बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया मोड़ आया, न्यायिक जांच आयोग के सामने दो महिला चश्मदीदों ने दिए बयान, एकतरफा फायरिंग में कई भरत की जानहै।

भोजपुर (बिहार) के

न्यायिक जांच आयोग के सामने गांव की दो महिलाओं, चंद्रावती देवी और उषा देवी ने अपनी गवाही दी, इस मामले में केवल ग्रामीण महिलाएं ही नहीं, बल्कि भरत तिवारी के परिजन भी लगातार पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले बुधवार को भरत के भाई चंदन तिवारी ने भी आयोग के सामने करीब 30 मिनट तक अपना बयान दर्ज कराया था। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी कथित मुठभेड़ मामले में न्यायिक जांच और राज्य मानवाधिकार आयोग, दोनों स्तरों पर घटना से जुड़े हर पहलू की गहन पड़ताल की जा रही है।

“हथियार फेंकने के बाद भी पुलिस ने मारी तीन गोलियां”

जांच आयोग के सामने गवाही देते हुए चश्मदीद महिला चंद्रावती देवी ने अपनी क्षेत्रीय भाषा में उस खौफनाक मंजर को बयां किया। उन्होंने कहा:

“तीन गो गोली मारल रहिल, हम आपन आंखन देखल… जब भरत ने अपना हथियार फेंक दिया, उसके बाद भी पुलिस वालों ने उसे तीन गोलियां मारीं। दो गोली पैर (गोड) में और एक गोली दूसरी जगह मारी गई। इसके बाद पुलिस वाले भरत के कंधे पर हाथ रखकर उसे जबरन गाड़ी में धकेल कर ले गए।”

सरेंडर की कहानी: दूसरी चश्मदीद उषा देवी ने भी की पुष्टि

आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने के बाद जब उषा देवी बाहर निकलीं, तो मीडियाकर्मियों ने उनसे पूछताछ की। उषा देवी ने बताया कि उन्होंने आयोग के अधिकारी को घटना वाले दिन की पूरी सच्चाई हूबहू बता दी है।

  • भरत की मांगें: घटना के वक्त भरत तिवारी ने पुलिस के सामने कुछ मांगें रखी थीं।

  • पुलिस का आश्वासन: मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने उन मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया।

  • पिस्तौल फेंकना और फायरिंग: पुलिस अधिकारी के आश्वासन पर भरोसा करके जैसे ही भरत तिवारी ने अपनी पिस्तौल नीचे फेंकी, पुलिस ने उन पर फायरिंग कर दी और तीन गोलियां मार दीं। इसके बाद उन्हें गाड़ी में डालकर वहां से ले जाया गया।

भाई चंदन तिवारी का दावा: “सरेंडर के बाद आगे ले जाकर मारी गोली”

इस मामले में केवल ग्रामीण महिलाएं ही नहीं, बल्कि भरत तिवारी के परिजन भी लगातार पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले बुधवार को भरत के भाई चंदन तिवारी ने भी आयोग के सामने करीब 30 मिनट तक अपना बयान दर्ज कराया था।

चंदन तिवारी ने आयोग के समक्ष दावा किया कि उनके भाई ने पूरी तरह आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस उसे आगे ले गई और गोली मार दी।

“हमारी सिर्फ एक ही मांग है कि इस फर्जी एनकाउंटर में शामिल सभी दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले। जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक हमारे परिवार को तसल्ली नहीं मिलेगी।” — चंदन तिवारी, मृतक भरत तिवारी के भाई

राज्य सरकार से मायूसी, केंद्र से न्याय की आस

चंदन तिवारी ने मीडिया के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब वे दिल्ली जा रहे थे, तब शासन या प्रशासन के किसी भी बड़े नेता या अधिकारी ने उनसे मुलाकात करने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें बिहार सरकार की व्यवस्था से न्याय मिलने की उम्मीद बेहद कम है, लेकिन उन्हें भारत सरकार और इस न्यायिक आयोग पर पूरा भरोसा है कि उनके परिवार को इंसाफ मिलेगा।

दो मुख्य चश्मदीदों के इन बयानों के बाद अब इस एनकाउंटर मामले में पुलिस प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। न्यायिक आयोग अब इन बयानों के आधार पर मामले की अगली कड़ियों को जोड़ने में जुट गया है।

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Author: cg24x7

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