कांकेर/राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में वन्यजीव और पशु तस्करी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कांकेर जिले में वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कथित तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से दो बाघ की खाल बरामद की है। बरामद खालों की अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर राजनांदगांव जिले में पशु तस्करी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है।
देर रात घेराबंदी कर पकड़े गए आरोपी
वन विभाग के अनुसार पखांजूर क्षेत्र के पश्चिम बांदे वन परिक्षेत्र की टीम को वन्यजीव तस्करी की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर शुक्रवार देर रात करीब 11 बजे पीवी-78 (जनकपुर) चौक पर घेराबंदी की गई। इस दौरान दो संदिग्ध व्यक्तियों को रोककर उनकी तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान उनके कब्जे से दो बाघ की खाल बरामद हुई। इसके बाद दोनों आरोपियों को तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में बरामद खालों की अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी गई है।
महाराष्ट्र के रहने वाले हैं दोनों आरोपी
वन विभाग की प्रारंभिक जांच में गिरफ्तार दोनों आरोपी पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के आहेरी थाना क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि आरोपी किसी बड़े वन्यजीव तस्करी गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद बाघ की खाल कहां से लाई गई थी, इसे किसे सौंपा जाना था और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
रायपुर भेजी गई बाघ की बरामद खाल
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बरामद दोनों बाघ की खाल को विशेषज्ञ परीक्षण और वैज्ञानिक सत्यापन के लिए रायपुर भेजा गया है। जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि खाल कितनी पुरानी है, किस बाघ की है तथा उसकी मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई थी।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच की दिशा तय की जाएगी।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान यदि किसी बड़े अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का खुलासा होता है तो अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी समन्वय कर कार्रवाई की जाएगी।
वन अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
राजनांदगांव में पशु तस्करी के वायरल वीडियो से बढ़ी हलचल
उधर, राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक के बोरतलाव थाना क्षेत्र में पशु तस्करी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बताया जा रहा है कि यह घटना 10 जून 2026 की है। ग्राम अंडी में ग्रामीणों ने संदेह होने पर एक पिकअप वाहन को रोककर उसकी जांच की थी। वाहन में तीन भैंसें लदी हुई थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि वाहन चालक के पास मवेशियों के परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज मौजूद नहीं था।
शिकायत के बाद जांच की मांग हुई तेज
वायरल वीडियो में कथित तौर पर कुछ लोगों के नाम सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। इसके बाद संबंधित पक्ष की ओर से बोरतलाव थाने में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई। शिकायत में कथित आर्थिक लेन-देन और वाहन संचालन से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
इसके विरोध में ग्राम अंडी के बड़ी संख्या में ग्रामीण बोरतलाव थाना पहुंचे और थाना प्रभारी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 सहित अन्य लागू कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
पहले भी मिलती रही हैं शिकायतें
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में मवेशियों के अवैध परिवहन और पशु तस्करी की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। उनका आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो इस तरह की गतिविधियां लगातार बढ़ सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और नियमित जांच अभियान चलाने की मांग की है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल कांकेर में बाघ की खाल बरामदगी और राजनांदगांव में वायरल पशु तस्करी वीडियो—दोनों मामलों में संबंधित विभाग जांच में जुटे हुए हैं। वन विभाग जहां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रहा है, वहीं पुलिस वायरल वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
Author: cg24x7




