महादेव ऐप केस में नया खुलासा: सौरभ चंद्राकर के कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट की जांच तेज, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर एजेंसियों की नजर

रायपुर/नई दिल्ली। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले की जांच में एक नया और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, फरार आरोपी सौरभ चंद्राकर कथित तौर पर फर्जी पहचान और संदिग्ध पासपोर्ट का इस्तेमाल कर विभिन्न देशों में आवाजाही करता रहा। जांच में यह दावा किया गया है कि उसके पास से बरामद एक कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट में उसकी तस्वीर लगी थी, जबकि उसमें दर्ज नाम श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस (Ajantha Mendis) के नाम से मिलता-जुलता था। हालांकि, जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस का इस पूरे मामले से कोई संबंध नहीं है। उनका नाम कथित तौर पर फर्जी पहचान के रूप में इस्तेमाल किया गया।

ओमान में पूछताछ के दौरान सामने आया पासपोर्ट का मामला

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर को ओमान में हिरासत में लिए जाने के बाद उसके पास मौजूद दस्तावेजों की जांच की गई। इसी दौरान कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट सामने आया, जिसमें फोटो सौरभ चंद्राकर की बताई जा रही है, जबकि नाम में अंग्रेजी वर्तनी में बदलाव कर “Ajanta Mendis” दर्ज किया गया था।

बताया जा रहा है कि इस पासपोर्ट पर जारी होने की तिथि 21 जून 2024 तथा वैधता 21 जून 2034 तक दर्शाई गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह दस्तावेज कैसे तैयार किया गया और इसके पीछे कौन-सा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय था।

जन्मतिथि और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों में भी विसंगतियां

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि और जन्मस्थान भी पहले उपलब्ध दस्तावेजों से मेल नहीं खाते। इससे पहले सौरभ चंद्राकर के संबंध में सामने आए दस्तावेजों में अलग जन्मतिथि और नागरिकता संबंधी विवरण दर्ज थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल भारत छोड़कर दुबई चले गए थे। इसके बाद दोनों द्वारा विदेशी नागरिकता हासिल करने के प्रयासों की भी जांच की जा रही है।

इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस पहले से जारी

महादेव ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच के बाद सौरभ चंद्राकर को वर्ष 2023 में विशेष अदालत द्वारा फरार घोषित किया जा चुका है। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था। भारतीय एजेंसियां लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया में लगी हुई हैं।

फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की भी होगी अलग जांच

जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट फर्जी पाया जाता है तो यह केवल पहचान छिपाने का मामला नहीं होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय दस्तावेज जालसाजी नेटवर्क की ओर भी संकेत करेगा।

अब जांच एजेंसियां निम्न बिंदुओं पर विशेष रूप से काम कर रही हैं—

  • कथित पासपोर्ट किस देश में और किन दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया।
  • आवेदन प्रक्रिया में किन लोगों या एजेंसियों की भूमिका रही।
  • क्या यह किसी संगठित अंतरराष्ट्रीय फर्जी दस्तावेज गिरोह का हिस्सा है।
  • इस पहचान का उपयोग किन-किन देशों की यात्रा के लिए किया गया।

प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ओमान में फर्जी पासपोर्ट से संबंधित मामला दर्ज होता है, तो भारतीय एजेंसियों को सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण में अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।

ओमान के कानून के अनुसार, यदि वहां किसी व्यक्ति के खिलाफ स्थानीय स्तर पर आपराधिक मामला लंबित है, तो पहले उस मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद ही संबंधित अदालत भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर निर्णय ले सकती है।

महादेव ऐप मामले की जांच लगातार जारी

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच एजेंसियां और अन्य संबंधित प्राधिकरण वित्तीय लेनदेन, हवाला नेटवर्क, डिजिटल भुगतान प्रणाली तथा अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच कर रहे हैं। हाल के दिनों में एजेंसियों ने सोशल मीडिया प्रचार, टेलीग्राम नेटवर्क और विदेशी वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी जांच तेज की है।

फर्जी पासपोर्ट से जुड़े इस नए घटनाक्रम को जांच एजेंसियां महादेव ऐप नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और पहचान छिपाने की कथित रणनीति से जोड़कर देख रही हैं। हालांकि, जांच अभी जारी है और इस मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों तथा न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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Author: cg24x7

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