वंदे मातरम’ की 150 वर्षों की गौरवगाथा से रूबरू हो रहे रायपुरवासी, टाउन हॉल में इतिहास के साथ AI का भी आकर्षण

छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों और जनजातीय नायकों पर क्विज ने बढ़ाया विद्यार्थियों का उत्साह, मंच पर जवाब देकर बच्चों ने दिखाया आत्मविश्वास; 21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी

रायपुर, 18 अगस्त 2026। राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक कचहरी चौक स्थित टाउन हॉल में इन दिनों इतिहास, राष्ट्रभक्ति, संस्कृति, विकास और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। जनसंपर्क विभाग की ओर से आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी में ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा से लेकर छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जनजातीय नायकों और प्रदेश की विकास यात्रा को तस्वीरों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

प्रदर्शनी के चौथे दिन विद्यार्थियों और आम नागरिकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। खासकर ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी और AI कैमरा बच्चों तथा युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मंच पर विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब दिए और इस दौरान न केवल उनके ज्ञान की परीक्षा हुई, बल्कि सार्वजनिक रूप से बोलने और अपनी बात रखने का आत्मविश्वास भी बढ़ा।

किताबों से निकलकर तस्वीरों और क्विज तक पहुंचा इतिहास

इतिहास को आमतौर पर किताबों और पाठ्यक्रमों के जरिए समझने वाले विद्यार्थियों के लिए यह प्रदर्शनी एक अलग अनुभव लेकर आई है। यहां स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं और महान सेनानियों को केवल पढ़ने के बजाय तस्वीरों और रोचक गतिविधियों के माध्यम से जानने का अवसर मिल रहा है।

प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और जनजातीय नायकों के जीवन, संघर्ष और योगदान को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। विद्यार्थियों के लिए आयोजित प्रश्नोत्तरी ने इस जानकारी को और रोचक बना दिया।

बच्चों ने बताया कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के बारे में स्कूल की किताबों में पढ़ा है, लेकिन अपने प्रदेश के उन नायकों के बारे में क्विज के जरिए जानना उनके लिए नया और रोमांचक अनुभव रहा, जिन्होंने देश की आजादी और सामाजिक जागरण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्लू और अक्षरों से पहचान रहे थे वीर सेनानियों को

प्रदर्शनी में कंप्यूटर आधारित विशेष प्रश्नोत्तरी तैयार की गई है। इसमें विद्यार्थियों को तीन टीमों में बांटकर छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पहचानने की चुनौती दी गई।

खेल का तरीका भी खास था। प्रतिभागियों को किसी सेनानी के नाम का एक क्लू दिया जाता था। इसके बाद टीमों को बारी-बारी से नाम का एक-एक अक्षर बताने का अवसर मिलता था। सही अक्षर सामने आते जाने के साथ सेनानी का नाम धीरे-धीरे स्पष्ट होता जाता था।

जो टीम सबसे कम प्रयास में ज्यादा सही अक्षर बताकर सेनानी का नाम पहचान लेती, उसे विजेता घोषित किया जाता। इस दौरान विद्यार्थियों के बीच उत्सुकता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। सही जवाब मिलते ही पूरा परिसर तालियों से गूंज उठता।

इस तरह क्विज ने इतिहास को याद करने की प्रक्रिया को एक खेल में बदल दिया, जिससे विद्यार्थियों की रुचि भी बनी रही और वे नई जानकारियां भी सीखते गए।

मंच पर जवाब देने से बढ़ा बच्चों का आत्मविश्वास

प्रश्नोत्तरी की सबसे खास बात यह रही कि विद्यार्थियों को केवल अपनी सीट पर बैठकर जवाब देने का मौका नहीं मिला, बल्कि उन्हें मंच पर बुलाकर सवालों के जवाब देने के लिए प्रेरित किया गया।

कई विद्यार्थियों के लिए मंच पर आकर बड़ी संख्या में लोगों के सामने बोलना पहली बार का अनुभव था। प्रतिभागियों ने बताया कि शुरुआत में थोड़ी झिझक जरूर हुई, लेकिन जैसे-जैसे सवालों के जवाब देते गए, आत्मविश्वास बढ़ता गया।

