बिलासपुर। सहकारी समितियों में खाद लेने के लिए तो टोकन अनिवार्य है ही, लेकिन किसानों को अब खुले बाजार की निजी खाद दुकानों से भी खाद लेने के लिए टोकन अनिवार्य करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। बिलासपुर जिले में सेवा सहकारी समितियों की संख्या 146 है।
वहीं कृषि विभाग से उर्वरक लाईसेंस लेकर संचालित 255 दुकानों में खाद की बिक्री के लिए जल्द ही नई टोकन व्यवस्था लागू हो जाएगी। सहकारी समितियों में अपनी मर्जी से बिना जरूरत के भी खाद का उठाव करने वाले किसानों को इस साल ऐसा करने की छूट नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं, बल्कि खुले बजार में नगद रकम देकर जितनी मर्जी खाद का उठाव करने वाले किसान भी इस साल मायूस हो जाएंगे।
निजी दुकानों से भी खाद लेने के लिए उन्हें एप में जाकर ऑनलाईन टोकन लेना होगा। इसके बाद ही वे बाजार से खाद का उठाव कर सकेंगे। हालांकि सरकार द्वारा बीते वर्ष ही इसकी तैयारी शुरू कर दी गई थी, लेकिन इस साल जरूरत के अनुरूप खाद का भंडारण कम होने एवं भविष्य में भी उत्पादन में कमी के कारण आवक कमजोर होने के कारण सरकार द्वारा इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार यह व्यवस्था मध्यप्रदेश में लागू हो चुकी है, जिसे अब पूरे देश में लागू करने की तैयारी है।
समर्थन मूल्य पर सहकारी समितियों में धान बेचने के लिए बीते वर्ष एग्रीस्टेक में पंजीयन अनिवार्य किया गया था, लेकिन इस साल इसमें और कड़ाई करते हुए अब बगैर एग्रीस्टेक पंजीयन वाले किसानों को खाद देने पर भी प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा रही है। जिले में अब तक 1 लाख 40 हजार 633 किसानों ने अपना एग्रीस्टेक पंजीयन करवा लिया है, लेकिन 1 हजार 558 किसान अब भी पंजीयन से बाहर हैं।
उप संचालक कृषि, पीडी हथेश्वर ने बताया कि, सहकारी समितियों के अलावा अब निजी उर्वरक दुकानों से भी खाद लेने पर किसानों को अनिवार्य रूप से टोकन लेना होगा। इसके लिए साफ्टेवयर तैयार किया जा रहा है। बिना एग्रीस्टेक पंजीकृत किसानों को भी खाद नहीं दी जाएगी। किसानों को उनके पास उपलब्ध जमीन के आधार पर ही खाद दी जाएगी, ताकि खाद का अपव्यय न हो सके। इस व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी पर भी पूरी तरह रोक लग जाएगी। जिले में 255 निजी उर्वरक दुकानें हैं, जहां आने वाले समय में टोकन सिस्टम लागू करने की तैयारी है।
Author: cg24x7




