कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में ग्राम पंचायत छोटूपारा के पास जंगलों के बीच स्थित करीब 56 साल पुराना बेल्हारी बांध इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है। बांध के जीर्णोद्धार और नहरों को पक्का करने के लिए करीब 2.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन परियोजना का काम पूरा होने से पहले ही बारिश ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तटबंध की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार बारिश के बीच बांध के तटबंध के कई हिस्सों में धंसाव, गहरी दरारें और मिट्टी का कटाव दिखाई देने लगा है। हालात इतने चिंताजनक हैं कि तटबंध से रिसकर निकल रहा पानी अब आसपास के खेतों तक पहुंचने लगा है। इससे बांध के पानी पर निर्भर करीब 162 एकड़ यानी लगभग 65 हेक्टेयर कृषि भूमि पर नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।
56 साल पुराने बांध के जीर्णोद्धार पर खर्च हो रहे 2.68 करोड़
बेल्हारी बांध क्षेत्र के किसानों के लिए लंबे समय से सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। करीब पांच दशक से अधिक पुराना होने के कारण बांध और उससे जुड़ी नहरों के जीर्णोद्धार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
इसी उद्देश्य से बांध के जीर्णोद्धार और नहरों को पक्का करने के लिए 2.68 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है। उम्मीद थी कि निर्माण और मरम्मत के बाद बांध अधिक मजबूत होगा और किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
लेकिन काम पूरा होने से पहले ही तटबंध के कई हिस्सों में दरारें और धंसाव सामने आने से पूरी परियोजना पर सवाल उठने लगे हैं।
बारिश के बीच तटबंध में गहरी दरारें
बारिश के बाद बेल्हारी बांध के तटबंध की स्थिति लगातार बिगड़ती नजर आ रही है। कई स्थानों पर मिट्टी धंस गई है, जबकि कुछ हिस्सों में गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं।
तटबंध से मिट्टी के लगातार कटाव के कारण बांध की संरचना को लेकर चिंता बढ़ गई है। सबसे गंभीर बात यह है कि बांध के भीतर जमा पानी तटबंध के कमजोर हिस्सों से रिसकर बाहर निकल रहा है और खेतों की ओर पहुंच रहा है।
यदि इसी तरह पानी का रिसाव और मिट्टी का कटाव जारी रहा तो तटबंध के और कमजोर होने की आशंका है।
162 एकड़ फसल पर मंडराया खतरा
बेल्हारी बांध से आसपास के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलती है। वर्तमान स्थिति का सीधा असर खेती पर पड़ने की आशंका है।
बांध से जुड़े करीब 162 एकड़ कृषि क्षेत्र, यानी लगभग 65 हेक्टेयर फसल, पर पानी के रिसाव और तटबंध के क्षतिग्रस्त होने का खतरा मंडरा रहा है। किसानों के लिए यह चिंता इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बारिश के मौसम में खेतों में खड़ी फसल को नुकसान होने पर उनकी पूरी मेहनत और लागत प्रभावित हो सकती है।
एक तरफ किसान बांध के पानी से सिंचाई की उम्मीद कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ तटबंध से निकलता पानी उनके लिए नई परेशानी बनता दिखाई दे रहा है।
निर्माण पूरा होने से पहले ही सवालों के घेरे में काम
बेल्हारी बांध में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य के बीच तटबंध में दरारें पड़ने की खबर ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बांध के सुधार और नहरों को पक्का करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो काम पूरा होने से पहले ही तटबंध में इस तरह का नुकसान कैसे सामने आया?
क्या तटबंध के कमजोर हिस्सों की पर्याप्त मरम्मत और मजबूती की गई थी? क्या बारिश से पहले निर्माण कार्य के जरूरी हिस्से पूरे किए गए थे? और क्या निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का पर्याप्त पालन हुआ? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
किसानों को अब तत्काल राहत की उम्मीद
वर्तमान हालात को देखते हुए किसानों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग पर है। ग्रामीणों की प्राथमिक चिंता यह है कि तटबंध को तत्काल सुरक्षित किया जाए, ताकि पानी का रिसाव और मिट्टी का कटाव आगे न बढ़े।
यदि समय रहते कमजोर हिस्सों को मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में भारी बारिश की स्थिति में समस्या और गंभीर हो सकती है। इससे बांध की सुरक्षा के साथ-साथ आसपास के खेतों और किसानों की फसल पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
करोड़ों की परियोजना की जमीनी हकीकत पर निगाह
बेल्हारी बांध का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक पुराने बांध की मरम्मत का विषय नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे जीर्णोद्धार कार्य की गुणवत्ता और निगरानी से भी जुड़ा है।
एक ओर शासन स्तर पर सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने और पुराने जलाशयों के जीर्णोद्धार पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर काम पूरा होने से पहले तटबंध में दरारें सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में मौके का तकनीकी निरीक्षण कर क्या कदम उठाता है और क्या तटबंध को तत्काल मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कार्य कराया जाता है।
फिलहाल बेल्हारी बांध के तटबंध की दरारों ने 56 साल पुराने जलाशय की सुरक्षा के साथ-साथ 65 हेक्टेयर के करीब कृषि क्षेत्र की चिंता भी बढ़ा दी है। बारिश का दौर जारी रहने के बीच किसानों को अब जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई का इंतजार है।
Author: cg24x7




