कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए बैंक खाते, पासबुक, एटीएम, चेकबुक और सिम; सुपेला से 10 और भिलाई नगर से 3 आरोपित पकड़े गए
भिलाई, 9 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के भिलाई में साइबर ठगी के पैसों को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करने वाले नेटवर्क का दुर्ग पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम के लेन-देन में मदद करने के आरोप में पुलिस ने 13 म्यूल खाताधारकों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में इन खातों के जरिए 10 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।
दुर्ग पुलिस की इस कार्रवाई में थाना सुपेला, थाना भिलाई नगर और एसीसीयू की संयुक्त टीम शामिल रही। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों ने कथित तौर पर महज कुछ हजार रुपये के कमीशन के लालच में अपने बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों को करने दिया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपितों ने सिर्फ बैंक खाता ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज और साधन भी दूसरे लोगों को उपलब्ध कराए थे।
2 हजार से 15 हजार रुपये तक कमीशन का लालच
पुलिस के अनुसार, आरोपितों ने साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले 2 हजार से 15 हजार रुपये तक कमीशन लेने का लालच स्वीकार किया। जांच में यह भी पता चला कि बैंक खातों के साथ उनकी पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड तक दूसरे लोगों को उपलब्ध कराए गए। इन बैंकिंग साधनों के जरिए अपराधियों को रकम के लेन-देन में आसानी होती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपितों को खातों और दस्तावेजों की आपूर्ति के लिए कौन लोग संपर्क करते थे और इस नेटवर्क में इनके अलावा और कितने लोग शामिल हैं।
सुपेला क्षेत्र से 10 खाताधारक गिरफ्तार
दुर्ग पुलिस के मुताबिक म्यूल अकाउंट के इस नेटवर्क में सुपेला थाना क्षेत्र के 10 खाताधारक शामिल पाए गए। पुलिस ने अनिरुद्ध बेसरा (26), डिकेश साहू उर्फ गोल्डी (23), संदीप खन्ना (24), दिलबाग सिंह (30), शिव कुमार (32), सुमीत कुमार (26), रेहान कुरैशी (20), ललीत कुमार (24), भोज कुमार देवांगन (24) और धनेश्वर यादव (21) को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ सुपेला थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत कार्रवाई की है।
भिलाई नगर से तीन आरोपित पकड़े गए
इसी मामले में भिलाई नगर थाना क्षेत्र से भी तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने अमित कुमार (43), गोपी सोनी (21) और प्रीति उपाध्याय को गिरफ्तार किया है। इन आरोपितों के खिलाफ भी संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब इनके बैंक खातों में हुए लेन-देन और साइबर अपराधियों से इनके संपर्कों की विस्तृत जांच कर रही है।
दो बैंकों के खातों में मिला संदिग्ध लेन-देन
जांच के दौरान पुलिस को अलग-अलग बैंकों से जुड़े खातों के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। सुपेला थाना क्षेत्र में बंधन बैंक से संबंधित 10 खाताधारकों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, भिलाई नगर थाना क्षेत्र में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े तीन खातों के इस्तेमाल का पता चला है।
इन खातों में हुए लेन-देन की जांच के दौरान पुलिस को 10 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिली है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह रकम किन साइबर ठगी के मामलों से संबंधित है और इसे आगे किन-किन खातों में भेजा गया।
एजेंटों के जरिए पहुंचाए जाते थे बैंकिंग दस्तावेज
जांच में साइबर ठगी के नेटवर्क की एक और महत्वपूर्ण कड़ी सामने आई है। पुलिस को जानकारी मिली है कि बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और बैंकिंग साधन कथित तौर पर एजेंटों के माध्यम से साइबर अपराधियों तक पहुंचाए जाते थे। इससे आशंका है कि खाताधारकों और साइबर अपराधियों के बीच सीधे संपर्क के बजाय बीच में कुछ एजेंट या बिचौलिये काम कर रहे थे। यही लोग बैंक खातों, दस्तावेजों और अन्य बैंकिंग साधनों की व्यवस्था कराने में भूमिका निभाते थे। पुलिस अब ऐसे एजेंटों की पहचान करने में जुटी है।
नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश
13 आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब साइबर ठगी के इस नेटवर्क की अगली कड़ियों की ओर बढ़ गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार म्यूल खाताधारकों के बैंक खातों में रकम किसने जमा कराई, रकम आगे किन खातों में ट्रांसफर हुई और इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य आरोपी कौन हैं। इसके साथ ही पुलिस गिरफ्तार आरोपितों के मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड, लेन-देन और संपर्कों की भी जांच कर सकती है, ताकि साइबर ठगी की रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाया जा सके।
खाते को किराए पर देना भी बन सकता है मुसीबत
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस लगातार लोगों को अपने बैंक खाते किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए नहीं देने की सलाह देती रही है। थोड़े से कमीशन या आर्थिक लालच में बैंक खाता उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति खुद को यह कहकर अलग नहीं कर सकता कि उसे रकम के स्रोत की जानकारी नहीं थी।
म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल होने वाला बैंक खाता साइबर ठगी की रकम के ट्रेल में महत्वपूर्ण कड़ी बन जाता है। ऐसे में खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। दुर्ग पुलिस की यह कार्रवाई इसी खतरे की ओर इशारा करती है कि कुछ हजार रुपये के लालच में बैंक खाता उपलब्ध कराना भविष्य में गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
साइबर अपराधियों के लिए खाते उपलब्ध कराने वालों पर शिकंजा
भिलाई में सामने आया यह मामला बताता है कि साइबर ठगी का नेटवर्क केवल ठगी करने वाले मुख्य आरोपितों तक सीमित नहीं रहता। ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग भी इस पूरे तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी बन जाते हैं। दुर्ग पुलिस की कार्रवाई में 13 म्यूल खाताधारकों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का फोकस उन लोगों तक पहुंचने पर है, जो इन खातों का इस्तेमाल कर रहे थे और एजेंटों के माध्यम से बैंकिंग दस्तावेज तथा अन्य साधन उपलब्ध करा रहे थे।
10 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन और 13 गिरफ्तारियों ने भिलाई में साइबर ठगी के पैसों के पीछे चल रहे नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण परत खोल दी है। अब पुलिस की जांच इस नेटवर्क के मुख्य संचालकों और अन्य सहयोगियों तक पहुंचने पर टिकी है।
क्या है म्यूल अकाउंट और कैसे होता है इस्तेमाल?
साइबर अपराध की दुनिया में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अपराध से हासिल रकम को प्राप्त करने, दूसरे खातों में भेजने या उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता है।
पुलिस की जांच के अनुसार, साइबर ठगी से हासिल रकम पहले इन खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद रकम को दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस तरह कई स्तरों पर रकम का लेन-देन होने से साइबर अपराधियों तक पहुंचना और ठगी की रकम के मूल स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। दुर्ग पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपितों के खातों का कथित तौर पर इसी तरह इस्तेमाल किया गया।
Author: cg24x7




