रागी की खेती फसल प्रदर्शन तक सीमित, बिक्री के लिए मंडी नहीं

रागी की खेती फसल प्रदर्शन तक सीमित, बिक्री के लिए मंडी नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों ने अब रागी का राग अलापना बंद सा कर दिया है। इसके कारण रायपुर जिले में भी रागी की खेती सिर्फ प्रदर्शन फसल तक ही सीमित बनकर रह गई है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत (आरकेवीवाय) योजना अंतर्गत रागी की प्रदर्शन फसल के लिए कृषि विभाग को जो लक्ष्य दिया जा रहा है, उसे भी अब पूरा नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 158 हेक्टेयर लक्ष्य के एवज में 110 हेक्टेयर रागी फसल का ही उत्पादन किया जा सका है। शेष 48 हेक्टेयर फसल का उत्पादन ही नहीं किया जा सका, जबकि राज्य और केंद्र सरकार ने लक्ष्य के अनुरूप राशि का आवंटन और रिलीज भी कर चुका है।

तत्कालीन कांग्रेस शासन काल से रागी की खेती को बढ़ावा देने के लिए आरकेवीवाय योजना के तहत किसानों को प्रदर्शन के तहत फसल लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस योजना के तहत जिले के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्रों में से रायपुर उत्तर, रायपुर दक्षिण, रायपुर पश्चिम एवं बलौदाबाजार को छोड़कर रायपुर ग्रामीण, धरसींवा, अभनपुर एवं आरंग में रागी की फसलों का उत्पादन भी कराया जा रहा है। सबसे ज्यादा रागी फसल का उत्पादन धरसींवा और र अभनपुर क्षेत्र में किया जा रहा है। हालांकि शुरुआती वर्ष के बाद के तीन वर्षों के दौरान रागी की फसल में लगातार गिरावट आई है।

धान की तुलना में रागी फसल का समर्थन मूल्य ज्यादा है। प्रति एकड़ समर्थन मूल्य 3578 रुपए है। इसके अलावा 6 हजार रुपए का अनुदान भी दिया जाता है। रागी की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान और अधिक समर्थन मूल्य दिया जा रहा है, लेकिन जिले में रागी की फसल खरीदी के लिए अब तक कोई शासकीय समिति केंद्र नहीं बनाया गया है। रायपुर संभाग की बात करें तो सबसे नजदीक में बिलाईगढ़ में खरीदी केंद्र है, लेकिन रायपुर से इसकी दूरी भी बहुत ज्यादा है। रागी की खेती करने में किसानों के रूची नहीं लेने का यह भी एक कारण है।

जिले में पहले वर्ष 2021-22 में रागी की करीब 100 हेक्टेयर रकबा में खेती करने का लक्ष्य था। इसकी तुलना में करीब 55 एकड़ रकबा में खेती भी हुई थी। दूसरे वर्ष 2022-23 में 100 हेक्टेयर का लक्ष्य था। इसके एवज में 16 हेक्टेयर रकबा की खेती हो पाई। इसी प्रकार वर्ष 2023-24 में 75 हेक्टेयर रकबा की तुलना में सिर्फ 2 हेक्टेयर में ही फसल लगाई गई, जबकि चौथे वर्ष 2024-25 में लगभग 55 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इस वर्ष भी रागी की फसल का उत्पादन बहुत कम मात्रा में हो पाया। हालांकि पांचवें वर्ष 2025-26 में पिछले चार वर्षों की तुलना में सर्वाधिक 148 हेक्टेयर फसल प्रदर्शन का लक्ष्य रखा गया था। इस लक्ष्य को भी पूरा नहीं किया जा सका है। जिला पंचायत सामान्य सभा की बैठक में आए आकड़ों के अनुसार शेष 48 हेक्टेयर फसल को अब रबी सीजन में उत्पादन कराकर लक्ष्य को पूरा किया जाएग।

 

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Author: cg24x7

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