रायपुर। सरकारी दफ्तरों में किसी काम के लिए बार-बार चक्कर लगाने वाले नागरिकों के लिए यह खबर अहम है। अब लोकसेवा गारंटी के तहत निर्धारित समय-सीमा में सरकारी सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों और संबंधित विभागों पर कार्रवाई की जा सकती है। सेवा देने में अनावश्यक देरी को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।
मंगलवार को आयोजित समय-सीमा की बैठक में रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने सभी विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि लोकसेवा गारंटी अधिनियम का पालन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
समय पर सेवा देना होगा अनिवार्य
बैठक में कलेक्टर ने विभागवार लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि लोकसेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाओं के आवेदनों का समयबद्ध निराकरण किया जाए। किसी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित रखने या निर्धारित समय-सीमा के बाद सेवा उपलब्ध कराने की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों को तय समय में परिणाम मिले और उन्हें छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
देरी पर जुर्माने का भी प्रावधान
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने अधिकारियों को चेताया कि निर्धारित समय-सीमा में सेवा उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित विभाग के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। लापरवाही की स्थिति में जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इससे विभागीय अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ाने और सरकारी सेवाओं की डिलीवरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का संदेश गया है।
नागरिकों के अधिकार से जुड़ा है लोकसेवा गारंटी कानून
लोकसेवा गारंटी व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराना है। इसके तहत अलग-अलग विभागों की सेवाओं के लिए समय-सीमा तय होती है। यदि किसी सेवा में अनावश्यक देरी होती है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय किए जाने का प्रावधान है।
इस व्यवस्था का मकसद सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित करना है।
लंबित आवेदनों पर भी रहेगी नजर
समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और प्राथमिकता के आधार पर उनका निराकरण किया जाए। खासतौर पर वे प्रकरण, जिनमें नागरिकों को किसी प्रमाण-पत्र, अनुमति, पंजीयन या अन्य शासकीय सेवा की आवश्यकता है, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाए।
प्रशासन के इस रुख से साफ है कि अब सरकारी सेवा देने में देरी को सामान्य प्रक्रिया मानकर टालना अधिकारियों के लिए आसान नहीं होगा।
आम लोगों को मिलेगी राहत
लोकसेवा गारंटी अधिनियम के प्रभावी पालन से सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलने की उम्मीद है। सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन करने के बाद निर्धारित समय में काम पूरा होने से लोगों का समय और श्रम दोनों बचेंगे। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही तय होने से सरकारी दफ्तरों में कामकाज की गति बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कलेक्टर के निर्देश के बाद अब विभागों के सामने चुनौती यह है कि वे लंबित आवेदनों का समयबद्ध निराकरण करें और भविष्य में लोकसेवा गारंटी के तहत आने वाले किसी भी आवेदन में अनावश्यक देरी न होने दें। प्रशासन ने संकेत दिया है कि नागरिक सेवाओं में लापरवाही को अब गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
Author: cg24x7




