न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की चर्चा, ‘एक डील के जरिए ट्रंप से निपटने की तैयारी’

अमेरिकी अखबार का दावा- पिछले एक साल में भारत ने दुनिया भर में रणनीतिक और आर्थिक साझेदारियों का नेटवर्क किया मजबूत

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति और दुनिया के विभिन्न देशों के साथ बढ़ती रणनीतिक एवं आर्थिक साझेदारियों पर अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स के एक हालिया विश्लेषण ने ध्यान खींचा है। विश्लेषण का शीर्षक है— “Modi Is Hedging Against Trump, One Deal at a Time” यानी मोदी एक-एक समझौते के जरिए ट्रंप के जोखिम से बचाव की रणनीति अपना रहे हैं।

रिपोर्ट में भारत द्वारा पिछले एक साल में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपनी साझेदारियों को मजबूत करने की कोशिशों का विश्लेषण किया गया है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत ने बदलते वैश्विक माहौल और अमेरिका की नीतियों में अनिश्चितता के बीच अपने विकल्पों को व्यापक बनाने की दिशा में काम किया है।

‘एक डील, एक साझेदारी’ की रणनीति पर जोर

न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति को एक ऐसी रणनीति के रूप में देखा गया है, जिसमें भारत किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय विभिन्न देशों के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है।

रिपोर्ट का केंद्रीय तर्क यह है कि भारत ने पिछले एक साल के दौरान दुनिया भर में रणनीतिक और आर्थिक समझौतों का नेटवर्क विकसित करने पर ध्यान दिया है। इसके जरिए भारत वैश्विक व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में अपने विकल्प बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका के साथ संबंधों के बीच बढ़ाए दूसरे विकल्प

विश्लेषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से पैदा होने वाली अनिश्चितता को भी भारत की रणनीति के संदर्भ में देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अमेरिका के साथ संबंधों को महत्व देता है, लेकिन साथ ही दुनिया के दूसरे महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है।

इसे विदेश नीति के स्तर पर जोखिम को कम करने और रणनीतिक विकल्प खुले रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

भारत लंबे समय से ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ और विभिन्न शक्ति केंद्रों के साथ संतुलित संबंधों की नीति पर जोर देता रहा है। ऐसे में अमेरिका के साथ साझेदारी के समानांतर अन्य देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों का विस्तार भारत की व्यापक विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

आर्थिक साझेदारियों का भी विस्तार

न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण में केवल कूटनीतिक रिश्तों की बात नहीं है, बल्कि आर्थिक साझेदारियों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और निवेश के बदलते माहौल के बीच भारत विभिन्न देशों के साथ आर्थिक संबंधों को विस्तार देने की कोशिश कर रहा है।

व्यापार समझौते, निवेश, ऊर्जा सहयोग और तकनीकी साझेदारी जैसे क्षेत्र इस रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसका उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नए बाजार और निवेश के अवसर तैयार करने के साथ वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को मजबूत करना भी है।

बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की भूमिका

दुनिया इस समय बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा, यूरोप की रणनीतिक प्राथमिकताएं, पश्चिम एशिया में बदलते समीकरण और रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभावों के बीच भारत ने कई शक्ति केंद्रों के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं।

भारत की यही नीति उसे कई देशों के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बनाती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने क्वाड, जी20, ब्रिक्स, एससीओ और अन्य बहुपक्षीय मंचों के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों पर भी समानांतर रूप से काम किया है।

‘ग्लोब-ट्रॉटिंग’ पीएम के रूप में विदेश नीति पर नजर

न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण में मोदी की लगातार विदेश यात्राओं और विभिन्न देशों के साथ हुए समझौतों को भी व्यापक रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा गया है। पिछले एक साल में भारत ने अलग-अलग क्षेत्रों और देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

रिपोर्ट की चर्चा सोशल मीडिया पर भी हुई है, जहां इसके शीर्षक और विश्लेषण को भारत की विदेश नीति के संदर्भ में साझा किया जा रहा है।

ट्रंप के साथ रिश्ते, लेकिन विकल्प भी तैयार

इस विश्लेषण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में सामने आता है। ट्रंप प्रशासन की नीतियां कई देशों के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं। ऐसे माहौल में भारत द्वारा अन्य देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करना एक तरह की हेजिंग रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत अमेरिका से दूरी बना रहा है। बल्कि रणनीति यह है कि अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी जारी रखते हुए भारत के पास अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ भी पर्याप्त विकल्प मौजूद रहें।

भारत की विदेश नीति में ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ का महत्व

भारत की मौजूदा विदेश नीति को कई विशेषज्ञ ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ के नजरिए से देखते हैं। इसका मूल विचार यह है कि भारत अलग-अलग देशों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर संबंध विकसित करे और किसी एक शक्ति खेमे पर पूरी तरह निर्भर न हो।

रूस से रक्षा और ऊर्जा संबंध, अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ तकनीक एवं निवेश सहयोग, खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा और व्यापार तथा यूरोप और एशिया के अन्य देशों के साथ आर्थिक साझेदारियां इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।

क्या संदेश देता है न्यूयॉर्क टाइम्स का विश्लेषण?

न्यूयॉर्क टाइम्स के इस विश्लेषण का व्यापक संदेश यह है कि भारत बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अपने लिए अधिक से अधिक रणनीतिक और आर्थिक विकल्प तैयार कर रहा है। अमेरिकी नीतियों में संभावित बदलावों के बावजूद भारत अपने वैश्विक संबंधों को एक ही दिशा में सीमित करने के बजाय कई मोर्चों पर विस्तार दे रहा है।

हालांकि, रिपोर्ट को प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की सीधी प्रशंसा के रूप में पेश करने के बजाय एक अमेरिकी मीडिया संस्थान द्वारा भारत की रणनीतिक स्थिति का विश्लेषण मानना अधिक उचित होगा। रिपोर्ट में भारत की रणनीति के अवसरों के साथ उसकी चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों को भी व्यापक संदर्भ में देखा गया है।

एक साथ कई मोर्चों पर भारत की तैयारी

न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण से एक तस्वीर उभरती है—भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को महत्वपूर्ण मानते हुए भी वैश्विक स्तर पर अपने विकल्पों का विस्तार कर रहा है। अलग-अलग देशों के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना इसी दिशा का हिस्सा है।

यानी बदलती वैश्विक राजनीति में भारत की रणनीति को एक ऐसे देश के रूप में देखा जा रहा है जो किसी एक साझेदार पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों के साथ अपने हितों के अनुरूप रिश्ते मजबूत कर रहा है। यही वह रणनीतिक बदलाव है, जिसे न्यूयॉर्क टाइम्स ने ‘एक डील के जरिए ट्रंप से निपटने’ वाली रणनीति के रूप में रेखांकित किया है।

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Author: cg24x7

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