रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की सेवाओं में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के शासकीय सेवकों को पदोन्नति में आरक्षण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नवीनतम आदेश के अलग अनुसार, पदोन्नति में आरक्षण के प्रावधानों के लिए ‘मात्रात्मक आंकड़े’ क्वांटिफायएबल डाटा तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
यह निर्णय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न जनहित याचिकाओं और सर्विस याचिकाओं में पारित अंतिम आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। सरकार का यह कदम उच्चतम न्यायालय द्वारा जरनैल सिंह बनाम लक्ष्मी नारायण गुप्ता और एम. नागराज बनाम भारत संघ जैसे ऐतिहासिक मामलों में निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप है।
राज्य सरकार ने इस सिलसिले में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई है। जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि आंकड़ों का संकलन सटीक और पारदर्शी हो। कमेटी इस प्रकार है। अध्यक्ष- मनोज कुमार पिंगुआ (अपर मुख्य सचिव, गृह एवं जेल विभाग)। सदस्य- सोनमणी बोरा (प्रमुख सचिव, अनुसूचित जाति/जनजाति विकास विभाग) और रजत कुमार (सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग तथा सामान्य प्रशासन विभाग) । सदस्य सचिव- हिना अनिमेश नेताम (संचालक, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान) । अन्य सदस्य-संजय गोंड़ (उपायुक्त), डॉ. अनिल कुमार विरुलकर (अनुसंधान सहायक अधिकारी) और अमर दास (अनुसंधान सहायक)।
यह नया आदेश विभाग के पूर्ववर्ती आदेशों (जुलाई 2024 और जनवरी 2025) का स्थान लेगा। समिति का मुख्य कार्य राज्य की सेवाओं में एससी एसटी वर्ग के प्रतिनिधित्व से संबंधित मात्रात्मक आंकड़े एकत्र करना और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करना है । आदेश की प्रतिलिपि राज्यपाल के सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार और सभी संबंधित विभागों को आवश्यक कार्यवाही हेतु भेज दी गई है। माना जा रहा है कि इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद राज्य में लंबे समय से लंबित पदोन्नति में आरक्षण के विवाद को सुलझाने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
Author: cg24x7