विद्यार्थियों के मुताबिक, क्विज के दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ के ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों और जनजातीय नायकों के बारे में जानकारी मिली, जिनके बारे में वे पहले बहुत कम जानते थे। उनका कहना था कि इस तरह इतिहास को खेल और प्रतियोगिता के रूप में समझना ज्यादा आसान और यादगार लगा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच इतिहास और पर्यटन के सवाल

टाउन हॉल में केवल छायाचित्र प्रदर्शनी ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान लोक कला और लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां आगंतुकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

इन प्रस्तुतियों के बीच उद्घोषक द्वारा छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति, परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम और पर्यटन से जुड़े सवाल भी पूछे जा रहे हैं।

सही उत्तर देने वाले दर्शकों और प्रतिभागियों का तालियों से उत्साहवर्धन किया जाता है। इससे कार्यक्रम में मौजूद लोग केवल दर्शक बनकर नहीं रहते, बल्कि सक्रिय रूप से आयोजन का हिस्सा बन जाते हैं।

एक ओर मंच पर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक दिखाई देती है तो दूसरी ओर दर्शक अपने ज्ञान को परखते नजर आते हैं। इस संयोजन ने प्रदर्शनी के माहौल को जीवंत और सहभागितापूर्ण बना दिया है।

AI कैमरा बना युवाओं और बच्चों का खास आकर्षण

प्रदर्शनी में इतिहास और संस्कृति के साथ आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग किया गया है। यहां AI तकनीक से लैस स्वचालित कैमरा बच्चों और युवाओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

इस कैमरे के माध्यम से आगंतुक अपनी तस्वीर खिंचवा सकते हैं और उसे छत्तीसगढ़ के अलग-अलग पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि में देख सकते हैं। AI तकनीक के जरिए तैयार तस्वीर इतनी स्वाभाविक नजर आती है कि ऐसा लगता है मानो संबंधित व्यक्ति वास्तव में उस पर्यटन स्थल पर मौजूद हो।

इसके अलावा आगंतुकों के लिए अलग-अलग पारंपरिक वेशभूषाओं के साथ फोटो खिंचवाने की सुविधा भी उपलब्ध है।

आधुनिक तकनीक के इस प्रयोग ने बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित किया है। इसके जरिए छत्तीसगढ़ की पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को नई तकनीक के साथ जोड़ने का प्रयास प्रदर्शनी को खास बना रहा है।

‘अगर प्रदर्शनी में नहीं आते तो बहुत कुछ सीखने से रह जाते’

प्रदर्शनी में पहुंचे विद्यार्थियों ने इसे अपने लिए सीखने का अलग अनुभव बताया। एक छात्र ने कहा कि मंच पर जाकर जवाब देने से पहले थोड़ी झिझक थी, लेकिन क्विज में भाग लेने के बाद आत्मविश्वास बढ़ा।

एक छात्रा ने कहा कि प्रदर्शनी के माध्यम से उसे छत्तीसगढ़ के उन वीर सेनानियों और जनजातीय नायकों के बारे में जानने का अवसर मिला, जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। विद्यार्थियों के अनुसार, यदि वे इस प्रदर्शनी में नहीं आते तो प्रदेश के इतिहास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों से परिचित नहीं हो पाते।

बच्चों का यह भी कहना था कि प्रश्नोत्तरी के कारण इतिहास पढ़ना और उसे याद रखना ज्यादा आसान लगा।

शिक्षकों ने कहा- इतिहास को रुचिकर बनाने का प्रभावी तरीका

विद्यार्थियों के साथ पहुंचे शिक्षकों ने भी आयोजन की सराहना की। उनका कहना है कि इतिहास को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय यदि तस्वीरों, प्रश्नोत्तरी, सांस्कृतिक गतिविधियों और आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए तो विद्यार्थी उसमें अधिक रुचि लेते हैं।

