
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायिक सेवा से जुड़े सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) योजना के तहत प्रथम समयबद्ध वेतनमान स्वीकृत करने के आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव की ओर से जारी अलग-अलग आदेशों में लोअर ज्यूडिशियल सर्विस, हायर ज्यूडिशियल सर्विस तथा पूर्व न्यायिक अधिकारियों को उनकी सेवा अवधि और पात्रता के आधार पर प्रथम ACP का लाभ देने का निर्णय लिया गया है।
यह फैसला न्यायिक अधिकारियों के करियर विकास, समयबद्ध वित्तीय उन्नयन और सेवा हितों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि हाईकोर्ट ने न केवल वर्तमान में कार्यरत अधिकारियों को बल्कि पूर्व न्यायिक अधिकारियों को भी इस योजना के दायरे में शामिल किया है।
26 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अधिकारियों को मिला प्रथम ACP
हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश के अनुसार लोअर ज्यूडिशियल सर्विस के 26 अधिकारियों को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कैडर का प्रथम ACP स्केल स्वीकृत किया गया है। इनमें नेहा यति मिश्रा, दिल्ली सिंह बघेल, अपूर्वा डांगी, भास्कर मिश्रा, प्रवीन मिश्रा, प्रतीक्षा अग्रवाल, मयूरा गुप्ता, आस्था यादव, निधि शर्मा, तनु श्री गबेल, दीप्ति सिंह गौर, पल्लव रघुवंशी, भूपेश कुमार बसंत, चेतना ठाकुर, सीमा कंवर, जसविंदर कौर अजमानी मलिक, असलम खान, आनंद कुमार सिंह, शिव प्रकाश त्रिपाठी, रमेश कुमार चौहान, लोकेश कुमार, सुमन सिंह, रूपल अग्रवाल, गिरिश पाल सिंह, मंजुलता सिन्हा और बरखा रानी वर्मा शामिल हैं।
हायर ज्यूडिशियल सर्विस के 23 अधिकारियों को भी मिला लाभ
रजिस्ट्रार जनरल के आदेश में हायर ज्यूडिशियल सर्विस के 23 अधिकारियों को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) श्रेणी का प्रथम ACP स्केल स्वीकृत किया गया है। लाभ पाने वाले अधिकारियों में विजय कुमार होता, मंसूर अहमद, विनीता वार्नर, गिरिजा देवी मेरावी, खिलावन राम रिगरी, संघरत्ना भाटपहाड़ी, थॉमस एक्का, देवेंद्र नाथ भगत, प्रवीन कुमार प्रधान, मुकेश कुमार पात्रे, मोहनी कंवर, पल्लवी तिवारी, अश्वनी कुमार चतुर्वेदी, उर्मिला गुप्ता, बलराम साहू, लीलाधरसाय यादव, राकेश कुमार सोम, कमलेश कुमार जुर्री, जितेंद्र कुमार ठाकुर, जगदीश राम, मोनिका जायसवाल, अनिल कुमार बारा और पुष्पलता मार्कंडेय शामिल हैं।
1999 से 2011 तक की सेवा अवधि को भी मिली मान्यता
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में 27 न्यायिक अधिकारियों की वर्ष 1999 से 2011 के बीच की पूर्व सेवा अवधि को भी प्रथम ACP के लिए मान्य माना है। इसका लाभ उन अधिकारियों को मिलेगा जिनकी पूर्व सेवा अवधि समयबद्ध वेतनमान की पात्रता निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है।
इस सूची में कंवर लाल छारयानी, सुषमा सावंत, रजनीश श्रीवास्तव, राकेश बिहारी घोरे, सुमन एक्का, नीता यादव, अनीता डहरिया, अब्दुल वाहिद कुरैशी, सत्यभामा अजय दुबे, किरण चतुर्वेदी, शैलेश कुमार तिवारी, सरोज नंद दास, विनोद कुमार देवांगन, लीना अग्रवाल, पंकज कुमार जैन, पंकज कुमार सिन्हा, हरिश कुमार अवस्थी, श्रद्धा शुक्ला शर्मा, मधु तिवारी, गरिमा शर्मा सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं।
पूर्व न्यायिक अधिकारियों को भी मिलेगा प्रथम ACP
हाईकोर्ट ने सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके न्यायिक अधिकारियों को भी प्रथम ACP का लाभ देने का निर्णय लिया है। आदेश के अनुसार छह पूर्व अधिकारियों को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) का प्रथम ACP स्वीकृत किया गया है। इनमें अशोक कुमार पोद्दार, स्वर्गीय दिलेश्वर सिंह राठिया, छमेश्वर लाल पटेल, कृष्णकांत भारद्वाज, श्रीनारायण सिंह और प्रिसिला पॉल होरो शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त 23 पूर्व न्यायिक अधिकारियों को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) का प्रथम ACP प्रदान किया गया है। इनमें लोचन राम ठाकुर, रेशमलाल कुर्रे, स्वर्गीय कार्तिक राम, गणेश राम सांडे, स्वर्गीय रोहित सिंह तंवर, प्रभाकर गवाल, वीर सिंह सलाम, उमाशंकर मिश्रा, प्रदीप कुमार सिंह, जानताराम बंजारा, प्रमोद सिंह परास्ते, उमेश कुमार चौहान, स्वर्गीय मनीष कुमार नायडू, रजनी दुबे, दीपा कटारे, निर्मल मिंज, नंद कुमार सिंह ठाकुर, नूरदीन तिगाला, स्वर्गीय कांता मार्टिन, नीलम चंद सांखला, नरेश कुमार चंद्रवंशी सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं।
इन शर्तों के साथ मिलेगा ACP का लाभ
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ACP के तहत मिलने वाले वित्तीय एवं सेवा संबंधी लाभ संबंधित अधिकारी के विरुद्ध यदि वेतनवृद्धि रोकने जैसी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रभावी है, तो यह लाभ उसी के अधीन रहेगा। अर्थात जिन अधिकारियों पर ऐसी कार्रवाई लागू होगी, उनके मामले में ACP का लाभ संबंधित सेवा नियमों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
न्यायिक सेवा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न्यायिक अधिकारियों के करियर विकास और सेवा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। लंबे समय से पात्र अधिकारियों को समयबद्ध वित्तीय उन्नयन का इंतजार था, जिसे अब हाईकोर्ट के आदेश से स्पष्ट दिशा मिल गई है।
इस निर्णय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सेवारत अधिकारियों के साथ-साथ सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों और पूर्व सेवा अवधि को भी मान्यता दी गई है। इससे न्यायिक सेवा में समानता, पारदर्शिता और सेवा सम्मान के सिद्धांत को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
Author: cg24x7



