नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता में पुलिस बल के साहस को बताया ऐतिहासिक, कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत जीतने वाली एएसआई ज्ञानेश्वरी यादव की उपलब्धि का भी किया विशेष उल्लेख
रायपुर, 28 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षा, विश्वास और सुशासन की सबसे मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि पुलिस जवानों का जज़्बा ही सुरक्षित, शांत और विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत है। मुख्यमंत्री ने यह बात राजधानी रायपुर के शांतिनगर स्थित एक निजी सभागार में आयोजित ‘पत्रिका जज़्बा पुलिस अवार्ड्स-2026’ समारोह को संबोधित करते हुए कही।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिसिंग के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया और कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे पुलिस बल की सेवा भावना, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान है।
पुलिस की वर्दी केवल अधिकार नहीं, सेवा और त्याग का प्रतीक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पुलिसकर्मी हर मौसम, हर परिस्थिति और हर चुनौती के बीच अपने परिवार से दूर रहकर आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उनके त्याग और साहस के कारण ही समाज सुरक्षित वातावरण में जीवन जी पाता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह त्याग, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। कठिन परिस्थितियों में भी पुलिसकर्मी जिस निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।
ज्ञानेश्वरी यादव की उपलब्धि पर पूरे प्रदेश को गर्व
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ पुलिस की सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) ज्ञानेश्वरी यादव का विशेष उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने 199 किलोग्राम कुल भार उठाकर न केवल भारत और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि पुलिस बल के जवान केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेलों के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञानेश्वरी की सफलता प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है तथा यह बताती है कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई लोकतंत्र और विकास की लड़ाई थी
मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस बल की भूमिका का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों तक नक्सलवाद ने छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास को बाधित किया। प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय संस्कृति से समृद्ध यह क्षेत्र लंबे समय तक हिंसा और भय के साए में रहा।
उन्होंने कहा कि आज बस्तर विकास, विश्वास और परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति तथा राज्य पुलिस एवं सुरक्षा बलों के साहस और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ यह संघर्ष केवल सुरक्षा अभियान नहीं था, बल्कि लोकतंत्र, विकास और मानवता की रक्षा का अभियान था। हमारे जवानों ने कठिन जंगलों में अपनी जान की परवाह किए बिना अभियान चलाकर प्रदेश को भयमुक्त बनाने का ऐतिहासिक कार्य किया है।
घायल जवानों के साहस को किया नमन
मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें कई अवसरों पर नक्सल विरोधी अभियानों में घायल जवानों से अस्पताल में मिलने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जवानों के चेहरे पर निराशा नहीं, बल्कि फिर से स्वस्थ होकर मोर्चे पर लौटने का संकल्प दिखाई देता था। यही अदम्य जज़्बा आज छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत बना और इसी साहस के कारण प्रदेश नक्सलवाद के अभिशाप से बाहर निकलने की दिशा में निर्णायक सफलता प्राप्त कर सका।
सकारात्मक पत्रकारिता से बढ़ता है पुलिस का मनोबल
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया चौथे स्तंभ की भूमिका निभाता है। मीडिया यदि पुलिस विभाग के उत्कृष्ट कार्यों, नवाचारों और सेवा भावना को समाज के सामने लाता है तो इससे पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ता है और युवाओं को भी राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक पत्रकारिता समाज में विश्वास, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करती है।
डीजीपी बोले— समाज की अपेक्षाओं को समझने का माध्यम है मीडिया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने कहा कि किसी मीडिया संस्थान द्वारा पुलिसकर्मियों के उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान किया जाना अत्यंत सराहनीय पहल है।
उन्होंने कहा कि मीडिया समाज की अपेक्षाओं और जनभावनाओं को सामने लाता है, जिससे पुलिस व्यवस्था को और अधिक जनोन्मुखी बनाने में मदद मिलती है।
डीजीपी ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति से सबसे बड़ी राहत उन परिवारों को मिली है, जिनके बेटे, बेटियां, पति और पिता वर्षों तक बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा करते रहे।
विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला सम्मान
पत्रिका जज़्बा पुलिस अवार्ड्स-2026 के तहत पुलिसिंग के अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। इनमें प्रमुख रूप से—
- सामुदायिक पुलिसिंग
- पुलिसिंग में नवाचार
- संवाद से समाधान
- सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरूकता
- नवीन आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन
- ई-मालखाना प्रबंधन
- पिंक पेट्रोल यूनिट
- महिला सुरक्षा एवं वूमेन हेल्पलाइन
- साइबर अपराध नियंत्रण
- अनुसंधान एवं अन्वेषण
जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मान प्रदान किया गया।
बड़ी संख्या में शामिल हुए अधिकारी और पुलिस परिवार
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार आर. कृष्णा दास, रायपुर पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और उनके परिवारजन उपस्थित रहे।
पुलिस सेवा और जनविश्वास को मिला सम्मान
‘पत्रिका जज़्बा पुलिस अवार्ड्स-2026’ केवल उत्कृष्ट पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करने का मंच नहीं रहा, बल्कि यह कार्यक्रम पुलिस सेवा, जनसुरक्षा, नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष और समाज के प्रति समर्पण की भावना को सम्मानित करने का भी अवसर बना। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पुलिस बल को आधुनिक संसाधनों, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाओं से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि छत्तीसगढ़ में सुरक्षा, विकास और सुशासन की दिशा में यह अभियान और अधिक मजबूत हो सके।
Author: cg24x7




