
रायपुर, 20 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर जोरदार चर्चा करते हुए कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याओं, बिजली दरों में वृद्धि, बेरोजगारी और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरा। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का पक्ष रखते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर कानून-व्यवस्था, किसानों, बिजली दरों, बेरोजगारी और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सरकार की ओर से योजनाओं, विकास कार्यों और वित्तीय प्रबंधन का पक्ष मजबूती से रखा गया।
अविश्वास प्रस्ताव पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
सत्र का सबसे प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रम सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव रहा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि विपक्ष सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए सदन में आया है। कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था, बिजली दरों में बढ़ोतरी, बेरोजगारी और कथित प्रशासनिक विफलताओं को प्रमुख मुद्दा बनाया।
सरकार की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्रियों ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार जनकल्याण और विकास के एजेंडे पर तेजी से काम कर रही है तथा विपक्ष के अधिकांश आरोप तथ्यहीन हैं।
बिजली दरों में वृद्धि का मुद्दा सदन में गूंजा
हाल ही में घरेलू बिजली दरों में प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे तक की बढ़ोतरी का मुद्दा भी विधानसभा में उठा। विपक्ष ने इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया, जबकि सरकार ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय की गई प्रक्रिया के तहत टैरिफ संशोधन किया गया है और बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक निर्णय लिए जा रहे हैं।
तबादलों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल
विधानसभा में हाल ही में आईएएस अधिकारियों के तबादलों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) की नई पदस्थापनाओं और विभिन्न प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर भी चर्चा हुई। विपक्ष ने इन फैसलों पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने इन्हें प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए आवश्यक बताया।
शराब घोटाला और आर्थिक अपराधों पर भी चर्चा
कथित शराब घोटाले और अन्य आर्थिक मामलों की जांच को लेकर भी विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। सरकार की ओर से कहा गया कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर रही हैं और कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया जारी है।
कृषि और ग्रामीण विकास के मुद्दे भी बने चर्चा का केंद्र
सदन में किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सिंचाई, धान खरीदी, समर्थन मूल्य और मानसून की स्थिति पर भी चर्चा हुई। सरकार ने किसानों के हित में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन का दावा किया, जबकि विपक्ष ने कई क्षेत्रों में किसानों को हो रही समस्याओं का मुद्दा उठाया।
शिक्षा और रोजगार पर विपक्ष का हमला
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET), सरकारी भर्तियों और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों पर भी सदन में चर्चा हुई। विपक्ष ने भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।
सदन में कई विधायी और प्रशासनिक कार्यवाही भी हुई
राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए तथा कई प्रशासनिक और वित्तीय विषयों पर जानकारी सदन के पटल पर रखी। विभागीय कार्यों की समीक्षा के दौरान विपक्ष ने पूरक प्रश्नों के माध्यम से सरकार को घेरने का प्रयास किया।
आगे भी जारी रह सकता है राजनीतिक टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कानून-व्यवस्था, किसानों के मुद्दे, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर बहस तेज रहने की संभावना है। सरकार जहां अपनी उपलब्धियों को प्रमुखता से रख रही है, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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इससे पहले
नेता प्रतिपक्ष ने पेश किया अविश्वास प्रस्ताव
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उनकी मंत्रिपरिषद के खिलाफ आधिकारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव रखते हुए उन्होंने सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफलता दिखाई है।
उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यकाल के 135 सप्ताह पूरे हो चुके हैं और अब 136वां सप्ताह चल रहा है। इसी आधार पर विपक्ष सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र लेकर आया है।
“हर सप्ताह जनता के साथ धोखा हुआ” : चरणदास महंत
चर्चा की शुरुआत करते हुए डॉ. महंत ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“विष्णुदेव साय सरकार के हर सप्ताह में माताओं, बहनों और युवाओं के खिलाफ कोई न कोई षड्यंत्र रचा गया। आज मैं सरकार के हर सप्ताह के पाप, धोखे और नाकामियों का हिसाब लेकर सदन में आया हूं।”
उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की जनता के अनुभवों और समस्याओं पर आधारित हैं। सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष ने दिलाई संसदीय मर्यादा की याद
अविश्वास प्रस्ताव पर तीखी बहस शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों के सदस्यों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन चर्चा के दौरान संसदीय परंपराओं, मर्यादा और सदन की गरिमा का पालन करना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
भाजपा ने विपक्ष की एकजुटता पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष के भाषण के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के 25 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अविश्वास प्रस्ताव की शुरुआत स्वयं नेता प्रतिपक्ष कर रहे हैं।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा,
“ऐसा लगता है कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी ही पार्टी के विधायकों पर भरोसा नहीं है, इसलिए उन्हें खुद ही शुरुआत करनी पड़ रही है।”
अजय चंद्राकर के इस बयान के बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
भूपेश बघेल ने दिखाया कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
भाजपा के हमले का जवाब देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तत्काल सक्रिय हुए। उन्होंने कांग्रेस विधायकों से सदन में हाथ उठाकर नेता प्रतिपक्ष के प्रति समर्थन जताने को कहा। इसके बाद कांग्रेस के सभी विधायकों ने हाथ उठाकर डॉ. चरणदास महंत के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
हालांकि सत्ता पक्ष ने इस घटनाक्रम पर भी चुटकी लेने का मौका नहीं छोड़ा।
“यह तो और बड़ी कॉमेडी हो गई” : अजय चंद्राकर
कांग्रेस विधायकों द्वारा समर्थन जताए जाने पर अजय चंद्राकर ने फिर तंज कसते हुए कहा,
“यह तो और भी बड़ी कॉमेडी हो गई कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में अपनी ही पार्टी के विधायकों से इस तरह विश्वास हासिल करना पड़ रहा है।”
भाजपा के वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने भी कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है कि उसे सदन में अपने ही नेता पर भरोसा जताने के लिए हाथ उठवाने पड़ रहे हैं।
चरणदास महंत ने दी स्थिति की सफाई
सदन में जारी राजनीतिक तकरार के बीच नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए कहा कि चर्चा शुरू करने से पहले उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से पूछा था कि वे पहले बोलना चाहेंगे या नहीं।
उन्होंने बताया,
“मैंने भूपेश बघेल जी से पूछा था कि पहले आप बोलेंगे या मैं। उन्होंने कहा कि आप शुरुआत कीजिए, मैं बाद में अपनी बात रखूंगा।”
इस पर अजय चंद्राकर ने फिर व्यंग्य करते हुए कहा,
“मतलब साफ है कि आप उनसे पूछ-पूछकर ही सारे काम करते हैं।”
इसके जवाब में डॉ. महंत ने मुस्कुराते हुए कहा,
“आपस में पूछने में कोई हर्ज नहीं है। हम सभी लोग मिलजुलकर काम करते हैं।”
पूरे दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रहा माहौल
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, युवाओं, महिलाओं, किसानों और विभिन्न सरकारी योजनाओं को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए विपक्ष के पिछले शासनकाल पर भी सवाल उठाए।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी पूरे दिन चर्चा का केंद्र बनी रही। आने वाले चरणों में सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों का विस्तृत जवाब दिए जाने की संभावना है, जिसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी।
Author: cg24x7




