रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को ऐतिहासिक बालार्जुन ताम्रपट्टिकाओं का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से गूंजा। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में दी गई जानकारी और संस्कृति विभाग द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत जवाब के बीच कथित विरोधाभास का मुद्दा उठाते हुए संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल को कटघरे में खड़ा कर दिया। सवालों के दौरान मंत्री तत्काल स्पष्ट जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रश्नकाल में उठा ऐतिहासिक ताम्रपट्टिकाओं का मुद्दा
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने संस्कृति विभाग से पूछा कि क्या बालार्जुन ताम्रपत्र को पांडुलिपि (मैन्युस्क्रिप्ट) की श्रेणी में रखा जाता है। इसके जवाब में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रारंभिक दौर में ताम्रपत्र को पांडुलिपि की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया था।
मंत्री ने सदन को बताया कि मल्हार क्षेत्र से प्राप्त बालार्जुन ताम्रपत्र वर्ष 1987 में जुनवानी गांव के किसानों को मिला था। बाद में पुरातत्वविद् डॉ. अहमद हसन खान के माध्यम से इसे संरक्षित किया गया और 18 जनवरी 1988 को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक रघुनंदन प्रसाद पाण्डेय को सौंपा गया। उन्होंने कहा कि उस समय इसे पांडुलिपि नहीं माना गया था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने इसे पांडुलिपि के रूप में स्वीकार किया। मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसका उल्लेख किया था।
कांग्रेस ने बताया जवाबों में विरोधाभास
मंत्री के जवाब के बाद कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने सरकार को घेरते हुए कहा कि विधानसभा में संस्कृति विभाग द्वारा दी गई जानकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में दी गई जानकारी एक-दूसरे से मेल नहीं खाती।
उन्होंने कहा कि विभाग के लिखित उत्तर में ताम्रपत्र की लिपि ब्राह्मी और भाषा संस्कृत बताई गई है, जबकि प्रधानमंत्री ने अपने रेडियो कार्यक्रम में ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के संदर्भ में इसे ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखा हुआ बताया था।
विधायक ने कहा कि यह केवल तथ्यात्मक गलती नहीं बल्कि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रधानमंत्री द्वारा दी गई जानकारी सही है तो विभाग का उत्तर गलत कैसे है, और यदि विभाग का उत्तर सही है तो फिर देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक अलग जानकारी कैसे पहुंची।
मंत्री बोले- जानकारी मंगाकर कराएंगे परीक्षण
विपक्ष के लगातार सवालों के बीच संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वीकार किया कि उन्हें इस विषय की विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी मंगाई जाएगी और विशेषज्ञों से परीक्षण कराया जाएगा।
मंत्री ने सदन में आश्वासन दिया कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि अधिकारियों ने गलत तथ्य प्रस्तुत किए हैं या विभागीय स्तर पर कोई त्रुटि हुई है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।
ऐतिहासिक महत्व की हैं बालार्जुन ताम्रपट्टिकाएं
बालार्जुन ताम्रपट्टिकाएं छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में गिनी जाती हैं। इतिहासकारों के अनुसार इन ताम्रपत्रों में तत्कालीन शासन, प्रशासन, भूमि दान और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख दर्ज हैं। इन्हें भारतीय इतिहास और प्राचीन संस्कृति के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
इसी कारण इनकी भाषा, लिपि और ऐतिहासिक प्रमाणिकता को लेकर किसी भी प्रकार की तथ्यात्मक त्रुटि गंभीर मानी जाती है।
अविश्वास प्रस्ताव पर आज होगी चर्चा
इधर विधानसभा के मानसून सत्र में राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म होने की संभावना है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सदन में स्वीकार किया जा चुका है। विधानसभा की कार्यसूची के अनुसार 17 जुलाई को प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद दोपहर 12 बजे से इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद यह विधानसभा में लाया गया दसवां अविश्वास प्रस्ताव होगा। हालांकि अब तक सदन में पेश किए गए सभी नौ अविश्वास प्रस्तावों में तत्कालीन सरकारें बहुमत साबित करने में सफल रही हैं। ऐसे में इस बार भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।
सदन में बढ़ी राजनीतिक गर्माहट
बालार्जुन ताम्रपट्टिकाओं से जुड़ा विवाद और अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा ने विधानसभा के मानसून सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। विपक्ष जहां सरकार की कार्यप्रणाली और विभागीय जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार तथ्यों की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा देकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सदन के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
Author: cg24x7




