रायपुर। देशभर में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार लोकसभा में परिसीमन आयोग के गठन के लिए विधेयक लाने की तैयारी में है। विधेयक को मंजूरी मिलती है तो पांच दशक के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभा की सीटों में बढ़ोतरी हो सकती है। छत्तीसगढ़ में 1977 के बाद से न तो लोकसभा और न ही राज्य विधानसभा की सीटों में वृद्धि हुई है।देश में अब तक चार बार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है।
आयोगों की रिपोर्ट के आधार पर ही तीन बार लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों की संख्या में बदलाव किए गए । छत्तीसगढ़ में भी 1952, 1962 और 1972 में गठित परिसीमन आयोगों की रिपोर्ट के आधार पर सीटों की संख्या में कमी या बढ़ोतरी हुई। 2002 में गठित परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर सिर्फ विधानसभा क्षेत्रों के नामों और क्षेत्रों में ही बदलाव किए गए। सीटों की संख्या जस की तस यानी 90 ही रही।
आगामी परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होने की संभावना है। इसमें छत्तीसगढ़ में लोकसभा की 4 और राज्य विधानसभा की 35 से 40 सीटें बढ़ने का अनुमान है। 1952 से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ क्षेत्र में विधानसभा सीटों की संख्या में 4 बार बदलाव हुए हैं। 1952 के पहले चुनाव के समय छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या 82 थी। लेकिन अगले चुनाव यानी 1957 में सीटों की संख्या घटकर 81 हो गई 162 के चुनाव में भी इतनी ही सीटों पर चुनाव हुए । 1962 में गठित परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 1967 में विधानसभा क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 84 हो गई। 1972 में भी इतनी ही सीटों पर चुनाव हुए। 1972 में फिर परिसीमन आयोग का गठन किया गया। तब आयोग ने सीटों की संख्या बढ़ाकर 90 करने का सुझाव दिया और तब से लेकर अब तक 90 सीटों के लिए ही चुनाव कराए जा रहे हैं।
सेवानिवृत्त आईएएस में पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुशील त्रिवेदी का कहना है कि 2002 में गठित परिसीमन आयोग की प्रक्रिया पूरी होने में करीब 7 साल का समय लगा था, लेकिन अब एआई के आने और संसाधनों में बढ़ोतरी के बाद परिसीमन की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अभी जो खबरें आ रहीं हैं उसके मुताबिक लोकसभा और राज्य विधानसभा की सीटें डेढ़ गुना तक बढ़ सकती हैं, इस हिसाब से राज्य में विधानसभा की सीटें 135 और लोकसभा की सीटें बढ़कर 17 हो सकती हैं।
Author: cg24x7




