कबीरधाम में नकली नोटों खपाने वाले कथित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया: ₹12.50 लाख की नकली करेंसी के साथ 3 गिरफ्तार

उधारी के ₹3.75 लाख लौटाने के बहाने शिकायतकर्ता को थमाए ₹4.50 लाख के नकली नोट; किराए के कमरे में चल रहा था जाली नोट छापने का कारोबार, प्रिंटर और टाटा पंच EV भी जब्त

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में नकली नोट तैयार कर उन्हें असली बताकर बाजार में खपाने वाले कथित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बोडला थाना क्षेत्र की चौकी पोंडी पुलिस और साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और प्रकरण में जब्त सामग्री को मिलाकर कुल ₹12.50 लाख की नकली करेंसी बरामद की है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी कलर प्रिंटर की मदद से ₹500 के नकली नोट तैयार कर रहे थे। जाली नोटों को बाजार में चलाने की योजना के तहत आरोपियों ने एक व्यक्ति को उसकी उधारी की रकम लौटाने के नाम पर भी नकली नोट थमा दिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता ने नोटों की जांच की और उन्हें नकली पाया।

पुलिस ने नकली नोटों के अलावा कलर प्रिंटर/फोटोकॉपी मशीन, मोबाइल फोन और टाटा पंच EV कार भी जब्त की है।

उधारी के ₹3.75 लाख लौटाने के नाम पर सामने आया पूरा मामला

पुलिस के मुताबिक, मामले की शुरुआत ग्राम कमराखोल निवासी दिनेश कुमार यादव की शिकायत से हुई। दिनेश ने अप्रैल 2026 में घुरवा राम को ₹3.75 लाख उधार दिए थे।

जब दिनेश ने अपनी रकम वापस मांगी तो घुरवा राम ने पैसे लौटाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद 9 अगस्त की रात ग्राम पोंडी स्थित शराब भट्टी के पास उसे रकम लेने के लिए बुलाया गया।

दिनेश अपने परिचित कैलाश चंद्रवंशी के साथ बताए गए स्थान पर पहुंचा। वहां सतीश कुमार और उसका एक साथी काले बैग में रकम लेकर पहुंचे। रकम मिलने के बाद जब नोटों की जांच की गई तो उनकी वास्तविकता पर संदेह हुआ।

बैग खोलकर देखने पर उसमें ₹500 के नोटों के रूप में ₹4.50 लाख की नकली करेंसी मिली। इसके बाद शिकायतकर्ता ने तत्काल पुलिस को मामले की जानकारी दी।

पूछताछ में खुला नकली नोट छापने का नेटवर्क

शिकायत मिलने के बाद चौकी पोंडी पुलिस और साइबर टीम ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने सतीश कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पूछताछ के दौरान पुलिस के अनुसार सतीश ने रामप्रसाद उर्फ रमऊ और घुरवा राम के साथ मिलकर नकली नोट तैयार करने और उन्हें बाजार में चलाने की बात बताई।

सतीश से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने दोनों अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि तीनों आरोपी कथित तौर पर जुलाई 2026 से मिलकर नकली नोट तैयार करने का काम कर रहे थे।

नए बस स्टैंड के पास किराए के कमरे में चल रहा था जाली नोट छापने का खेल

पुलिस की जांच में नकली नोट तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे स्थान का भी पता चला। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने नए बस स्टैंड के पास एक कमरा किराए पर लिया था।

इसी कमरे में कलर प्रिंटर की मदद से नकली नोट तैयार किए जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने 13 जुलाई 2026 को कलर प्रिंटर खरीदा, जिसके बाद जाली करेंसी तैयार करने का सिलसिला शुरू हुआ।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इस दौरान कितनी मात्रा में नकली नोट तैयार किए और इनमें से कितने नोट बाजार में खपाए जा चुके हैं।

ऐसे बंटा मिला ₹12.50 लाख का नकली नोट

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर नकली करेंसी और अन्य सामान बरामद किया। जब्ती का विवरण इस प्रकार है—

आरोपी/स्रोत बरामद नकली करेंसी
सतीश कुमार ₹2 लाख
रामप्रसाद उर्फ रमऊ ₹4.50 लाख
घुरवा राम ₹1.50 लाख
शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस को सौंपे गए नोट ₹4.50 लाख
कुल ₹12.50 लाख

