जमीन विवाद पर तीन लोगों की हत्या, तीन बार आजीवन कारावास की सजा बरकरार

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने घायल गवाह के बयान को हत्या का पुख्ता साक्ष्य मानते हुए जमीन विवाद पर तीन लोगों की हत्या करने के आरोपी पिता-पुत्र की सजा के खिलाफ पेश अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि एक “संबंधित” गवाह, जो एक घायल गवाह भी है, जो क्राइम की जगह पर नैचुरली मौजूद हो सकता है, उसकी गवाही को सिर्फ़ इसलिए खारिज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह पीड़ित से जुड़ा है और कोर्ट को पीड़ित से जुड़ा है और कोर्ट को उसके बयान की भरोसेमंदता, एक जैसापन और तालमेल का आकलन करना चाहिए।

तुमगांव थाना क्षेत्र के ग्राम जोबा में 11 सितंबर 2025 को आरोपी परसराम गायकवाड़ और बृज सेन गायकवाड़ ने जमीन बंटवारे के विवाद में ओसराम गायकवाड़ के घर मे घुसकर उसकी पत्नी जागृति, 16 वर्षीय पुत्री टीना गायकवाड़, 9 वर्षीय पुत्र मनीष गायकवाड़ की गला काट कर हत्या कर दी। साथ ही दूसरे कमरे में मौजूद पुत्री गीतांजलि गायकवाड़, ओमान गायकवाड़ व ओस राम की बुजुर्ग माँ अनारबाई गायकवाड़ को गम्भीर रूप से घायल कर दिया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 459 के तहत 10 वर्ष के लिए साधारण कारावास, धारा 302 के साथ 34 के तहत (तीन बार) आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

सजा के खिलाफ आरोपियों ने हाई कोर्ट में अपील पेश की थी। अपील में आरोपियों ने मामले में स्वतंत्र गवाह नहीं होने व घायल गवाहों के पीड़तिों से सम्बंधित होने के कारण भरोसेमंद नहीं होने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज किया है। कोर्ट ने कहा कि हत्या के इरादे से हमला किया गया और उन्हें गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाया गया। इसलिए आरोपी की सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा जाता है

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Author: cg24x7

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