शिक्षकों के मुताबिक, मंच पर आकर सवालों का जवाब देने से बच्चों की अभिव्यक्ति क्षमता, आत्मविश्वास और सहभागिता भी बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपने प्रदेश की मिट्टी, इतिहास, संस्कृति और विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

‘वंदे मातरम’ की 150 साल की यात्रा बनी प्रदर्शनी का केंद्र

प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा है। तस्वीरों और उपलब्ध सामग्री के माध्यम से आगंतुकों को बताया जा रहा है कि किस तरह ‘वंदे मातरम’ ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में राष्ट्रभावना और जनजागरण को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस ऐतिहासिक यात्रा को छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भों के साथ भी जोड़ा गया है, जिससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय आंदोलन और प्रदेश की स्थानीय भूमिका को एक साथ समझने का अवसर मिल रहा है।

महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास से जनआंदोलनों तक

प्रदर्शनी में महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास और प्रदेश में हुए विभिन्न सामाजिक एवं राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े प्रसंग भी शामिल किए गए हैं।

दुर्लभ छायाचित्रों और ऐतिहासिक सामग्री के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ में हुए जनजागरण तथा स्थानीय सेनानियों के योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया है।

जनजातीय नायकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संघर्ष को विशेष स्थान दिए जाने से विद्यार्थियों को प्रदेश के इतिहास के उन पहलुओं को जानने का अवसर मिल रहा है, जो सामान्य तौर पर पाठ्यक्रम में सीमित रूप से ही सामने आते हैं।

स्वतंत्रता की गौरवगाथा के साथ दिख रही छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा

प्रदर्शनी केवल अतीत की कहानी नहीं बताती, बल्कि वर्तमान छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को भी तस्वीरों के माध्यम से सामने रखती है।

इसमें सुशासन, शिक्षा, आवास, कृषि, महिला सशक्तिकरण, अधोसंरचना, रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है।

इस तरह प्रदर्शनी में एक तरफ आजादी के संघर्ष और बलिदान की गाथा है तो दूसरी तरफ स्वतंत्रता के बाद प्रदेश के विकास और वर्तमान उपलब्धियों की तस्वीर दिखाई देती है।

आगंतुकों को ‘जनमन’ और पुस्तिकाएं भी दी जा रहीं

प्रदर्शनी स्थल पर जनसंपर्क विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आगंतुकों को प्रदर्शित सामग्री के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं। विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को स्वतंत्रता संग्राम, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन तथा शासन की योजनाओं से संबंधित जानकारी भी दी जा रही है।

आगंतुकों को राज्य की विकास यात्रा पर आधारित ‘जनमन’ पत्रिका और विभिन्न पुस्तिकाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे प्रदर्शनी देखने के बाद भी लोग छत्तीसगढ़ से जुड़ी जानकारियां अपने साथ ले जा सकते हैं।

21 अगस्त तक रोजाना देख सकेंगे आम नागरिक

कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में चल रही यह सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी।

समय : सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक।

जो लोग छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम, वीर सेनानियों और जनजातीय नायकों के योगदान को करीब से जानना चाहते हैं, वे प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकते हैं। वहीं बच्चों और युवाओं के लिए क्विज, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और AI कैमरा इसे और अधिक आकर्षक बना रहे हैं।

इतिहास, विरासत और तकनीक का संगम

रायपुर के टाउन हॉल में लगी यह प्रदर्शनी इसलिए भी खास है क्योंकि यहां ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्ष की यात्रा, स्वतंत्रता संग्राम, छत्तीसगढ़ के वीर नायक, लोक संस्कृति, पर्यटन, विकास यात्रा और AI तकनीक एक ही मंच पर दिखाई दे रहे हैं।

यानी यह आयोजन केवल तस्वीरें देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को इतिहास से जोड़ने, युवाओं में जिज्ञासा पैदा करने और आम नागरिकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत से परिचित कराने का एक जीवंत प्रयास बन गया है।

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Author: cg24x7

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