कश्मीर में छत्तीसगढ़ के दो हिंदू मजदूरों का धर्म पूछकर हत्या, लश्कर के आतंकी मोहम्मद लतीफ पर शक; सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

श्रीनगर/रायपुर। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार रात आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के दो हिंदू प्रवासी मजदूरों की नाम पूछकर गोली मारकर हत्या कर दी। प्रारंभिक जांच और खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार इस हमले के पीछे आतंकवादी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का हाथ माना जा रहा है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन माना जाता है। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इस हमले को कुख्यात आतंकी मोहम्मद लतीफ और उसके सहयोगी ने अंजाम दिया।

यह घटना एक बार फिर कश्मीर में प्रवासी मजदूरों और गैर-स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हमले का तरीका पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले से मिलता-जुलता बताया जा रहा है, जिसमें आतंकियों ने लोगों की पहचान और धर्म पूछकर उन्हें निशाना बनाया था।

ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे दोनों मजदूर

जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे कुलगाम जिले के केलाम क्षेत्र स्थित एक ईंट-भट्ठे पर दो आतंकी पहुंचे। उस समय वहां कई प्रवासी मजदूर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आतंकियों ने पहले मजदूरों की पहचान पूछी, उनके पहचान पत्र देखे और फिर दो हिंदू मजदूरों को बेहद नजदीक से गोली मार दी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतक छत्तीसगढ़ के निवासी बताए गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से उनके नाम और गृह जिले की आधिकारिक पुष्टि की जानी बाकी है। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई और अन्य मजदूर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए।

मोहम्मद लतीफ पर जांच एजेंसियों का फोकस

खुफिया सूत्रों के अनुसार इस हमले का मुख्य आरोपी मोहम्मद लतीफ हो सकता है। एजेंसियों का कहना है कि इसी आतंकी पर 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक इलाके में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करने का भी आरोप है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि लतीफ लगातार सुरक्षा बलों के निशाने पर है और हालिया हमले के जरिए उसने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसका आतंकी मॉड्यूल अभी भी सक्रिय है और घाटी में बड़े हमले करने की क्षमता रखता है।

मोटरसाइकिल से पहुंचे, पहचान पत्र देखे और बरसाईं गोलियां

रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहम्मद लतीफ अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल पर ईंट-भट्ठे पहुंचा था। दोनों आतंकियों ने पहले वहां मौजूद मजदूरों के पहचान पत्र जांचे और फिर चुनकर दो हिंदू मजदूरों पर बेहद करीब से फायरिंग कर दी।

स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने लगातार 10 से 12 राउंड गोलियां चलने की आवाज सुनी। घटना के बाद दोनों आतंकी मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।

पहलगाम हमले जैसा पैटर्न

सुरक्षा एजेंसियां इस हमले की तुलना 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले से कर रही हैं। उस हमले में आतंकियों ने पर्यटकों की धार्मिक पहचान पूछकर गोलीबारी की थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। कुलगाम की घटना में भी आतंकियों द्वारा पहले नाम और पहचान पूछने के बाद हत्या किए जाने से जांच एजेंसियां इसे उसी रणनीति का हिस्सा मान रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमलों का उद्देश्य घाटी में सांप्रदायिक तनाव फैलाना, बाहरी राज्यों के मजदूरों में भय पैदा करना और पर्यटन तथा आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना है।

सीमा पार से रची गई साजिश का शक

खुफिया एजेंसियों के अनुसार इस आतंकी हमले की साजिश सीमा पार पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी हैंडलरों ने तैयार की हो सकती है। जांच में मुख्य संदेह सज्जाद जट्ट उर्फ सैफुल्ला पर जताया जा रहा है, जिसे पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क का वरिष्ठ संचालक माना जाता है।

एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि स्थानीय स्तर पर आतंकियों को किसने मदद पहुंचाई और हमले की योजना किस तरह तैयार की गई।

CCTV फुटेज की हो रही जांच

बीते कुछ वर्षों में कश्मीर के ईंट-भट्ठों पर प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बाद पुलिस ने अधिकांश भट्ठों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे। जिस ईंट-भट्ठे पर यह हमला हुआ, वहां भी कैमरे लगे थे।

जांच अधिकारी सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं ताकि आतंकियों की गतिविधियों, उनके आने-जाने के रास्ते और इस्तेमाल किए गए वाहन की पहचान की जा सके। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में 20 से अधिक ईंट-भट्ठे संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों के मजदूर काम करते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर जोर

घटना के बाद पूरे कुलगाम और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। साथ ही प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा बढ़ाने, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने और ईंट-भट्ठों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कई विशेष टीमें गठित की गई हैं तथा तकनीकी और खुफिया माध्यमों से उनकी तलाश तेज कर दी गई है। वहीं छत्तीसगढ़ प्रशासन भी मृतकों की पहचान और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।

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Author: cg24x7

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