टोकन नहीं मिलने से किसान ने जान देने की कोशिश, तहसीलदार को नोटिस, पटवारी निलंबित

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में धान बेचने के लिए राज्य सरकार के द्वारा शुरु की गई ऑनलाइन सुविधा में धान बेचने के लिए टोकन नहीं कटने से परेशान किसान ने आज जहर खा लिया। परिजनों के द्वारा उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में दाखिल कराया गया है। किसान द्वारा रकबे के रिकार्ड में सुधार करने के लिए तहसील में आवेदन लगाने के बाद भी कार्यवाही नहीं होने पर भी जनदर्शन में भी आवेदन दिया गया था। जहां सुनवाई नहीं होने की स्थिति पर हताश किसान ने घर में रखा कीटनाशक पदार्थ खा लिया। इस घटना से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले में तहसीलदार को नोटिस दी गई है और पटवारी को निलंबित कर दिया गया है। आनन फानन में जांच टीम भी गठित की गई है।

कटघोरा अनुभाग के हरदीबाजार तहसील के ग्राम कोरबी धतुरा निवासी सुमेर सिंह गोंड़ अपना 65 क्विंटल धान बेचने के लिए पिछले कई दिनों से परेशान था। सुमेर सिंह की पत्नी मुकुंद बाई ने बताया कि उनके पास 3 एकड़ 75 डिसमिल जमीन थी। गिरदावरी के दौरान किसान के द्वारा जिस खसरे नंबर की जमीन में धान की फसल ली गई थी। पटवारियों ने अपने रिकार्ड में उस खसरे नंबर पर अन्य फसल लेना दर्ज कर दिया। पिछले बुधवार 7 जनवरी से ऑनलाइन टोकन काटने की सुविधा भी बंद कर दी गई इससे परेशान होकर सुमेर सिंह ने जहर खा लिया। गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों ने उसे अस्पताल में दाखिल कराया। जैसे ही यह खबर प्रशासनिक हल्कों तक पहुंची हड़कंप मच गया। उधर सांसद ज्योत्सना महंत को किसान के जहर खाने की सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंची और किसान से मिलकर उसकी आपबीती सुनी।

पटवारी हल्का नंबर 03, रा.नि.मं. तिवरता, तहसील हरदीबाजार के ग्राम नोनबिर्स, उड़ता एवं पूटा के कृषकों के रकबा की ऑनलाइन मैपिंग की गई थी। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, पाली द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार संबंधित पटवारी कामिनी कारे द्वारा अनेक कृषकों का क्षेत्र निरीक्षण एवं सत्यापन नहीं किया गया, जिसके कारण प्रभावित कृषक धान उपार्जन केंद्रों में अपना धान विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। कामिनी कारे, पटवारी हल्का क्रमांक 03 को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। तहसीलदार हरदीबाजार अभिजीत राजभानु को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस पूरे मामले में सांसद ज्योत्सना महंत ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री हैं और उसके बावजूद आदिवासी किसान आत्महत्या करने मजबूर हो रहे हैं। धान खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था का आलम है ना तो किसानों का रिकार्ड सुधर रहा है और ना ही टोकन कट रहा है और ना उनकी कहीं सुनवाई हो रही है। इस पूरे मामले में सरकार की लापरवाही सामने आयी है।

किसान के द्वारा जहर सेवन किए जाने के संबंध में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लखन देवांगन ने कहा कि गिरदावरी के दौरान किसान के रकबे को घटा दिया गया था जिसके सुधार के लिए उसने तहसीलदार के पास आवेदन लगाया था। तहसीलदार को रिकार्ड में सुधार करना था, नहीं किए जाने की स्थिति में किसान ने यह कदम उठाया। इस मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई है उसमें जो भी दोषी होगा उस पर कार्यवाही होगी।

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Author: cg24x7

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