एमपी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल: लखन पटेल से छीना गया पशुपालन विभाग, अब संभालेंगे ‘आनंद’ विभाग; सियासी गलियारों में तेज हुईं अटकलें

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने देर रात एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला लेते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल से उनका विभाग वापस ले लिया है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब उन्हें आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस अचानक हुए बदलाव ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है और सत्ता के गलियारों में इसके पीछे की वजहों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सरकार की ओर से अभी तक विभाग परिवर्तन के संबंध में कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। वहीं मंत्री लखन पटेल ने भी पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक और पार्टी से जुड़े सूत्र इस फैसले के पीछे कई संभावित कारणों की चर्चा कर रहे हैं।

एक फोन कॉल के बाद बदले हालात!

राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि मंगलवार देर रात दिल्ली से आए एक महत्वपूर्ण फोन कॉल के बाद पूरे घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। बताया जा रहा है कि इसके बाद विभागीय बदलाव की प्रक्रिया तेज हुई और कुछ ही घंटों में अधिसूचना जारी कर दी गई।

सूत्रों का दावा है कि मंत्री लखन पटेल को भी इस फैसले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। विभाग परिवर्तन की सूचना उन्हें भी आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही मिली।

कथित सौदेबाजी की शिकायत बनी वजह?

चर्चाओं के अनुसार राज्य में बड़ी एवं स्वावलंबी गौशालाओं के लिए लगभग 125 एकड़ सरकारी भूमि के आवंटन से जुड़े लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और सौदेबाजी की शिकायतें सरकार तक पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि इन शिकायतों को गंभीरता से लिया गया और इसी के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई का निर्णय हुआ।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही सरकार ने इस संबंध में कोई बयान जारी किया है।

2365 करोड़ के विभाग से 12 करोड़ के विभाग तक

इस फेरबदल का सबसे बड़ा असर मंत्री लखन पटेल के विभागीय महत्व पर पड़ा है।

अब तक उनके पास लगभग 2365 करोड़ रुपये के बजट वाला पशुपालन एवं डेयरी विभाग था, जबकि अब उन्हें आनंद विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जिसका वार्षिक बजट करीब 12 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

राजनीतिक जानकार इसे केवल विभाग परिवर्तन नहीं बल्कि मंत्री के राजनीतिक कद में कमी के रूप में भी देख रहे हैं।

डेयरी परियोजनाओं में सुस्ती भी बनी नाराजगी का कारण?

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री मोहन यादव लंबे समय से पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की लगभग 1500 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण डेयरी परियोजना अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही थी। इसके अलावा सांची दुग्ध संघ से जुड़े वित्तीय और ऋण संबंधी मामलों में भी लगातार देरी हो रही थी। सरकार की प्राथमिकता वाली कई योजनाओं के क्रियान्वयन में सुस्ती को लेकर मुख्यमंत्री पहले भी नाराजगी जता चुके थे।

सूत्रों का कहना है कि विभाग से जुड़ी कई शिकायतें दिल्ली तक पहुंचने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया।

गौशाला योजना को लेकर भी उठे सवाल

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि गौशाला योजना के क्रियान्वयन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कुछ पदाधिकारियों ने भी असंतोष व्यक्त किया था।

कथित आरोप हैं कि योजना के तहत पात्र संस्थाओं के बजाय कुछ अपात्र संस्थाओं को भूमि आवंटित करने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे पहले इसी मामले में विभाग के एक अधिकारी को हटाए जाने की भी चर्चा रही थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

सरकार और मंत्री दोनों की चुप्पी

पूरे घटनाक्रम पर अभी तक न तो मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया है और न ही मंत्री लखन पटेल ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी है। इस कारण राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर लगातार जारी है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार आने वाले दिनों में इस फैसले के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं करती है, तो विभाग परिवर्तन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।

राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा फैसला

मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में किसी मंत्री का विभाग इतनी तेजी से बदले जाने का यह पहला प्रमुख मामला माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक सख्ती के संदेश के रूप में भी देख रहे हैं। वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार से पारदर्शिता की मांग कर सकता है।

फिलहाल विभाग परिवर्तन के वास्तविक कारणों पर आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है। जब तक सरकार या संबंधित मंत्री की ओर से स्पष्ट बयान नहीं आता, तब तक यह मामला राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों का विषय बना रहेगा।

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Author: cg24x7

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