अंबिकापुर में आवारा मेशियों से पीड़ित किसानों ने किया अनोखा सत्याग्रह: 13 किमी मवेशी हांककर कलेक्ट्रेट में छोड़े, पहुंचे ग्रामीण, कहा – समाधान होने तक यहीं रहेंगे

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में किसानों ने बेसहारा मवेशियों की समस्या के खिलाफ ऐसा विरोध किया, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। खेतों में फसल बर्बाद कर रहे आवारा मवेशियों से परेशान परसा और देवगढ़ गांव के किसान 50 से अधिक मवेशियों को करीब 13 किलोमीटर पैदल हांकते हुए सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए।

गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक गाय, बैल और बछड़ों का झुंड पहुंचा तो अधिकारी-कर्मचारी भी हैरान रह गए। किसानों ने मवेशियों को कलेक्टर चैंबर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने बैठा दिया और खुद भी वहीं धरने पर बैठ गए। किसानों का कहना है कि जब तक बेसहारा मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, उनका विरोध जारी रहेगा।

खेतों से कलेक्ट्रेट तक निकला किसानों का काफिला

परसा और देवगढ़ के ग्रामीणों का कहना है कि अंबिकापुर शहर में घूमने वाले बेसहारा मवेशियों के कारण आसपास के गांवों में किसानों की फसलें लगातार बर्बाद हो रही हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने इस बार अलग तरीके से विरोध करने का फैसला किया।

किसानों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में घूम रहे 50 से अधिक मवेशियों को इकट्ठा किया और करीब 13 किलोमीटर तक पैदल हांकते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गए।

कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचने के बाद किसानों ने मवेशियों को वहीं बैठा दिया। इसके बाद ग्रामीण भी मवेशियों के साथ धरने पर बैठ गए। कुछ ही देर में कलेक्ट्रेट परिसर का नजारा पूरी तरह बदल गया।

50 एकड़ फसल बर्बाद होने का दावा

किसानों का आरोप है कि अकेले परसा गांव में बेसहारा मवेशियों ने करीब 50 एकड़ फसल बर्बाद कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने इन मवेशियों के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि इनमें से अधिकांश किसी ग्रामीण के नहीं हैं।

किसानों का आरोप है कि नगर निगम क्षेत्र में घूमने वाले बेसहारा मवेशियों को काऊ कैचर के जरिए पकड़कर आसपास के गांवों में छोड़ दिया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक निगम के पास मवेशियों को रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें शहर से बाहर छोड़ दिया जाता है और इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

सरपंचों की अगुवाई में कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई परसा के सरपंच मनोज सिंह और देवगढ़ के सरपंच सन्यासी कुमार कर रहे थे। किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि समस्या का समाधान अब केवल आश्वासन से नहीं होगा।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मेहनत और लागत से तैयार फसलें मवेशियों के झुंड कुछ ही घंटों में बर्बाद कर देते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और खेती करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

‘गांव-गांव में यही कहानी’, किसानों ने गिनाए कई इलाके

किसानों के मुताबिक यह समस्या सिर्फ परसा और देवगढ़ तक सीमित नहीं है। अंबिकापुर से लगे रजपुरी, करमहा, हसूली, भकुरा, नवापारा, खैरबार, श्रीगढ़ और नवागढ़ समेत कई गांवों के किसान भी बेसहारा मवेशियों से परेशान हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि शहर से लगे गांवों में मवेशियों को छोड़ देने की समस्या लगातार बढ़ रही है। एक ओर खेतों में फसलें बर्बाद हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी मवेशियों का जमावड़ा दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।

किसानों ने पशुपालकों की लापरवाही पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई पशुपालक अपने मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं, जिससे सड़क पर यातायात प्रभावित होता है और किसानों की फसलें भी खतरे में पड़ती हैं।

कांजी हाउस की क्षमता कम, स्थायी व्यवस्था का अभाव

ग्रामीणों के मुताबिक अंबिकापुर नगर निगम के पास कांजी हाउस तो है, लेकिन उसकी क्षमता सीमित है। शहर में बड़ी संख्या में बेसहारा मवेशी होने के कारण सभी को वहां रखना संभव नहीं है।

किसानों का कहना है कि इसके अलावा कोई प्रभावी और स्थायी व्यवस्था विकसित नहीं की गई है। जिले में सीतापुर के सोनतराई में गोधाम की स्वीकृति जरूर मिली है, लेकिन उसका संचालन अभी शुरू नहीं हुआ है।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पहले संचालित किए जा रहे कई गौठान अब बंद हो चुके हैं। ऐसे में बेसहारा मवेशियों की समस्या का बोझ सीधे गांवों और किसानों पर पड़ रहा है।

किसानों की दो टूक- व्यवस्था करो, वरना रोज लाएंगे मवेशी

कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठे किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी मांग स्पष्ट कर दी है। ग्रामीणों की मांग है कि बेसहारा मवेशियों के लिए तत्काल पर्याप्त और स्थायी व्यवस्था की जाए।

साथ ही ऐसे पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है जो अपने मवेशियों को सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर खुला छोड़ देते हैं।

किसानों ने प्रशासन को दो टूक संदेश देते हुए कहा कि अब उन्हें यह तय करना होगा कि बेसहारा मवेशियों को रखने की स्थायी व्यवस्था की जाए या फिर किसानों द्वारा कलेक्ट्रेट में लाए जाने वाले मवेशियों को रखने की जिम्मेदारी प्रशासन उठाए।

कलेक्ट्रेट के बाहर बैठा मवेशियों का झुंड बना प्रशासन के लिए सवाल

अंबिकापुर कलेक्ट्रेट के बाहर बैठा मवेशियों का झुंड सिर्फ किसानों का विरोध नहीं, बल्कि शहर और गांव के बीच बढ़ती बेसहारा मवेशियों की समस्या की तस्वीर भी बन गया। किसान जिस समस्या से महीनों से जूझने का दावा कर रहे हैं, उसे वे इस बार सीधे प्रशासन के दरवाजे तक लेकर पहुंचे हैं।

फिलहाल किसानों की कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी समस्या पर ठोस निर्णय नहीं होता, वे धरना खत्म नहीं करेंगे।

अब देखना होगा कि किसानों के इस अनोखे सत्याग्रह के बाद प्रशासन और नगर निगम बेसहारा मवेशियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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Author: cg24x7

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