72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में प्रदेश को मिला गौरव, रामनामी समुदाय पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को मिला सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का राष्ट्रीय सम्मान

रायपुर, 20 जुलाई 2026। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को बड़ी राष्ट्रीय पहचान मिली है। राज्य के विशिष्ट रामनामी समुदाय के जीवन, आस्था और परंपराओं पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म’ का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और सम्मान का विषय बताया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान केवल एक फिल्म की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी निर्माण टीम को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस फिल्म ने रामनामी समाज की अनूठी परंपराओं और उनकी आध्यात्मिक आस्था को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली तरीके से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को इस तरह राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलना छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

कौन है रामनामी समुदाय?

रामनामी समुदाय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। इस समुदाय के लोग भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और भक्ति के लिए जाने जाते हैं।

रामनामी समाज की सबसे अनोखी पहचान यह है कि इसके अनेक सदस्य अपने शरीर पर ‘राम’ शब्द का स्थायी रूप से गोदना (टैटू) बनवाते हैं। उनके वस्त्रों, धार्मिक ध्वजों और पूजा-पद्धति में भी ‘राम’ नाम प्रमुख रूप से अंकित रहता है। यह परंपरा सामाजिक समानता, भक्ति और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।

विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, बलौदाबाजार, महासमुंद, रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में इस समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति है।

डॉक्यूमेंट्री ने उजागर की समुदाय की सांस्कृतिक विरासत

‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री में समुदाय की धार्मिक आस्था, सामाजिक जीवन, लोक परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और बदलते समय में उनकी जीवन शैली को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।

फिल्म यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार रामनामी समाज ने वर्षों से अपनी सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक मूल्यों को संरक्षित रखा है। डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से दर्शकों को इस दुर्लभ परंपरा और उसके ऐतिहासिक महत्व को समझने का अवसर मिलता है।

राष्ट्रीय मंच पर मिली छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस सम्मान से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, जनजातीय एवं पारंपरिक समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस उपलब्धि के बाद प्रदेश की लोक संस्कृति, लोक कलाओं और पारंपरिक विरासत पर आधारित अन्य रचनात्मक कार्यों को भी प्रोत्साहन मिलेगा तथा युवा फिल्मकारों और शोधकर्ताओं को नई प्रेरणा मिलेगी।

प्रदेश के लिए गौरव का क्षण

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा और वृत्तचित्र निर्माण के क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का सम्मानित होना राज्य के कला, संस्कृति और लोक जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘राम-नामी’ जैसी डॉक्यूमेंट्री न केवल एक समुदाय की जीवन शैली को दस्तावेज़ित करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनती है।

इस राष्ट्रीय सम्मान के साथ एक बार फिर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को देशभर में नई पहचान मिली है।

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Author: cg24x7

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