21 साल की उम्र पूरी नहीं होने पर सरपंच का चुनाव निरस्त, हाईकोर्ट ने कहा- जन्मतिथि तय करने में शैक्षणिक रिकॉर्ड को मिलेगा अधिक महत्व
बिलासपुर, 8 सितंबर 2026।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवार की उम्र और जन्मतिथि को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड और वोटर आईडी में दर्ज जन्मतिथि को किसी व्यक्ति की उम्र निर्धारित करने के लिए निर्णायक या प्राथमिक प्रमाण नहीं माना जा सकता। जन्मतिथि के विवाद में जन्म प्रमाण पत्र, मान्यता प्राप्त बोर्ड का मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र और स्कूल रिकॉर्ड जैसे दस्तावेजों को अधिक महत्व दिया जा सकता है। यह फैसला जसिला थिथियो बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य मामले में आया है। हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत कृष्णानगर की सरपंच के चुनाव को निरस्त करने वाले निर्वाचन अधिकरण के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने निर्वाचन अधिकरण के फैसले को बरकरार रखा।
मामला क्या था?
मामला ग्राम पंचायत कृष्णानगर के सरपंच चुनाव से जुड़ा था। चुनाव जीतने वाली उम्मीदवार के खिलाफ यह आपत्ति उठाई गई कि नामांकन दाखिल करने के समय उनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी। पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होना आवश्यक है। निर्वाचन याचिका में दावा किया गया कि उम्मीदवार की वास्तविक जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 थी। इस हिसाब से नामांकन के समय वह 21 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर पाई थीं। दूसरी ओर, उम्मीदवार ने अपने आधार कार्ड और वोटर आईडी सहित कुछ दस्तावेजों के आधार पर अपनी जन्मतिथि 12 अप्रैल 2002 बताई थी। निर्वाचन अधिकरण ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनके चुनाव को निरस्त कर दिया था। इसके बाद उम्मीदवार ने हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने किन दस्तावेजों को माना अधिक विश्वसनीय?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जन्मतिथि निर्धारित करने के लिए उपलब्ध अलग-अलग दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे पहचान संबंधी दस्तावेज जन्मतिथि निर्धारित करने के प्राथमिक प्रमाण नहीं हैं। अदालत ने यह भी माना कि जन्म प्रमाण पत्र, मैट्रिकुलेशन या समकक्ष प्रमाणपत्र तथा स्कूल के प्रवेश रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज जन्मतिथि निर्धारित करने में अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। इस मामले में उम्मीदवार के कक्षा पहली से लेकर मैट्रिक तक के शैक्षणिक रिकॉर्ड में जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 दर्ज थी। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी मैट्रिक प्रमाणपत्र में भी यही जन्मतिथि दर्ज थी।
बाद में अपडेट कराया गया जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं आया काम
मामले में उम्मीदवार की ओर से ऐसा जन्म प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें जन्मतिथि 12 अप्रैल 2002 दर्ज थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस दस्तावेज को निर्णायक नहीं माना। कोर्ट के अनुसार यह जन्म प्रमाण पत्र 5 जुलाई 2025 को अपडेट होकर जारी हुआ था, जबकि चुनाव संबंधी विवाद पहले ही सामने आ चुका था। इसके अलावा इस दस्तावेज में दर्ज जन्मतिथि को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किए गए थे। इसके विपरीत, स्कूल और मैट्रिक के रिकॉर्ड में लंबे समय से एक ही जन्मतिथि दर्ज थी। इसलिए अदालत ने शैक्षणिक रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय माना।
पंचायत चुनाव के लिए 21 वर्ष की उम्र जरूरी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 243-F का भी उल्लेख किया। पंचायत का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होना आवश्यक है। इसलिए नामांकन दाखिल करने की तारीख पर यदि कोई उम्मीदवार 21 वर्ष की आयु पूरी नहीं करता है, तो वह पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पात्र नहीं माना जा सकता। अदालत ने पाया कि संबंधित उम्मीदवार की विश्वसनीय दस्तावेजी जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 थी। इस आधार पर नामांकन दाखिल करने के समय उनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी। लिहाजा उनका चुनाव वैध नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने निर्वाचन अधिकरण का फैसला रखा बरकरार
अदालत ने पूरे मामले पर विचार करने के बाद याचिका में कोई मेरिट नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। इस तरह ग्राम पंचायत कृष्णानगर की सरपंच के चुनाव को निरस्त करने संबंधी निर्वाचन अधिकरण का आदेश प्रभावी रहा। फैसले में यह भी दर्ज है कि बाद में इस पद के लिए नए चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी थी।
चुनाव लड़ने वालों के लिए महत्वपूर्ण संदेश
हाईकोर्ट का यह फैसला पंचायत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि केवल पहचान दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर उम्र संबंधी पात्रता साबित नहीं की जा सकती, खासकर तब जब अन्य विश्वसनीय और पुराने रिकॉर्ड में अलग जन्मतिथि दर्ज हो। ऐसे मामलों में जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड और बोर्ड द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। चुनावी पात्रता से जुड़े विवाद में दस्तावेजों की उत्पत्ति, समय, प्रामाणिकता और उनके बीच मौजूद निरंतरता भी अदालत के विचार का विषय बन सकती है।
फैसले का सार
- आधार कार्ड और वोटर आईडी में दर्ज जन्मतिथि को प्राथमिक/निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया।
- स्कूल और मैट्रिकुलेशन रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय दस्तावेज माना गया।
- पंचायत चुनाव में उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होना जरूरी है।
- 21 वर्ष की उम्र पूरी नहीं होने पर सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ना वैधानिक रूप से संभव नहीं है।
- हाईकोर्ट ने निर्वाचन अधिकरण द्वारा चुनाव निरस्त किए जाने के आदेश को बरकरार रखा।
Author: cg24x7




