समर्पण करने वाले सभी नक्सलियों का होगा सत्यापन, पिछले जीवन का तैयार होगा ब्योरा

समर्पण करने वाले सभी नक्सलियों का होगा सत्यापन, पिछले जीवन का तैयार होगा ब्योरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आत्मसर्मपण करने वाले नक्सलियों का अब सत्यापन होगा। खास बात ये है कि इस काम के लिए राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को अधिकृत किया है। सत्यापन के दौरान समर्पितों द्वारा दी गई जानकारी का ब्योरा तैयार किया जाएगा। मार्च में छतीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित किया गया है, लेकिन इससे पहले राज्यभर में करीब 2700 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है।

छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य में वामपंथी उग्रवाद के खात्मे और नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार के गृह विभाग (सी-अनुभाग) द्वारा जारी इस नवीन आदेश के तहत, अब नक्सल प्रभावित जिलों के जिला पुलिस अधीक्षकों को आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों द्वारा दी गई जानकारी और विवरण को लेखबद्ध करने तथा उसे अद्यतन (अपडेट) करने के लिए आधिकारिक रूप से नामांकित किया गया है ।

यह निर्णय भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा पूर्व में जारी (2013 एवं 2022) नक्सलियों के आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्ययोजना के दिशा-निर्देशों के परिपालन में लिया गया है। केंद्र सरकार की नीति के बिंदु 62 के अनुसार, कोई भी नक्सल कैडर जिला मजिस्ट्रेट, एसपी, रेंज डीआईजी, या अन्य अधिसूचित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए स्वतंत्र है।

राज्य में नक्सलियों के सत्यापन के पीछे वजह ये है कि समर्पण करने वाले नक्सलियों के पूर्ववृत यानि उनके पिछले जीवन की जानकारी ली जाएगी। आत्मसमर्पित माओवादियों द्वारा दी गई जानकारी को निर्धारित प्रोफार्मा में भरकर संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दी गई जानकारी का संबंधित निकायों से सटीक सत्यापन कराया जाए। जानकारों का मानना है कि जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षकों को सीधे तौर पर विवरण अपडेट करने के लिए नामांकित करने से पुनर्वास योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक जल्द पहुंच सकेगा और छद्म आत्मसमर्पण जैसी स्थितियों पर लगाम लगेगी।

छत्तीसगढ़ में पिछले तीन वर्षों (2024 से 2026 तक) के दौरान नक्सल मोर्चे पर आत्मसमर्पण के आंकड़ों में भारी वृद्धि देखी गई है। आधिकारिक आंकड़ों और रिपोटों के अनुसार,जनवरी 2024 से लेकर मार्च 2026 के शुरुआती सप्ताह तक प्रदेश में 2,714 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। इनमें से अकेले बस्तर संभाग में जनवरी, 2024 से मार्च, 2026 के बीच 2,625 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। वर्षवार आंकड़ों पर गौर करें तो 2024 में कुल 881 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़‌कर लगभग 1,973 (अक्टूबर तक के आंकड़ों सहित) तक पहुंच गई।

आत्मसमर्पण करने वालों में बड़े कैडर के नेताओं से लेकर निचले स्तर के सदस्य तक शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, मार्च 2026 में एक साथ आत्मसमर्पण करने वाले 108 नक्सलियों में 6 डिवीजनल कमेटी सदस्य (जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था), 3 कंपनी प्लाटून कमेटी कमांडर, 18 प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य, 23 एरिया कमेटी सदस्य और 56 साधारण पार्टी सदस्य शामिल थे। महिलाओं की भागीदारी की बात करें तो मार्च 2026 की एक बड़ी घटना में आत्मसमर्पण करने वाले 15 नक्सलियों में से 9 महिलाएं थीं। इसके अतिरिक्त, 2025 के अंत तक समर्पण करने वालों में 10 वरिष्ठ ऑपरेटिव भी शामिल थे, जिनमें से एक पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था।

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Author: cg24x7

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