रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और शिक्षकों की लंबे समय से बनी हुई कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत डॉक्टरों और फैकल्टी की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष से बढ़ाकर 68 वर्ष किए जाने के प्रस्ताव पर चिकित्सा शिक्षा संचालनालय और स्वास्थ्य विभाग में गंभीरता से विचार-विमर्श चल रहा है। प्रस्ताव को लागू करने से पहले किसी भी तरह की कानूनी अड़चन न आए, इसके लिए विधि विशेषज्ञों से भी सलाह ली जा रही है।
यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को अनुभवी प्रोफेसरों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और वरिष्ठ फैकल्टी की सेवाएं तीन वर्ष अतिरिक्त मिल सकेंगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के निर्धारित मानकों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
15 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी का संकट
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 15 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इन संस्थानों में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर सीटों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, फैकल्टी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लगातार बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मई 2026 की स्थिति के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में 1200 से अधिक फैकल्टी पद खाली हैं। सबसे गंभीर स्थिति सीनियर रेजिडेंट और असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर पर दिखाई दे रही है। वहीं प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भी लगभग आधे पद रिक्त हैं।
पदों की स्थिति एक नजर में
| पद | स्वीकृत पद | खाली पद | रिक्ति प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| प्रोफेसर | 241 | 117 | 48.5% |
| एसोसिएट प्रोफेसर | 399 | 196 | 49.1% |
| असिस्टेंट प्रोफेसर | 644 | 332 | 51.6% |
| सीनियर रेजिडेंट | 518 | 375 | 72.3% |
| जूनियर रेजिडेंट | 502 | 209 | 41.6% |
| डेमोंस्ट्रेटर | 302 | 51 | 16.9% |
नोट: आंकड़े मई 2026 की स्थिति के अनुसार बताए गए हैं।
आंकड़ों से स्पष्ट है कि सीनियर रेजिडेंट के पदों पर सबसे ज्यादा 72.3 प्रतिशत रिक्तियां हैं। इसके बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के 51.6 प्रतिशत, एसोसिएट प्रोफेसर के 49.1 प्रतिशत और प्रोफेसर के 48.5 प्रतिशत पद खाली हैं।
अगले तीन साल में 60 से ज्यादा वरिष्ठ डॉक्टर होंगे रिटायर
फैकल्टी संकट को देखते हुए रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में अनुभवी डॉक्टर सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
वर्ष 2027 में दो प्रमुख डीन डॉ. केके सहारे और डॉ. तृप्ति नागरिया के सेवानिवृत्त होने की बात सामने आई है। इसके अलावा अगले तीन वर्षों के दौरान प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 60 से अधिक वरिष्ठ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त होने की संभावना है।
ऐसे में यदि सेवानिवृत्ति की उम्र 65 से बढ़ाकर 68 वर्ष कर दी जाती है, तो इन अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं लगभग वर्ष 2030 तक उपलब्ध रह सकती हैं। इससे मेडिकल कॉलेजों की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ अध्यापन और चिकित्सा सेवाओं में भी निरंतरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
एनएमसी के मानकों को पूरा करने में मिल सकती है मदद
मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त संख्या में योग्य फैकल्टी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ मान्यता और सीटों के विस्तार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
जानकारों के अनुसार, यदि अनुभवी डॉक्टरों को तीन साल अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलता है तो तत्काल प्रभाव से बड़ी संख्या में पदों पर कार्यरत अनुभवी मानव संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इससे मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्था को स्थिर रखने और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानकों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
विशेष रूप से उन मेडिकल कॉलेजों के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है, जहां फैकल्टी की कमी के कारण मौजूदा व्यवस्थाओं पर दबाव बना हुआ है। अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं जारी रहने से छात्रों की पढ़ाई, क्लीनिकल ट्रेनिंग और विभागीय संचालन को भी सहारा मिल सकता है।
पीएससी भर्ती भी नहीं भर पा रही खाली पद
सरकार की ओर से फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए सीधी भर्ती की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है, लेकिन इससे अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से 125 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती निकाली गई थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें से आधे डॉक्टरों ने भी जॉइनिंग नहीं दी।
जून 2026 की स्थिति में अकेले असिस्टेंट प्रोफेसर के 332 पद रिक्त बताए गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भर्ती प्रक्रिया के बावजूद मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ और शिक्षकीय स्टाफ उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है।
सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
राज्य में जगदलपुर और बिलासपुर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को पीपीपी मॉडल के तहत संचालित करने की तैयारियों के बीच सुपर स्पेशलिटी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रही है।
ऐसे में अनुभवी सरकारी डॉक्टरों की सेवाएं तीन वर्ष तक बढ़ाने का निर्णय सरकार के लिए अल्पकालिक स्तर पर महत्वपूर्ण राहत दे सकता है। इससे एक ओर तत्काल खाली होने वाले पदों का दबाव कम होगा, वहीं दूसरी ओर नए डॉक्टरों की भर्ती और प्रशिक्षण के लिए सरकार को अतिरिक्त समय मिल सकेगा।
क्या 68 साल होगी रिटायरमेंट उम्र?
फिलहाल 65 से 68 वर्ष तक रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। सरकार की ओर से अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है। इसलिए अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत पात्र डॉक्टरों और शिक्षकों को तीन वर्ष अतिरिक्त सेवा का अवसर मिल सकता है। इससे आने वाले वर्षों में होने वाली बड़ी संख्या में सेवानिवृत्तियों का असर कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।
अनुभवी डॉक्टरों को बनाए रखना तत्काल राहत का विकल्प
मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी कोई नई समस्या नहीं है। नए पदों पर भर्ती, योग्य उम्मीदवारों की उपलब्धता और चयन के बाद जॉइनिंग जैसी चुनौतियों के कारण रिक्त पद लंबे समय तक बने रहते हैं। ऐसे में मौजूदा अनुभवी डॉक्टरों की सेवा अवधि बढ़ाना सरकार के सामने उपलब्ध तत्काल विकल्पों में से एक है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि रिटायरमेंट आयु बढ़ाना स्थायी समाधान नहीं होगा। लंबे समय में मेडिकल कॉलेजों में नियमित भर्ती, विशेषज्ञ डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए बेहतर सेवा शर्तें, पदोन्नति की स्पष्ट व्यवस्था और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत होगी।
फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार 65 से 68 वर्ष तक रिटायरमेंट आयु बढ़ाने के प्रस्ताव पर कब अंतिम फैसला लेती है। यदि प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
Author: cg24x7



