॉरिडोर को 6-लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित करने की दिशा में मंजूरी मिली है।
यदि योजना निर्धारित स्वरूप में आगे बढ़ती है तो यह सड़क मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच एक उच्च क्षमता वाले परिवहन गलियारे के रूप में विकसित हो सकती है।
जबलपुर-रायपुर का सफर 4 घंटे के भीतर!
वर्तमान में जबलपुर से रायपुर सड़क मार्ग से पहुंचने में लगभग 7 से 8 घंटे तक लग जाते हैं। प्रस्तावित 6-लेन कॉरिडोर बनने के बाद यात्रा समय घटकर करीब 3.5 से 4 घंटे रह जाने का अनुमान है।
यानी लंबी दूरी की सड़क यात्रा में करीब आधे समय की बचत हो सकती है। इससे निजी वाहन यात्रियों के साथ-साथ बस और मालवाहक वाहनों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
इसी तरह रायपुर से भोपाल की सड़क यात्रा, जिसमें फिलहाल करीब 14 से 15 घंटे तक लग सकते हैं, प्रस्तावित बेहतर कनेक्टिविटी के बाद लगभग 6 से 7 घंटे में पूरी होने का अनुमान जताया जा रहा है।
हालांकि वास्तविक यात्रा समय सड़क की डिजाइन, गति सीमा, इंटरचेंज, ट्रैफिक और परियोजना के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगा।
चिल्फी घाटी होगी सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती
इस पूरे कॉरिडोर का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा चिल्फी घाटी हो सकता है। नागमोरी घाटी के नीचे ग्राम पालक से लेकर घाट के ऊपर चिल्फी तक करीब 8 किलोमीटर का हिस्सा पहाड़ी और घुमावदार भू-भाग से गुजरता है।
मौजूदा सड़क कई हिस्सों में टू-लेन है। सामान्य मैदानी क्षेत्र में सड़क चौड़ी करने के लिए अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन चिल्फी घाटी में सड़क के दोनों ओर पहाड़ और ढलान होने के कारण 6-लेन चौड़ाई विकसित करना तकनीकी रूप से कठिन होगा।
ऐसे में परियोजना के दौरान कई स्थानों पर पहाड़ की कटिंग करनी पड़ सकती है।
पहाड़ काटने के बाद ढलानों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती
सड़क चौड़ीकरण के लिए पहाड़ी हिस्से की कटिंग के बाद सबसे बड़ी चुनौती कटे हुए ढलानों को स्थिर रखना होगी। इसके लिए रिटेनिंग वॉल, सुरक्षा संरचनाएं, मजबूत ड्रेनेज सिस्टम और ढलानों को सुरक्षित रखने के तकनीकी उपाय जरूरी होंगे।
चिल्फी क्षेत्र में मानसून के दौरान भारी बारिश और पानी के तेज बहाव को देखते हुए भूस्खलन रोकने और पहाड़ी जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था भी परियोजना का अहम हिस्सा होगी।
यानी इस एक्सप्रेसवे की सफलता सिर्फ सड़क की चौड़ाई बढ़ाने पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षित और टिकाऊ निर्माण सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
कवर्धा बनेगा इंटर-स्टेट कॉरिडोर का अहम केंद्र
प्रस्तावित 6-लेन मार्ग मध्यप्रदेश के जबलपुर और मंडला से होकर छत्तीसगढ़ की चिल्फीघाटी में प्रवेश करेगा। इसके बाद यह कवर्धा, बेमेतरा और सिमगा होते हुए रायपुर से जुड़ेगा।
इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा लाभ कवर्धा और आसपास के जिलों को मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से कवर्धा की मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों तक पहुंच और मजबूत होगी।
तेज सड़क कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापारियों और उद्योगों को बड़े बाजारों तक पहुंचने में आसानी हो सकती है। वहीं मालवाहक वाहनों के यात्रा समय में कमी आने से परिवहन लागत घटने की संभावना है।
व्यापार से लेकर पर्यटन तक मिलेगा फायदा
जबलपुर और रायपुर के बीच बेहतर सड़क संपर्क का असर केवल यातायात तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। दोनों राज्यों के बीच व्यापार, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन को भी इससे बढ़ावा मिल सकता है।
चिल्फी और आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। दूसरी ओर कृषि और अन्य स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने में परिवहन नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सड़क चौड़ी होगी तो पर्यावरणीय चुनौती भी बढ़ेगी
परियोजना के सामने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की चुनौती भी होगी। 6-लेन सड़क के लिए केवल मौजूदा सड़क को चौड़ा करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कैरिजवे के साथ मीडियन, शोल्डर, सुरक्षा संरचनाओं और ड्रेनेज के लिए भी अतिरिक्त जगह की जरूरत पड़ेगी।
प्रत्येक लेन की मानक चौड़ाई करीब 3.5 मीटर मानी जाए तो छह लेन का कैरिजवे लगभग 21 मीटर चौड़ा होगा। इसके अलावा अन्य सड़क संरचनाओं के लिए भी अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी।
चिल्फीघाटी के करीब 8 किलोमीटर लंबे पहाड़ी हिस्से में यह चुनौती और बढ़ जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पांच किलोमीटर से अधिक हिस्से में बड़े पैमाने पर पहाड़ी कटिंग की जरूरत पड़ सकती है।
सैकड़ों पेड़ों की कटाई की आशंका
पहाड़ी कटिंग के साथ वन क्षेत्र पर प्रभाव भी परियोजना का संवेदनशील पहलू होगा। सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले हिस्सों में सैकड़ों पेड़ों की कटाई संभावित बताई जा रही है।
ऐसे में परियोजना के दौरान वन एवं पर्यावरण संबंधी अनुमतियां, प्रभावित वन क्षेत्र का आकलन और प्रतिपूरक पौधारोपण जैसे उपाय महत्वपूर्ण होंगे। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक होगा।
दो राज्यों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है कॉरिडोर
जबलपुर से रायपुर तक प्रस्तावित 6-लेन एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच आर्थिक और परिवहन संबंधों को नई दिशा देने वाला कॉरिडोर बन सकता है।
यदि परियोजना निर्धारित समयसीमा और प्रस्तावित स्वरूप में पूरी होती है तो जबलपुर से रायपुर के बीच यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। कवर्धा जैसे शहरों को बड़े इंटर-स्टेट नेटवर्क से सीधे जुड़ने का फायदा मिलेगा, जबकि व्यापारिक वाहनों के लिए तेज और बेहतर सड़क उपलब्ध हो सकेगी।
हालांकि परियोजना की वास्तविक लागत, निर्माण समयसीमा, विस्तृत अलाइनमेंट, भूमि अधिग्रहण, वन क्षेत्र और चिल्फी घाटी में निर्माण की अंतिम तकनीकी योजना से जुड़े पहलुओं पर आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल इस प्रस्ताव ने मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ तक सड़क कनेक्टिविटी के भविष्य की एक बड़ी तस्वीर जरूर सामने रख दी है—जहां 7-8 घंटे का जबलपुर-रायपुर सफर आने वाले वर्षों में 4 घंटे के भीतर सिमटने की उम्मीद की जा रही है।
Author: cg24x7




