रायपुर। सिर पर सुरक्षित छत और अपना पक्का घर हर परिवार का सपना होता है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह सपना कई जरूरतमंद परिवारों के लिए वर्षों तक अधूरा रह जाता है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सेन्हाभाठा निवासी श्रीमती विश्वासा बाई की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली विश्वासा बाई वर्षों तक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर थीं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन्हें पक्का घर मिलने से उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशानुसार संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके जीवन में नई उम्मीद और स्थायित्व का संचार किया है।
कच्चे मकान में हर मौसम बन जाता था चुनौती
विश्वासा बाई के लिए कच्चा मकान केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि रोज की चिंता का कारण था। गर्मी के मौसम में घर के भीतर असहनीय गर्मी रहती थी, जबकि सर्दियों में ठंडी हवाएं सीधे घर में प्रवेश करती थीं। सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती थी, जब छत टपकने लगती थी और घर के भीतर पानी भर जाता था।
बरसात की रातों में उन्हें पूरी रात जागकर घर से पानी निकालना पड़ता था। साथ ही सांप-बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का डर भी हमेशा बना रहता था। ऐसे हालात में पक्का और सुरक्षित घर उनके लिए केवल एक सपना बनकर रह गया था।
आवास प्लस सर्वे के बाद मिली योजना की स्वीकृति
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत किए गए आवास प्लस सर्वे में विश्वासा बाई पात्र पाई गईं। इसके बाद वर्ष 2025-26 में उनके नाम आवास स्वीकृत किया गया।
शासन से प्राप्त आर्थिक सहायता और स्थानीय प्रशासन के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने पक्के घर का निर्माण शुरू किया। कुछ ही समय में वर्षों का सपना साकार हो गया और आज वे अपने परिवार के साथ नए पक्के मकान में सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रही हैं।
अब नहीं सताती बारिश और आंधी की चिंता
पक्का मकान बनने के बाद विश्वासा बाई के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें बारिश के दौरान छत टपकने, घर में पानी भरने या तेज आंधी-तूफान से घर के क्षतिग्रस्त होने की चिंता नहीं रहती। मजबूत आवास ने उनके परिवार को सुरक्षा के साथ आत्मविश्वास भी दिया है।
उनका कहना है कि अब उनके बच्चे भी सुरक्षित वातावरण में रह पा रहे हैं और परिवार पहले की तुलना में अधिक सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी रहा है।
कई सरकारी योजनाओं का भी मिला लाभ
प्रधानमंत्री आवास योजना के अलावा विश्वासा बाई को विभिन्न शासकीय योजनाओं का भी लाभ मिला है, जिससे उनका जीवन पहले की अपेक्षा अधिक सुविधाजनक हो गया है।
उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत आवास निर्माण कार्य में मजदूरी मिली। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से रसोई गैस कनेक्शन, जल जीवन मिशन से घर तक नल-जल सुविधा, बिजली कनेक्शन, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड तथा महतारी वंदन योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ प्राप्त हुआ।
इन सभी योजनाओं ने मिलकर उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है।
“सिर्फ मकान नहीं, सम्मान से जीने का भरोसा मिला”
विश्वासा बाई कहती हैं कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनका भी अपना पक्का घर होगा। आज जब वे अपने नए घर के आंगन में खड़ी होती हैं तो उन्हें गर्व और आत्मसंतोष का अनुभव होता है।
वे शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि उन्हें केवल एक मकान नहीं मिला, बल्कि सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मविश्वास से भरा जीवन जीने का अवसर मिला है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को स्थायित्व और भविष्य के प्रति नई उम्मीद दी है।
ग्रामीण विकास की दिशा में योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव
विश्वासा बाई की कहानी इस बात का उदाहरण है कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का समन्वित लाभ मिलने से ग्रामीण परिवारों के जीवन में व्यापक बदलाव संभव है। आवास, रोजगार, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान कर रही हैं।
Author: cg24x7




