रायपुर/धमतरी। छत्तीसगढ़ के लगभग 1.50 लाख पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक राहत का रास्ता साफ हो गया है। अब राज्य सरकार पेंशनरों को महंगाई राहत (Dearness Relief-DR) देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की पूर्व सहमति या अनापत्ति (NOC) की बाध्यता से मुक्त हो गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार अपनी वित्तीय स्थिति और नीतिगत निर्णयों के आधार पर महंगाई राहत से संबंधित आदेश स्वयं जारी कर सकेगी।
यह बदलाव दोनों राज्यों के बीच हुए एक प्रशासनिक समझौते के बाद संभव हुआ है, जिससे लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया संबंधी बाधाएं समाप्त हो गई हैं।
दोनों राज्यों के समझौते के बाद जारी हुआ आदेश
छत्तीसगढ़ पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष यशवंत देवान के अनुसार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के वित्त सचिवों के संयुक्त हस्ताक्षर से हुए समझौते के आधार पर 17 जुलाई को संबंधित आदेश जारी किया गया। इसके बाद अब महंगाई राहत से जुड़े निर्णय लेने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की सहमति आवश्यक नहीं रहेगी।
अब तक मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत पेंशन संबंधी कई मामलों में दोनों राज्यों के बीच समन्वय और सहमति की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इसी कारण महंगाई राहत के आदेश जारी होने में कई बार महीनों की देरी हो जाती थी।
महंगाई राहत मिलने में होती थी लंबी देरी
पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि पूर्व व्यवस्था के कारण महंगाई राहत की दरों में संशोधन का लाभ पेंशनरों तक समय पर नहीं पहुंच पाता था। दोनों राज्यों के बीच औपचारिक सहमति की प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लग जाता था, जिससे आदेश जारी होने और भुगतान शुरू होने में विलंब होता था।
नई व्यवस्था लागू होने से राज्य सरकार भविष्य में महंगाई राहत से संबंधित निर्णय अधिक तेजी से ले सकेगी और आदेश जारी करने में प्रशासनिक विलंब की संभावना कम होगी।
86 माह की लंबित महंगाई राहत का मुद्दा अभी भी बरकरार
पेंशनर्स एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ के बड़ी संख्या में पेंशनर 86 माह की लंबित महंगाई राहत के भुगतान की मांग कर रहे हैं। संगठन का दावा है कि यह मुद्दा लंबे समय से लंबित है और इसके समाधान की अपेक्षा की जा रही है।
इसी मांग को लेकर पेंशनर्स एसोसिएशन ने 20 जुलाई को रायपुर और भोपाल में प्रदर्शन की घोषणा की थी। हालांकि, सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद संगठन ने प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया।
दो प्रतिशत महंगाई राहत की भी उम्मीद
पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई है कि नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य सरकार शीघ्र ही दो प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई राहत के संबंध में भी निर्णय ले सकती है। साथ ही लंबे समय से लंबित महंगाई राहत के भुगतान के विषय में भी सकारात्मक पहल होने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, लंबित 86 माह की महंगाई राहत अथवा दो प्रतिशत डीआर जारी करने संबंधी कोई आधिकारिक सरकारी आदेश फिलहाल जारी नहीं हुआ है। इसलिए इस संबंध में अंतिम निर्णय राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होगा।
करीब डेढ़ लाख पेंशनरों को मिलेगा सीधा लाभ
नई व्यवस्था से राज्य के लगभग 1.50 लाख पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को लाभ मिलने की संभावना है। अब महंगाई राहत संबंधी निर्णय लेने में प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी और राज्य सरकार वित्तीय प्रावधानों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से आदेश जारी कर सकेगी।
प्रशासनिक प्रक्रिया हुई आसान
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों राज्यों के बीच सहमति की अनिवार्यता समाप्त होने से पेंशन संबंधी निर्णयों में तेजी आएगी। इससे भविष्य में महंगाई राहत के आदेश समय पर जारी करने में सुविधा होगी और पेंशनरों को लंबे इंतजार से राहत मिल सकती है।
हालांकि, महंगाई राहत की नई दर, लंबित भुगतान तथा इसके क्रियान्वयन की समय-सीमा को लेकर अंतिम निर्णय राज्य सरकार द्वारा जारी होने वाले आगामी आदेशों पर निर्भर करेगा।
Author: cg24x7





