रायपुर, 20 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में सरकारी खजाने की सुरक्षा और वित्तीय अनुशासन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी विभागों में गबन, चोरी, फिजूलखर्ची और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े हजारों मामले वर्षों से लंबित हैं। इन मामलों में 113 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक की राशि गबन या नुकसान से संबंधित बताई गई है, जबकि कुल लंबित मामलों में वित्तीय अनियमितताओं की राशि 124.72 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में न तो समय पर विभागीय कार्रवाई पूरी हुई और न ही अधिकांश मामलों में सरकारी धन की वसूली हो सकी। कई प्रकरण ऐसे हैं जो 10 वर्ष से भी अधिक समय से लंबित हैं।
CAG रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 तक सरकारी धन के नुकसान, चोरी, गबन और फिजूलखर्ची से जुड़े 2,181 मामले लंबित थे। इनमें कुल 124.72 करोड़ रुपये की राशि शामिल है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि:
- 735 मामलों में लगभग 88.06 करोड़ रुपये की राशि से जुड़ी अनियमितताओं पर न तो विभागीय जांच शुरू की गई और न ही आपराधिक कार्रवाई।
- 1,433 मामलों में लगभग 36.60 करोड़ रुपये के मामलों में विभागीय जांच तो शुरू हुई, लेकिन वर्षों बाद भी उसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।
- केवल 13 मामलों में विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई पूरी हुई, लेकिन इनमें भी संबंधित राशि की वसूली नहीं हो सकी।
10 साल से अधिक समय से लंबित हैं गबन के मामले
रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी धन और सामग्री के नुकसान से जुड़े अनेक मामले एक दशक से भी अधिक समय से लंबित हैं।
इनमें—
- 121 मामले सरकारी धन या सरकारी भंडार की चोरी से जुड़े हैं, जिनकी राशि लगभग 54 लाख रुपये बताई गई है।
- जबकि 113.60 करोड़ रुपये से संबंधित गबन एवं सरकारी सामग्री के नुकसान के मामले लंबे समय से लंबित हैं।
CAG ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है और समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता बताई है।
क्या कहती है छत्तीसगढ़ वित्त संहिता?
रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ वित्त संहिता का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्रत्येक सरकारी कर्मचारी अपने कार्य अथवा लापरवाही से शासन को हुई वित्तीय हानि के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होता है।
संहिता के अनुसार—
- यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही या धोखाधड़ी से सरकारी धन का नुकसान होता है, तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
- ऐसे सभी मामलों की सूचना महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) को भेजना अनिवार्य है।
- दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय एवं आवश्यक होने पर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरकार ने क्या दिया जवाब?
CAG द्वारा इस विषय पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगे जाने पर फरवरी 2026 में सरकार ने जवाब दिया कि लंबे समय से लंबित गबन और धोखाधड़ी के मामलों के समाधान तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि अधिकांश मामलों में अभी तक न तो अंतिम कार्रवाई हुई है और न ही सरकारी धन की प्रभावी वसूली हो पाई है।
वसूली और जवाबदेही पर उठे सवाल
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्षों तक जांच लंबित रहती है तो सरकारी धन की रिकवरी कठिन होती जाती है। ऐसे मामलों में दोषियों की जवाबदेही तय करने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
CAG ने भी संकेत दिया है कि विभागों को लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कर वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना चाहिए।
मुख्य बिंदु
- 31 मार्च 2025 तक 2,181 वित्तीय अनियमितताओं के मामले लंबित।
- कुल वित्तीय प्रभाव 124.72 करोड़ रुपये।
- 113.60 करोड़ रुपये से अधिक के गबन एवं नुकसान के मामले वर्षों से लंबित।
- 735 मामलों में जांच तक शुरू नहीं हुई।
- 1,433 मामलों की जांच अधूरी।
- केवल 13 मामलों में कार्रवाई पूरी, लेकिन राशि की वसूली नहीं।
- राज्य सरकार ने लंबित मामलों के समाधान के लिए कार्रवाई का आश्वासन दिया।
महत्वपूर्ण तथ्य: यह जानकारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में दर्ज उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। रिपोर्ट वित्तीय अनियमितताओं और लंबित मामलों का उल्लेख करती है। इसमें संबंधित व्यक्तियों की दोषसिद्धि का निष्कर्ष नहीं दिया गया है; अंतिम जिम्मेदारी संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होती है।
Author: cg24x7