रामप्रसाद उर्फ रमऊ के कब्जे से नकली नोटों के अलावा एक मोबाइल फोन, प्रिंटर/फोटोकॉपी मशीन और टाटा पंच EV कार भी जब्त की गई है।

इस तरह मामले में कुल ₹12.50 लाख की नकली करेंसी जब्त होना सामने आया है।

नकली नोट कहां-कहां खपाए गए? अब इस दिशा में जांच

तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब अगले चरण में पहुंच गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितनी मात्रा में नकली नोट छापे, कितने नोट बाजार में चलाए और किन-किन स्थानों पर इनका इस्तेमाल किया गया।

इसके अलावा पुलिस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकली नोट तैयार करने के लिए आरोपियों ने आवश्यक सामग्री और तकनीकी संसाधन कहां से जुटाए तथा तैयार नोटों को असली करेंसी के रूप में चलाने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया।

BNS की कई धाराओं में दर्ज हुआ अपराध

पुलिस ने मामले में चौकी पोंडी, थाना बोडला में अपराध क्रमांक 101/26 दर्ज किया है।

प्रकरण में शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 179 और 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया। जांच आगे बढ़ने पर धारा 178, 180 और 181 BNS भी जोड़ी गई हैं।

पुलिस ने नकली नोटों, प्रिंटर, मोबाइल और वाहन सहित अन्य सामग्री को विधिवत जब्त कर लिया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

पुलिस अब पूरे नेटवर्क की तलाश में

तीनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि नकली नोट तैयार करने के इस कथित कारोबार में और कितने लोग जुड़े हैं।

जांच के प्रमुख बिंदुओं में—

  • अब तक छापे गए नकली नोटों की कुल मात्रा,
  • बाजार में चलाए गए नोटों की संख्या,
  • नकली नोट खपाने वाले संभावित लोग,
  • प्रिंटर और अन्य उपकरणों की खरीद,
  • नकली करेंसी के वितरण का नेटवर्क और
  • गिरोह से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों

की जानकारी जुटाना शामिल है।

एसपी के निर्देशन में पुलिस और साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कबीरधाम जितेंद्र कुमार यादव के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार एवं अमित पटेल के मार्गदर्शन और एसडीओपी बोडला अखिलेश कौशिक के पर्यवेक्षण में चौकी पोंडी पुलिस एवं साइबर टीम ने की।

कार्रवाई में साइबर थाना कबीरधाम के निरीक्षक उमाशंकर राठौर, चौकी पोंडी प्रभारी निरीक्षक लक्ष्मीनारायण साव, सउनि चंद्रकांत तिवारी, आशीष सिंह, संजीव तिवारी, प्रधान आरक्षक चुम्मन साहू, अभिनव तिवारी, ओम प्रकाश पटेल, खूबी साहू सहित आरक्षक संदीप शुक्ला, गज्जू ठाकुर, पूरनदास डाहिरे, देवेंद्र चतुर्वेदी, सोमेंद्र शर्मा और सतखोजन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

एक नजर में पूरा मामला

कहां: कबीरधाम, बोडला थाना क्षेत्र
कार्रवाई: चौकी पोंडी और साइबर टीम
गिरफ्तार आरोपी: 3
बरामद नकली करेंसी: ₹12.50 लाख
नकली नोट: ₹500 के नोट
प्रिंटर: कलर प्रिंटर/फोटोकॉपी मशीन
अन्य जब्ती: मोबाइल फोन और टाटा पंच EV
मामले का खुलासा: ₹3.75 लाख की उधारी लौटाने के दौरान दिए गए नकली नोटों से
मुख्य जांच: नकली नोटों के स्रोत, छपाई और बाजार में खपाने वाले नेटवर्क की तलाश

पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब नकली करेंसी का इस्तेमाल आम लोगों और कारोबारियों के लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ वित्तीय सुरक्षा की चुनौती भी बन सकता है। अब जांच का फोकस इस कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क और बाजार में पहले से खपाई जा चुकी नकली करेंसी का पता लगाने पर है।

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Author: cg24x7

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