रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को एक साथ बढ़ावा देने की दिशा में शुरू की गई भोरमदेव जंगल सफारी तेजी से प्रदेश की नई इको-टूरिज्म पहचान बनकर उभर रही है। प्राकृतिक जैव विविधता को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों को जंगल, वन्यजीव और प्रकृति के करीब लाने की इस पहल को पहले ही महीने में शानदार प्रतिक्रिया मिली है। मात्र एक माह के संचालन के दौरान 480 से अधिक पर्यटक सफारी का आनंद लेने पहुंचे, जबकि स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और महिला स्व-सहायता समूहों को मिलाकर करीब 2.75 लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई।
राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करते हुए प्रकृति संरक्षण और सतत विकास का सफल मॉडल भी बन रही है।
इको-टूरिज्म के जरिए प्रकृति और विकास का संतुलन
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विकसित भोरमदेव जंगल सफारी का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता को बिना नुकसान पहुंचाए पर्यटकों को जंगलों की खूबसूरती और वन्यजीवों से परिचित कराना है। यह परियोजना इको-टूरिज्म की उसी अवधारणा पर आधारित है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप तथा उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह पहल अब प्रदेश के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल होती जा रही है।
पहले ही महीने में मिला शानदार प्रतिसाद
वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल के अनुसार भोरमदेव जंगल सफारी का शुभारंभ 3 मई को किया गया था। पर्यटकों के लिए इसका संचालन शुरू होते ही बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी और रोमांच पसंद पर्यटक यहां पहुंचने लगे।
मानसून को देखते हुए 4 जून से सफारी का संचालन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है, लेकिन इससे पहले केवल एक महीने में 489 पर्यटकों ने जंगल सफारी का अनुभव लिया। इस अवधि में सफारी संचालन से लगभग 2.75 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित हुई।
उन्होंने बताया कि बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद नवंबर से जंगल सफारी का संचालन दोबारा शुरू किया जाएगा।
स्थानीय युवाओं को मिला रोजगार, महिलाओं की बढ़ी आय
भोरमदेव जंगल सफारी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराना शामिल है।
सफारी शुरू होने के बाद क्षेत्र के 17 स्थानीय युवाओं को वाहन चालक, गाइड और गेटकीपर के रूप में रोजगार मिला। केवल एक महीने में इन युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की।
इसके अलावा वन प्रबंधन समिति को लगभग 92 हजार रुपये तथा वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई।
सफारी परिसर में महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय रही। कैंटीन संचालन से एक माह में 20 हजार रुपये से अधिक का लाभ हुआ, जिससे समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिली।
जंगल सफारी के साथ प्राकृतिक उद्यान भी बना आकर्षण
भोरमदेव आने वाले पर्यटकों के लिए केवल जंगल सफारी ही नहीं, बल्कि यहां का प्राकृतिक उद्यान भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है।
वन विभाग के अनुसार सफारी का आनंद लेने वाले पर्यटकों के अतिरिक्त 1,500 से अधिक लोगों ने भोरमदेव के प्राकृतिक उद्यान का भी भ्रमण किया। इससे स्पष्ट है कि भोरमदेव क्षेत्र धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है।
वन्यजीवों की साइटिंग ने बढ़ाया रोमांच
करीब 36 किलोमीटर लंबे जंगल सफारी मार्ग पर पर्यटकों को कई दुर्लभ वन्यजीवों और पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिला।
सफारी के दौरान पर्यटकों ने भारतीय गौर (बाइसन), भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी (बार्किंग डियर), बाघ के पदचिह्न (टाइगर पगमार्क), जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों और रंग-बिरंगी तितलियों को देखा।
घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां, हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर वातावरण ने पर्यटकों को रोमांचक और यादगार अनुभव प्रदान किया।
352 वर्ग किलोमीटर में फैला है अभयारण्य
वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य में 36 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग विकसित किया गया है।
सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के समीप करियाआमा क्षेत्र में बनाया गया है, जहां से पर्यटक अपनी जंगल यात्रा शुरू करते हैं। सफारी के दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक धरोहर को बेहद करीब से देखने का अवसर मिलता है।
इको-टूरिज्म के सफल मॉडल के रूप में उभर रहा भोरमदेव
भोरमदेव जंगल सफारी आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और सतत विकास का सफल उदाहरण बनकर उभर रही है। इस परियोजना ने यह साबित किया है कि यदि पर्यटन को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ विकसित किया जाए, तो इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य भी प्रभावी ढंग से हासिल किए जा सकते हैं।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि मानसून के बाद नवंबर में सफारी दोबारा शुरू होने पर पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होगी तथा भोरमदेव आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
Author: cg24x7




