रायपुर का नया मास्टर प्लान अटका : पुराने में बदलाव की प्रक्रिया धीमी, हो रहा है इंतजार

रायपुर। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनाए गए रायपुर के मास्टर प्लान में मौजूदा सरकार बड़े और आवश्यक बदलाव करना चाहती है। यही कारण है कि संशोधित मास्टर प्लान को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। इधर रायपुर में नए मास्टर प्लान का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है।

ये है मामला
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर देश के उन चुनिंदा शहरों में शुमार है, जहां आबादी हर साल बढ़ती जा रही है। करीब 20 लाख की आबादी वाले इस शहर में अगले दस वर्षों में संख्या 30 से 35 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यही वजह है शहर के दूरदर्शी विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने लंबी एक्सरसाइज की गई, लेकिन अब तक मास्टर प्लान तैयार नहीं किया जा सका, जबकि नए मास्टर प्लान में रूप में विकसित करने की योजना है। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने करीब दो माह के भीतर रायपुर शहर का मास्टर प्लान जारी करने की घोषणा की थी।

क्या कहते हैं स्थानीय नेता
रायपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं पूर्व सांसद सुनील सोनी का कहना है आने वाले कुछ वर्षों में ट्रैफिक की समस्या सबसे बड़ी होगी, लिहाजा ऐसे विषयों को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान तैयार किया जाना चाहिए। आरडीए के पूर्व अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि शहर के भविष्य को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान बनाया जाना चाहिए। भाजपा नेताओं के बयानों से अलग कांग्रेस के मीडिया प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सी वर्गों से चर्चा कर दावा-आपत्ति मंगाकर इसे तैयार किया था। सरकार बदलने के बाद भाजपा ने केवल भयादोहन करने की नीयत से इसे रद्द किया। ये भाजपा सरकार की संकीर्ण मानसिकता के अलावा कुछ नहीं है।

नए मास्टर प्लान के माइल स्टोन
राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तैयार किए गए मास्टर प्लान को उपयुक्त नहीं पाया था। सूत्रों के अनुसार इस मास्टर प्लान में भविष्य के रायपुर के हिसाब से तैयार किया जाना है, इसलिए इसमें आवश्यक बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। बताया गया है कि अब नया मास्टर प्लान 30 से 35 लाख की आबादी के अनुमान के हिसाब से तैयार किया जाएगा इसमें लॉजिस्टिक हब, रेसिडेंशियल हब और एजुकेशनल हब के लिए नए स्थान होंगे तय, कनेक्टिविटी, वाटर रिसोर्सेज, ट्रैफिक, सीवेज, इंडस्ट्रयल ग्रोथ पर फोकस होगा। इसके साथ ही पिछले मास्टर प्लान की विसंगतियों को दूर कर नए शहरी क्षेत्रों का होगा विकास करना प्रस्तावित है। रायपुर के 30 से 40 किलोमीटर क्षेत्र का भी अलग अलग हब के रूप में विकास करने की तैयारी है।

पुराने प्लान में कई विसंगतियां
राज्य सरकार ने पुराने मास्टर प्लान में कई विसंगतियों के मद्देनजर इस बदलने की तैयारी की है। इसके पीछे वजह ये है कि कांग्रेस शासन में मास्टर प्लान 2031 तैयार किया गया था। तब रायपुर शहर का कुल क्षेत्रफल 503.67 वर्ग किलोमीटर मानकर मास्टर प्लान बनाया गया, लेकिन इसमें कई विसंगतियां भी सामने आई। आरोप लगे कि जमीन कारोबारियों और अपने करीबियों को लाभ पहुंचाने के लिए मास्टर प्लान को तैयार किया गया है। यही वजह है कि इस मास्टर प्लान को संशोधित या बदलकर नए सिरे से अगले 25 से 30 सालों के अनुरुप मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।

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Author: cg24x7

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